थलापति विजय की ‘जन नायकन’ की रिलीज पर फंसा पेंच, सेंसर बोर्ड के बाद चुनाव आयोग की तिरछी नजर!

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तमिलनाडु में चुनाव आचार संहिता के बीच सुपरस्टार और ‘तमिलनाडु विजयक पार्टी’ के लीडर थलापति विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ की रिलीज को लेकर कानूनी पेंच फंस गया है. राज्य के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार है जब किसी एक्टिव पार्टी अध्यक्ष और उम्मीदवार की फिल्म चुनाव के दौरान रिलीज होने वाली है. मुख्य चुनाव अधिकारी अर्चना पटनायक ने साफ है कि इस अनोखे केस पर भारतीय चुनाव आयोग से सलाह ली जाएगी कि क्या ऐसे हालात में खास अनुमति की जरूरत है. फिलहाल, फिल्म की रिलीज और सेंसर बोर्ड के रिव्यू के नतीजों पर सस्पेंस बना हुआ है.

नई दिल्ली: तमिलनाडु की राजनीति और सिनेमा के इतिहास में एक ऐसा मोड़ आया है जो पहले कभी नहीं देखा गया. सुपरस्टार और ‘तमिलनाडु विजयक पार्टी’ के अध्यक्ष थलापति विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ की रिलीज को लेकर जबरदस्त चर्चा छिड़ गई है. फिल्म को लेकर सस्पेंस तब और गहरा गया, जब राज्य में चुनाव आचार संहिता लागू हो गई, जिससे फिल्म की रिलीज पर कानूनी और राजनीतिक सवाल खड़े होने लगे हैं.

थलापति विजय की इस फिल्म को सेंसर बोर्ड से हरी झंडी मिलने के लिए काफी लंबा स्ट्रगल करना पड़ा है. हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘न्यूज18 तमिल’ की रिपोर्ट के अनुसार, हाल में सेंसर बोर्ड ने इसका दोबारा रिव्यू किया था, लेकिन इसके नतीजों को लेकर अभी तक कोई साफ ऐलान नहीं किया गया. इस बीच, चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण विवाद और बढ़ गया है, क्योंकि विजय अब सिर्फ एक एक्टर नहीं, बल्कि एक एक्टिव राजनीतिक दल के मुखिया भी हैं.

तमिलनाडु के राजनीतिक इतिहास में यह अपनी तरह का पहला मामला है. इससे पहले, कई अभिनेताओं ने राजनीति में कदम रखा, लेकिन चुनाव के ठीक पहले किसी पार्टी के अध्यक्ष और उम्मीदवार की बड़ी फिल्म का रिलीज होना एक नए हालात पैदा कर रहा है. जानकारों का मानना है कि इस फिल्म का असर मतदाताओं की पसंद पर पड़ सकता है, यही वजह है कि मामला चुनाव आयोग तक पहुंच गया है.

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पूरे विवाद पर तमिलनाडु की मुख्य चुनाव अधिकारी अर्चना पटनायक ने अपनी चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने इस मामले में एक अहम सफाई देते हुए कहा कि फिल्म की रिलीज को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह साफ नहीं है. उन्होंने स्वीकार किया कि किसी राजनीतिक दल के अध्यक्ष की फिल्म को चुनाव के दौरान रिलीज करने के नियमों पर गहराई से विचार करने की जरूरत है.

अर्चना पटनायक ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह सवाल वाकई अहम है कि क्या चुनाव के समय एक ‘उम्मीदवार एक्टर’ की फिल्म रिलीज करने के लिए चुनाव आयोग की खास अनुमति जरूरी है. उन्होंने साफ किया कि चूंकि यह तमिलनाडु में पहली बार हो रहा है, इसलिए राज्य चुनाव आयोग सीधे तौर पर कोई फैसला नहीं ले सकता.

चुनाव अधिकारी ने आगे बताया कि इस पेचीदा मामले पर ‘भारतीय चुनाव आयोग’ के साथ विस्तार से चर्चा की जाएगी. दिल्ली स्थित मुख्यालय से मशविरा करने के बाद ही इस पर कोई अंतिम जवाब दिया जाएगा. चुनाव आयोग यह देखना चाहता है कि क्या फिल्म की रिलीज से चुनाव के मैदान में किसी एक पक्ष को अनुचित लाभ मिल सकता है.

फिलहाल, फिल्म ‘जन नायकन’ को लेकर तमिलनाडु की राजनीति में भारी उम्मीदें और हलचल बनी हुई है. विजय के फैंस जहां फिल्म को जल्द से जल्द पर्दे पर देखना चाहते हैं, वहीं उनके राजनीतिक विरोधी इस पर पैनी नजर रखे हुए हैं. फिल्म का विषय और विजय का राजनीतिक कद, दोनों ही इसे बेहद संवेदनशील बना रहे हैं.

अब सबकी नजरें चुनाव आयोग के अगले कदम पर टिकी हैं. आयोग का फैसला न केवल ‘जन नायकन’ का भविष्य तय करेगा, बल्कि आने वाले समय में राजनीति और सिनेमा के इस मेल के लिए एक नई मिसाल भी कायम करेगा. तमिलनाडु के लोग और विजय के करोड़ों चाहने वाले अब बस ऑफिशियल ऐलान का इंतजार कर रहे हैं.

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