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भारतीय रेलवे काम में लापरवाही अब किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं करेगा.जो लोग ऐसा कर रहे हैं,उन पर सख्त एक्शन हो रहा है. रेलवे की छवि को सुधारने के लिए मंत्रालय कोई भी कोर कसर नहीं छोड़ना चाह रहा है.यही वजह है कि गुरुवार देर रात रेलवे ने खराब परफार्मेंश करने वाले छह अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है.

अलग अलग जोन के हैं अधिकारी.
नई दिल्ली. भारतीय रेलवे काम में लापरवाही अब किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं करेगा.जो लोग ऐसा कर रहे हैं,उन पर सख्त एक्शन हो रहा है. रेलवे की छवि को सुधारने के लिए मंत्रालय कोई भी कोर कसर नहीं छोड़ना चाह रहा है.यही वजह है कि गुरुवार देर रात रेलवे ने खराब परफार्मेंश करने वाले छह अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है. इन पर सख्त कार्रवाई करते हुए रेलवे ने यह मैसेज दे दिया है कि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा प्राथमिकता है, जो अब किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
रेलवे मंत्रालय के अनुसार प्रदर्शन में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए भारतीय रेल ने 6 अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी है. यह कार्रवाई भारतीय रेल स्थापना संहिता (आईआरईसी) के नियम 1802(क) के तहत की गई है.
किन पर हुई कार्रवाई
जिन अधिकारियों पर कार्रवाई की गयी है, उनमें जोन के इंजीनिरिंग सेक्शन के प्रमुख भी शामिल हैं. सेवानिवृत्त किए गए अधिकारियों में सीएमई /प्रोजेक्ट/मुख्यालय, उत्तर रेलवे, एनफ- एचएजी/ आईआरएसएमई, दक्षिण पश्चिम रेलवे, एसएजी/ आईएसआरई, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे; एसएजी/ आईआरएसएसई, पूर्वी रेलवे; ग्रेड-1, (अंडर सेक्रेटरी/डिप्टी डायरेक्टर), आरबीएसएस; पीपीएस और आरबीएसएसएस शामिल हैं.
क्यों उठाया कदम
यह कदम रेलवे की अपने तंत्र में ऑपरेशंस दक्षता और जवाबदेही बनाए रखने की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है. नियम 1802(क) प्रशासन को जनहित में अधिकारियों को सेवानिवृत्त करने का अधिकार देता है और यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत है कि गैर-प्रदर्शन और अक्षमता को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
मच गया हड़कंंप
रेलवे अधिकारियों और कर्मचारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे इस कदम को गंभीरता से लें, क्योंकि प्रशासन ने सेवा मानकों को पूरा न करने वालों के प्रति अपनी शून्य-सहनशीलता नीति को पुनः स्पष्ट किया है. इस एक्शन के बाद भारतीय रेलवे में हड़कंप मच गया है. तमाम अधिकारी एक दूसरे को फोन करके वजह पूछ रहे हैं.