इनसाइड स्टोरी: केरल में टिकट बंटवारे पर क्यों उलझी थी कांग्रेस? क्या बागियों के सहारे विजयन सरकार को घेर पाएगी

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नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम. 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने में अब सिर्फ तीन दिन बचे हैं. ऐसे में, कांग्रेस ने गुरुवार रात उम्मीदवारों की अपनी अंतिम सूची जारी कर दी, जिसमें 37 निर्वाचन क्षेत्रों के नाम शामिल हैं. इसके साथ ही, पिछले चार दिनों से चल रही जोरदार बातचीत, बहस और हाई-वोल्टेज ड्रामे का भी अंत हो गया.

140 सदस्यों वाली केरल विधानसभा में, पार्टी 92 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि तीन निर्वाचन क्षेत्रों में उन बागी नेताओं को समर्थन देगी जिन्होंने सीपीआई-एम से अलग होकर अपना गुट बना लिया है. इस देरी से हुई घोषणा से पता चलता है कि पार्टी नेतृत्व को गुटों में संतुलन बनाने, पुराने नेताओं को जगह देने और नए चेहरों को शामिल करने के लिए कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ा.

सबसे नाटकीय पल तब आया जब वरिष्ठ नेता और कन्नूर लोकसभा सांसद के. सुधाकरन ने खुले तौर पर अपनी नाराजगी जाहिर की और यहां तक कि पार्टी छोड़ने की धमकी भी दे दी. हालांकि, यह संकट वरिष्ठ नेता ए.के. एंटनी के आखिरी समय में किए गए हस्तक्षेप से टल गया; उनकी समझाने-बुझाने की कोशिशों से माहौल शांत हुआ और लोगों का गुस्सा ठंडा पड़ा.

दिल्ली छोड़ने से पहले, एक सुलह भरे अंदाज में सुधाकरन ने पार्टी के प्रति अपनी वफादारी दोहराई. उन्होंने कहा कि “विशाल कांग्रेस पार्टी के सामने वह एक बहुत छोटे व्यक्ति हैं” और वह चुनाव प्रचार में सबसे आगे रहेंगे. अंतिम सूची में अनुभवी नेताओं और नए चेहरों का एक मिला-जुला रूप देखने को मिलता है.

एन. शक्तन, टी. सरतचंद्र प्रसाद, वरकला कहार और वी. शिवकुमार जैसे वरिष्ठ नेताओं और पूर्व विधायकों को चुनाव मैदान में उतारा गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी अनुभवी हाथों पर भरोसा कर रही है. इसके साथ ही, एबि कुरियाकोस, रॉय के. पॉलोज़ और पझाकुलम मधु जैसे पार्टी के पुराने और वफादार कार्यकर्ताओं को पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने का मौका दिया गया है.

हालांकि, दो बार के मौजूदा विधायक एल्डोस कुन्नप्पल्ली को सूची से बाहर रखे जाने से पार्टी के अंदर असंतोष पैदा हो गया है. अपनी निराशा जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें सूची से बाहर रखे जाने का कारण नहीं पता है, लेकिन उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह अपने समर्थकों से बात करके ही अपने भविष्य की रणनीति तय करेंगे.

एक और खास नाम संदीप वारियर का है, जो नवंबर 2024 में कांग्रेस में शामिल हुए थे. वह सीपीआई-एम के गढ़ माने जाने वाले त्रिकरिपुर निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने जा रहे हैं, जिससे वहां एक कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है.

एक रणनीतिक कदम के तहत, कांग्रेस ने सीपीआई-एम के तीन बागी नेताओं को समर्थन देने का भी फैसला किया है. इनमें पूर्व मंत्री जी. सुधाकरन, पी.के. शशि और टी.के. गोविंदन शामिल हैं, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी पार्टी के नेतृत्व की आलोचना की थी.

अब जब सूची जारी हो चुकी है, तो सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जिन लोगों को टिकट नहीं मिला है, क्या वे पार्टी के फैसले को मान लेंगे या फिर कोई नया विवाद खड़ा करेंगे? कांग्रेस के लिए यह एक जानी-पहचानी चुनौती है, क्योंकि वह एक बेहद अहम चुनावी लड़ाई में उतरने जा रही है.

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