पूजा में चूरमे के लड्डू का खास भोग, जानिए गणगौर प्रसाद बनाने की आसान ट्रिक
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Famous Recipe Gangaur Ka Laddu : राजस्थान का गणगौर पर्व सुहाग, सौभाग्य और खुशहाली का प्रतीक है. महिलाएं ईसर-गौर की पूजा करती हैं और चूरमे के लड्डू का प्रसाद बनाती हैं. कुमकुम ने पारंपरिक रेसिपी साझा की. गृहिणी कुमकुम ने लोकल18 को बताया कि चूरमे के लड्डू बनाने की पारंपरिक रेसिपी में सबसे पहले थोड़ा मोटा गेहूं का आटा लिया जाता है. इसमें घी का मोयन डालकर अच्छे से मिलाया जाता है, जिससे लड्डू का स्वाद और भी बढ़ जाता है.
जालौर. राजस्थान का खास और पारंपरिक पर्व गणगौर सुहाग, सौभाग्य और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है. इस पावन अवसर पर जहां महिलाएं ईसर-गौर की पूजा करती हैं, वहीं घर-घर में पारंपरिक व्यंजनों की भी खास तैयारी की जाती है.
गणगौर के इस त्योहार पर चूरमे के लड्डू का विशेष महत्व होता है. इन्हें प्रसाद के रूप में बनाया जाता है और ईसर-गौर को भोग लगाकर परिवार में बांटा जाता है. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और आज भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ निभाई जाती है.
पारंपरिक तरीके से बनते हैं चूरमे के लड्डू
गृहिणी कुमकुम ने लोकल18 को बताया कि चूरमे के लड्डू बनाने की पारंपरिक रेसिपी में सबसे पहले थोड़ा मोटा गेहूं का आटा लिया जाता है. इसमें घी का मोयन डालकर अच्छे से मिलाया जाता है, जिससे लड्डू का स्वाद और भी बढ़ जाता है. इसके बाद गरम पानी की मदद से आटे को गूंथ लिया जाता है. आटा तैयार होने के बाद इसके छोटे-छोटे बाटे बनाए जाते हैं. इन बाटियों को ओवन या पारंपरिक चूल्हे में अच्छी तरह से सेंका जाता है, जब तक कि ये कुरकुरी और सुनहरी न हो जाएं. इसके बाद इन्हें ठंडा करके छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाता है.
स्वाद का राज छुपा है दरदरेपन में
इन टुकड़ों को मिक्सी में डालकर दरदरा पीसा जाता है. कुमकुम के अनुसार चूरमे का असली स्वाद उसके दरदरेपन में ही होता है, इसलिए इसे ज्यादा बारीक नहीं पीसना चाहिए. इसके बाद इसमें शक्कर का बुरादा मिलाया जाता है और साथ ही घी और काजू-बादाम जैसे ड्राई फ्रूट्स भी डाले जाते हैं. सभी सामग्री को अच्छी तरह मिक्स करने के बाद इस मिश्रण से गोल-गोल लड्डू तैयार किए जाते हैं. तैयार चूरमे के लड्डू देखने में जितने आकर्षक होते हैं, स्वाद में उतने ही लाजवाब होते हैं.
कुमकुम बताती हैं कि जब ये लड्डू बनकर तैयार होते हैं और पूजा में चढ़ते हैं, तो पूरे घर में भक्ति और खुशियों का माहौल बन जाता है. इसके बाद इन्हें प्रसाद के रूप में परिवार और आसपास के लोगों में बांटा जाता है, जिससे त्योहार की मिठास और भी बढ़ जाती है.
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नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें