डायरेक्टर ने कॉमिक्स से चुराई स्टोरी, बेटे-भाई के साथ बनाईं दो ऐसी फिल्में, बॉक्स ऑफिस पर आया तूफान
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Raj Kapoor Directed Superhit Movies : बॉलीवुड में अपने प्रियजनों के साथ फिल्म बनाने का चलन बहुत पुराना है. बॉलीवुड के एक मशहूर डायरेक्टर-प्रोड्यूसर जब पाई-पाई के लिए मोहताज थे तो उनकी नजर अपने जवान बेटे पर पड़ी. उन्होंने टीनेज रोमांस पर फिल्म बनाने का फैसला किया. डायरेक्टर का फैसला सही साबित हुआ. पहली फिल्म से इतना पैसा कमाया कि अपना पूरा कर्ज उतार लिया. साथ ही एक और फिल्म बना ली. दोनों ही फिल्मों आज मास्टरपीस मानी जाती हैं. दोनों ही फिल्मों की गिनती बॉलीवुड की बेस्ट रोमांटिक फिल्मों में होती है. वो दोनों फिल्में कौन सी थीं, डायरेक्टर पिता-हीरो बेटा कौन था, आइये जानते हैं……..
बॉलीवुड में एक कहावत बहुत मशहूर है. यहां पर प्रोड्यूसर फिल्मों में अगर पैसा गंवाते हैं तो फिल्मों से ही पैसा कमाते हैं. बॉलीवुड के शोमैन राज कपूर ने भी इसी कहावत को चरितार्थ किया था. 1970 में जब उनका ड्रीम प्रोजेक्ट ‘मेरा नाम जोकर’ फ्लॉप हो गई तो वो बुरी तरह टूट गए. कर्ज में भी डूब गए. इधर उनके बेटे रणधीर कपूर के निर्देशन में बनी फिल्म ‘कल आज और कल’ (1971) भी बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फेल रही. ऐसे में राज कपूर साहब डिप्रेशन में आ गए. उन्होंने फिर से हिम्मत जुटाई. सीमित बजट में अपने जवान बेटे ऋषि कपूर के साथ ऐसी फिल्म बनाई जिसने उस साल कमाई के रिकॉर्ड तोड़ दिए. इस फिल्म की कमाई से उन्होंने एक और फिल्म अपने भाई के साथ भी बनाई. ये फिल्में थीं : बॉबी और सत्यम शिवम सुंदरम.
सबसे पहले 1973 में आई ब्लॉकबस्टर मूवी बॉबी की बात करते हैं. यह फिल्म 28 सितंबर 1973 को रिलीज हुई थी. बॉबी फिल्म के बनने की कहानी बेहद दिलचस्प है. जब 1970 में राज कपूर की ‘मेरा नाम जोकर’ फ्लॉप हो गई तो वो कंगाली की हालत में पहुंच गए. उन्होंने डायरेक्शन की राह चुनी. राज कपूर को ऐसी स्क्रिप्ट की तलाश थी जो उनका कर्ज उतार दे. आखिर उन्हें यह स्क्रिप्ट कॉमिक्स से मिली. कॉमिक्स में एक टीनेज गर्ल-ब्वॉय की प्रेम कहानी थी.
राज कपूर ने इसी सब्जेक्ट पर फिल्म बनाने का फैसला किया. टीनेज रोमांस पर पहले कोई फिल्म नहीं आई थी. उन्होंने अपने पुराने भरोसेमंद राइटर ख्वाजा अहमद अब्बास और वीपी साठे को याद किया. दोनों से कहानी तैयार करवाई. जैनेंद्र जैन से स्क्रीनप्ले लिखवाया. इस तरह से बॉबी फिल्म की भूमिका तैयार हुई.
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बताया जाता है कि राज कपूर यह फिल्म उस समय के सबसे बड़े स्टार राजेश खन्ना के साथ बनाना चाहते थे लेकिन उनकी फीस के पैसे देने के लिए पैसे ही नहीं थे. ऐसे में उन्होंने टीनेज हीरो के लिए अपने बेटे ऋषि कपूर के साथ फिल्म बनाने का फैसला किया. यह फैसला उन्होंने मजबूरी में लिया था. राज कपूर ने हीरोइन के लिए डिंपल कपाड़िया को फाइनल किया. उनके पिता बिजनेसमैन थे. राज कपूर से उनकी जान-पहचान थी. इतना ही नहीं, फिल्म में प्रेमनाथ अहम किरदार में थे, वो राज कपूर के साला साहब थे. प्रेम चोपड़ा भी रिश्ते में राज कपूर के साढ़ू भाई थे. यानी फिल्म की आधी से ज्यादा कास्ट राज कपूर के फैमिली मेंबर जैसे थे.
राज कपूर-प्राण साहब गहरे दोस्त थे, इसलिए ऋषि कपूर के पिता के रोल के लिए उन्हें फिल्म में लिया गया. प्राण साहब ने राज कपूर की आर्थिक तंगी को देखते हुए सिर्फ एक रुपये में यह फिल्म की थी. जब ब्लॉकबस्टर हुई तो राज कपूर ने उनके घर पर एक लाख का चेक भिजवाया था. प्राण साहब उन दिनों 3 लाख रुपये फीस लेते थे. उन्होंने गुस्से में चेक लौटा दिया था और दोनों की दोस्ती हमेशा के लिए खत्म हो गई.
बॉलीवुड के गलियारों में यह किस्सा आम है कि राज कपूर ने बॉबी फिल्म को बनाने के लिए 70 के दशक के मुंबई अंडरवर्ल्ड डॉन करीम लाला और हाजी मस्तान से भी पैसा लिया था. दोनों ही अंडरवर्ल्ड से राज कपूर की दोस्ती थी. दोस्ती के कई फोटो आज भी सोशल मीडिया पर मौजूद हैं.
बॉबी फिल्म का म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने कंपोज किया था. फिल्म का बजट सिर्फ 30 लाख का बताया जाता है. फिल्म का लुक, कास्ट्यूम, टीनेज रोमांस, प्राण-प्रेम चोपड़ा की लजवाब एक्टिंग ने दर्शकों को दीवाना बना दिया. फिल्म ने 4.90 करोड़ का कलेक्शन किया. यह एक ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई. राज कपूर ने फिल्म से इतना पैसा कमाया कि उनका पूरा कर्ज उतर गया और वो प्रॉफिट में आ गए. और एक फिल्म अपने भाई के साथ बना डाली.
राज कपूर ने बॉबी की सफलता के बाद अपने भाई शशि कपूर को लेकर एक फिल्म सत्यम शिवम सुंदरम बनाई. फिल्म की कहानी जैनेंद्र जैन ने लिखी थी. गीत नरेंद्र शर्मा, आनंद बख्शी और विट्ठलभाई पटेल ने लिखे थे. राज कपूर ने ही फिल्म को निर्देशत और प्रोड्यूस किया था. 24 मार्च 1978 को रिलीज हुई इस फिल्म में शशि कपूर और जीनत अमान लीड रोल में थे. फिल्म का शानदार म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने ही कंपोज किया था. आज इस फिल्म की गिनती कल्ट क्लासिक मूवी में होती है. राज कपूर को इस फिल्म को बनाने की प्रेरण लता मंगेशकर से मिली थी. उन्होंने कहा था कि ईश्वर स्त्री को सुरीली आवाज और सुंदर रूप एकसाथ नहीं देता. चेहरे और आवाज में फर्क को लेकर राज कपूर के बयान से लता मंगेशकर काफी दुखी हुई थीं.
राज कपूर ने यह फिल्म अपने दोस्त सिंगर मुकेश को समर्पित की थी. 1948 में एक फिल्म गोपीनाथ के एक गाने ‘आई गोरी राधिका’ से इंस्पायर्ड होकर राज ‘यशोमत मइया से बोले नंदलाला…..’ सॉन्ग बनाया गया था. लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल इस फिल्म के लिए बेस्ट फिल्मफेयर का अवॉर्ड मिला था. जीनत अमान के अंग प्रदर्शन को लेकर खूब कंट्रोवर्सी हुई थी. ऋषि कपूर ने अपने पिता से खुले तौर पर कहा था कि मैं यह मान ही नहीं सकता कि कोई इंसान अपनी औरत को पहचान ना सके. यही कमजोरी फिल्म पर भारी पड़ी. राज कपूर ने फिल्म को बहुत ही शानदार अंदाज में फिल्माया लेकिन कहानी का एक हिस्सा दर्शक नहीं पचा पाए. करीब दो करोड़ के बजट में बनी सि फिल्म ने 2.25 करोड़ की कमाई की थी. यह बॉक्स ऑफिस पर औसत रही. आज इस फिल्म की गिनती कल्ट क्लासिक फिल्मों में होती है.