बाराबंकी के युवा किसान का कमाल, 1 एकड़ जमीन से कर रहे लाखों की कमाई
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नीरज ने 2018 में लगभग एक एकड़ खेत में पॉलीहाउस स्थापित किया. इसकी कुल लागत 70 से 75 लाख रुपए आई. इसके लिए उन्हें योजना के तहत करीब 29.5 लाख रुपए का ऋण और बाद में 50% सब्सिडी का लाभ मिला.

नीरज के पॉलीहाउस में करीब 25 हजार जरबेरा के पौधे लगे हैं.
लखनऊ. उत्तर प्रदेश में सरकारी योजनाओं के सहारे किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक और लाभकारी खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं. बाराबंकी जिले के युवा किसान नीरज पटेल इसकी एक मिसाल बनकर उभरे हैं. राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत मिली सब्सिडी और तकनीकी सहयोग से उन्होंने पॉलीहाउस में जरबेरा फूलों की खेती शुरू कर न सिर्फ अपनी आय बढ़ाई, बल्कि आसपास के लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा किए हैं.
नीरज पटेल ने पढ़ाई पूरी करने के बाद खेती को ही अपना पेशा बनाने का निर्णय लिया. उनके परिवार में पहले से पारंपरिक खेती होती थी, लेकिन नीरज कुछ नया और लाभकारी करना चाहते थे. इसी दौरान उद्यान विभाग के एक कार्यक्रम में उन्हें जरबेरा फूलों की खेती और पॉलीहाउस तकनीक के बारे में जानकारी मिली.
यह जानकारी उनके जीवन का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई और उन्होंने आधुनिक तरीके से फूलों की खेती शुरू करने का फैसला किया. सरकार की राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत उन्हें वर्ष 2018 में करीब 29.5 लाख रुपए का ऋण मिला और बाद में 50 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ भी मिला. इसके सहारे उन्होंने अपने लगभग एक एकड़ खेत में पॉलीहाउस स्थापित किया, जिसकी कुल लागत करीब 70 से 75 लाख रुपए आई.
सरकारी सहायता मिलने से इस महंगी तकनीक को अपनाना उनके लिए संभव हो पाया. आज नीरज के पॉलीहाउस में करीब 25 हजार जरबेरा के पौधे लगे हैं. एक बार लगाए गए ये पौधे लगभग छह वर्षों तक उत्पादन देते हैं. पॉलीहाउस में आधुनिक ड्रिप सिंचाई प्रणाली के माध्यम से पौधों को बूंद-बूंद पानी दिया जाता है, जिससे पानी की बचत होती है और उत्पादन की गुणवत्ता भी बेहतर रहती है.
जरबेरा फूलों की बाजार में लगातार मांग बनी रहती है. शादी-विवाह, सजावट और विभिन्न आयोजनों में इन फूलों का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है, जिससे उनकी बिक्री में कोई कठिनाई नहीं होती.
नीरज बताते हैं कि सभी खर्च निकालने के बाद उन्हें सालाना करीब 8 से 10 लाख रुपए की शुद्ध आय हो जाती है. नीरज पटेल की पहल से उनके गांव के अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं और पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक व उच्च लाभ वाली खेती की ओर रुख कर रहे हैं. उनकी यह सफलता सरकारी योजनाओं के सही उपयोग और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रभावी प्रयोग का उदाहरण बनकर सामने आई है.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें