काफिले भिड़े, पत्थर चले, फिर धड़ाधड़ गोलियां… अनंत सिंह को जिस केस में जमानत मिली उस दुलारचंद यादव हत्याकांड में हुआ क्या था?
Last Updated:
Dularchand Yadav Murder case Anant Singh Bail : बिहार की सियासत में मोकामा का नाम एक बार फिर चर्चा में है. 2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान हुई हिंसक घटना और दुलारचंद यादव की मौत के मामले में आरोपी रहे अनंत सिंह को घटना के करीब चार महीने बाद आखिरकार पटना हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है. यह मामला सिर्फ एक आपराधिक केस नहीं, बल्कि चुनावी टकराव, जातीय समीकरण और बाहुबली राजनीति की परतों को भी सामने लाता है. फिलहाल मोकामा की सड़कों पर फिर शांति है, लेकिन पुरानी रंजिशें अभी भी जिंदा हैं. बिहार की राजनीति में बाहुबल और चुनावी हिंसा की कहानी अभी भी जारी है. लेकिन इसी बहाने आइए जानते हैं कि दुलारचंद हत्याकांड में आखिर हुआ क्या था, कैसे घटना घटी?

दुलारचंद यादव और अनंत सिंह(फाइल फोटो)
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का माहौल का था…चुनाव सरगर्मी तेज थी तो मोकामा का सियासी वातावरण गुलाबी सर्दी के मौसम में भी गर्म हो उठा था… वजह थी कि मोकामा सीट पर जेडीयू से अनंत सिंह लड़ रहे थे और सामने पूर्व सांसद और बाहुबली माने जाने वाले सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी थीं. दूसरी तरफ जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी थे, जो इस पूरे चुनाव को तिकोने मुकाबले में बदल रहे थे. इसी कड़ी में प्रियदर्शी के लिए प्रचार कर रहे थे दुलारचंद यादव. दुलारचंद 75 साल के थे और वे पहले आरजेडी से जुड़े रहे थे. खास बात यह कि वह राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के करीबी माने जाते थे. इलाके में अनंत सिंह और दुलारचंद के गुटों के बीच पुरानी दुश्मनी थी. जातीय समीकरण और पुरानी लड़ाई ने माहौल को और तल्ख कर दिया था.
30 अक्टूबर की दोपहर क्या हुआ?
बताया जाता है कि 30 अक्टूबर 2025 की दोपहर करीब तीन बजे मोकामा के तारतर गांव और बसावनचक के बीच सड़क पर दोनों गुटों के काफिले आमने-सामने हो गए. अनंत सिंह चुनाव प्रचार के लिए निकले थे. जन सुराज के समर्थक भी प्रचार में थे. अचानक विवाद शुरू हुआ… फिर तो पत्थरबाजी हुई और फिर गोलियां चलीं. दोनों तरफ से फायरिंग की खबरें आईं, अफरा-तफरी मच गई. बताया जाता है कि दुलारचंद यादव उसी भीड़ में थे और उन्हें गोली लगने की खबर फैल गई. कुछ लोगों ने कहा कि गोली से पहले मारपीट हुई थी और बाद में उनको कार से कुचल दिया गया. बाद में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कार्डियोरेस्पिरेटरी फेलियर आया, दिल और फेफड़ों में चोट से सदमा लगा था.
दुलारचंद की मौत और इल्जाम
दुलारचंद को गोली लगने के बाद अस्पताल ले जाया गया लेकिन वे नहीं बचे. उनके परिवार ने अनंत सिंह पर मुख्य आरोप लगाया. कहा कि अनंत सिंह ने खुद गोली मारी और कार से रौंदा. एफआईआर में अनंत सिंह और उनके दो भतीजे रणवीर सिंह और कर्मवीर सिंह समेत पांच नामजद थे. पुलिस ने जांच शुरू की. पटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि यह सोची-समझी साजिश थी. घटनास्थल पर अनंत सिंह मौजूद थे. पटना पुलिस ने दावा किया कि सबूत और गवाहों के बयान से अनंत सिंह मुख्य आरोपी हैं.
अनंत सिंह का पक्ष और गिरफ्तारी
अनंत सिंह ने आरोपों से इनकार किया और उन्होंने कहा कि हम वोट मांग रहे थे. अचानक मुर्दाबाद के नारे लगे फिर 30 गाड़ियां आईं और हमला हुआ. उन्होंने दावा किया कि यह सूरजभान सिंह की साजिश है. सूरजभान आरजेडी उम्मीदवार वीणा देवी के पति हैं. लेकिन पुलिस ने अनंत सिंह को 1 नवंबर 2025 की रात उनके घर से गिरफ्तार किया. पटना पुलिस ने उन्हें बेऊर जेल भेज दिया. 7 नवंबर को मतदान हुआ और 14 नवंबर को जब परिणाम आए तो अनंत सिंह जेल में रहते हुए चुनाव लड़े और जीत गए.
चुनाव के बाद की कानूनी जंग
हत्या के बाद मोकामा में तनाव बढ़ा और जातीय समुदायों में खलबली मची थी. चुनाव में अनंत सिंह जेल से ही जीते, लेकिन निचली अदालत और एमपी-एमएलए कोर्ट ने जमानत खारिज कर दी. दिसंबर 2025 में हाईकोर्ट में अपील की गई. लंबी सुनवाई के बाद 19 मार्च 2026 को पटना हाईकोर्ट ने जमानत मंजूर की. जस्टिस आर पी मिश्रा की बेंच ने कहा कि लंबे समय तक जेल में रखना उचित नहीं. वहीं, वकील नवीन कुमार ने बताया कि बेल बांड भरने पर रिहा हो जाएंगे.
About the Author
पत्रकारिता क्षेत्र में 22 वर्षों से कार्यरत. प्रिंट, इलेट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन. नेटवर्क 18, ईटीवी, मौर्य टीवी, फोकस टीवी, न्यूज वर्ल्ड इंडिया, हमार टीवी, ब्लूक्राफ्ट डिजिट…और पढ़ें