कुरकुरा भी, रसीला भी! मेहमान आए तो बनाएं बघेलखंड का रसाज, तारीफ करते नहीं थकेंगे

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Baghelkhand rasaj recipe : बघेलखंड की पारंपरिक डिश रसाज की सब्जी आज भी लोगों की पहली पसंद बनी हुई है. आसान विधि, अनोखा स्वाद और बहुउपयोगी होने के कारण यह व्यंजन मेहमाननवाजी से लेकर रोजमर्रा के खाने तक खास जगह बनाए हुए है.

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सतना : बघेलखंड क्षेत्र अपनी समृद्ध संस्कृति और पारंपरिक खानपान के लिए जाना जाता है. यहां के व्यंजनों में बनने वाला रसाज न सिर्फ स्वाद में लाजवाब है बल्कि वर्षों से लोगों की मेहमाननवाजी का अहम हिस्सा भी रहा है. घर में मेहमान आएं या रोजमर्रा के खाने में कुछ अलग स्वाद चाहिए हो रसाज की सब्जी हर मौके पर फिट बैठती है. इसकी खासियत यह है कि यह एक साधारण बेसन के बरी होते हुए भी कई तरह से इस्तेमाल की जा सकती है चाहे चटपटे स्नैक्स के रूप में हो या फिर कढ़ी और खीर के रूप में.

घर-घर में बनती थी खास डिश, मेहमानों के लिए पहली पसंद
लोकल 18 से बातचीत में उर्मिला मिश्रा बताती हैं कि पहले के समय में जब घरों में मेहमान आते थे तो रसाज की सब्जी जरूर बनाई जाती थी. इसकी वजह सिर्फ इसका स्वाद नहीं बल्कि इसका अनोखा टेक्सचर और बहुउपयोगी होना भी है. यह डिश एक बार बन जाने के बाद कई रूपों में इस्तेमाल की जा सकती है जिससे यह गृहिणियों के लिए बेहद सुविधाजनक भी बन जाती है.

रसाज बनाने की पारंपरिक विधि
रसाज की शुरुआत बेसन के एक पतले और बिना गांठ वाले घोल से होती है. इसमें पानी, नमक, हल्दी, हींग और हरी मिर्च-अदरक का पेस्ट मिलाया जाता है. इस मिश्रण को भारी तले की कड़ाही में मध्यम आंच पर लगातार चलाते हुए पकाया जाता है जब तक यह गाढ़ा और चमकदार न हो जाए.
इसके बाद इस मिक्चर को घी या तेल से चिकनी की गई थाली में फैलाकर ठंडा होने के लिए छोड़ दिया जाता है. जब यह पूरी तरह जम जाता है तो इसे चाकू से चौकोर या कतली के आकार में काट लिया जाता है. इसके बाद इन टुकड़ों को गरम तेल में सुनहरा और कुरकुरा होने तक तल लिया जाता है.

ग्रेवी में मिलता है असली बघेली स्वाद
रसाज की ग्रेवी बनाने के लिए कड़ाही में तेल गरम कर मेथी दाना, जीरा, तेजपत्ता और हींग का तड़का लगाया जाता है. इसके बाद बारीक कटा प्याज और अदरक-लहसुन का पेस्ट डालकर सुनहरा होने तक भुना जाता है. मसालों में हल्दी, धनिया पाउडर, लाल मिर्च और गरम मसाला मिलाकर थोड़ा पानी डालते हैं ताकि मसाले अच्छी तरह पक जाएं. इसमें पिसा हुआ टमाटर और थोड़ा फेंटा हुआ दही या मट्ठा मिलाने से ग्रेवी में हल्का खट्टापन आता है जो इसके स्वाद को और बढ़ा देता है. जब मसाला अच्छी तरह भुन जाता है तब इसमें जरूरत के अनुसार पानी डालकर उबाल लिया जाता है.

परोसने का सही तरीका और बढ़ता क्रेज
अंत में तले हुए रसाज के टुकड़ों को इस उबलती ग्रेवी में डालकर लगभग 5 मिनट तक धीमी आंच पर पकाया जाता है ताकि वे अंदर से नरम हो जाएं और मसालों का स्वाद अच्छे से सोख लें. हरी धनिया से सजाकर इसे गर्मागर्म रोटी या चावल के साथ परोसा जाता है.
आज के दौर में जहां लोग फास्ट फूड की ओर ज्यादा झुकाव दिखा रहे हैं वहीं रसाज जैसी पारंपरिक डिशें लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम कर रही हैं. बघेलखंड में आज भी यह डिश न केवल स्वाद के लिए बल्कि परंपरा को जीवित रखने के लिए बनाई जाती है और यही इसे खास बनाता है.

About the Author

Amit Singh

7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें

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