Kunhamina Murder case 2016 | Kerala Police | 10 साल तक ‘मिस्टर इंडिया’ बनकर घूमते रहे आरोपी, अब AI ने खोल दिया केरल के इस मर्डर मिस्ट्री का राज

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साल 2016 में केरल के कन्नूर में हुई 60 साल की कुन्हामिना की बेरहम हत्या के आरोपी 10 साल तक पुलिस की आंखों में धूल झोंकते रहे. दिल्ली का एक परिवार, जिसमें मां और उसके दो बच्चे शामिल थे, फर्जी दस्तावेजों के सहारे देशभर में छिपता फिरा. लेकिन, एक मोबाइल सिम लेने के लिए अपनी असली आईडी इस्तेमाल करना उनकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई और अब वे सलाखों के पीछे हैं. पढ़ें केरल क्राइम ब्रांच ने कैसे आरोपी को दबोचा?

10 साल तक 'मिस्टर इंडिया' बनकर घूमते रहे आरोपी, अब AI ने खोल दिया बड़ा राजZoom

केरल के एक 10 साल पुराने मर्डर केस को एआई की मदद से सॉल्व किया गया. (Photo- AI)

कन्नूर/उज्जैन. कहते हैं कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं और अपराधी चाहे पाताल में भी क्यों न छिप जाए, एक न एक दिन उसकी छोटी सी गलती उसे सलाखों के पीछे ले ही आती है. केरल के कन्नूर में साल 2016 में हुई एक ऐसी ही खौफनाक हत्या का राज 10 साल बाद खुला है, जिसके तार मध्य प्रदेश के उज्जैन से जुड़ा मिला. कहानी शुरू होती है साल 2016 में जब कन्नूर में 60 साल की कुन्हामिना अपने घर में मृत पाई गई थीं. उन्हें एक कुर्सी से बांधा गया था और उनके शरीर पर चाकू के 19 गहरे जख्म थे. घर से 10 सोवरेन (80 ग्राम) सोना गायब था. शक की सुई वहां रहने वाले एक किराएदार परिवार पर गई, जो दिल्ली के नांगलोई का रहने वाला था. इस परिवार में एक महिला और उसके दो जवान बच्चे थे. वारदात के बाद से ही वे तीनों गायब थे.

यह परिवार बेहद शातिर था. वे कई भाषाएं बोल सकते थे, जिससे उन्हें अलग-अलग राज्यों में घुलने-मिलने में आसानी होती थी. पिछले एक दशक में वे केरल से भागकर कई राज्यों में रहे. पुलिस को चकमा देने के लिए वे हर शहर में अपनी पहचान बदल लेते और फर्जी दस्तावेजों के सहारे घर किराए पर लेते. केरल पुलिस की कई टीमें दिल्ली से लेकर उत्तर भारत तक खाक छानती रहीं, लेकिन आरोपियों का कोई सुराग नहीं मिला.

एक ‘डिजिटल गलती’ और खेल खत्म

क्रिमिनल चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, तकनीक के युग में वह कहीं न कहीं कोई निशान छोड़ ही देता है. कन्नूर क्राइम ब्रांच की टीम ने हाल ही में आधुनिक तकनीकी और AI टूल्स की मदद से पुराने केस की फाइलों को खंगालना शुरू किया. जांच के दौरान पुलिस को एक ‘डिजिटल ट्रेल’ मिला.

मोबाइल कनेक्शन के लिए दिया आईडी प्रूफ

पता चला कि फरार परिवार के एक सदस्य ने हाल ही में नया मोबाइल कनेक्शन लेने के लिए अपनी असली आईडी प्रूफ का इस्तेमाल किया था. बस, यही वो मौका था जिसका पुलिस को बरसों से इंतजार था. मोबाइल की लोकेशन ट्रैक की गई, तो पता चला कि वे मध्य प्रदेश के धार्मिक शहर उज्जैन में छिपे हुए हैं.

उज्जैन में बिछाया गया जाल

केरल क्राइम ब्रांच की टीम तुरंत उज्जैन पहुंची और वहां की स्थानीय पुलिस की मदद से छापेमारी की. पुलिस ने 55 वर्षीय परवीन बाबू और उनकी 32 वर्षीय बेटी सकीना फातिमा को गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में उन्होंने कुन्हामिना की हत्या और लूट की बात कबूल कर ली है. परिवार का तीसरा सदस्य अभी भी फरार है, जिसकी तलाश जारी है.

कन्नूर पुलिस के लिए यह गिरफ्तारी एक बड़ी जीत है. 10 साल पुराने ब्लाइंड मर्डर केस को सुलझाना यह साबित करता है कि अब डिजिटल युग में अपराधियों का बचना नामुमकिन है. आरोपियों को अब केरल लाया गया है, जहां उनसे आगे की पूछताछ की जा रही है कि उन्होंने लूटा हुआ सोना कहां ठिकाने लगाया और इन 10 सालों में उन्हें किन-किन लोगों ने पनाह दी. यह घटना अपराधियों के लिए यह एक चेतावनी है कि आप कहीं भी भाग लें, आपका ‘डिजिटल फुटप्रिंट’ आपको पकड़वा ही देगा.

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रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर

भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें

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