होर्मुज इलाके में इंडियन नेवी ने उतारे घातक वॉरशिप, इरादा साफ- हमें चोट पहुंची तो क‍िसी भी हद तक जाएंगे

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ईरान जंग की वजह से जहां दुनिया के कई बड़े देशों के व्यापारिक जहाज रास्ता भटक रहे हैं या अपने कदम पीछे खींच रहे हैं, वहीं भारतीय नौसेना ने अपना आक्रामक रुख अपनाते हुए समंदर में सीना तान दिया है. ओमान की खाड़ी और होर्मुज के खतरनाक इलाके में भारतीय नौसेना ने अपने घातक वॉरशिप उतार दिए हैं. इन जंगी जहाजों की भारी तैनाती ने यह साफ कर दिया है कि भारत अपने व्यापारिक हितों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है और इस इलाके में किसी भी दुश्मन की कोई भी चालबाजी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

होर्मुज का इलाका इस वक्त दुनिया का सबसे खतरनाक समुद्री चक्रव्यूह बना हुआ है, लेकिन भारतीय नौसेना के फौलादी इरादों के आगे यह चक्रव्यूह भी टूट गया है. युद्ध के इस विकराल माहौल के बीच भारतीय झंडे वाले जहाजों को इस इलाके से गुजरने की अनुमति मिली हुई है और वे लगातार आ भी रहे हैं. हाल ही में शिवालिक, नंदा देवी और जग लाडकी जहाज इस आग उगलते समंदर से गुजर कर सुरक्षित रूप से भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच चुके हैं. इन तीनों जहाजों की यह यात्रा कोई आम यात्रा नहीं थी, बल्कि भारतीय नौसेना के अत्याधुनिक और हथियारों से लैस जंगी जहाजों ने ढाल बनकर इन्हें एस्कॉर्ट किया. नौसेना के वॉरशिप इन व्यापारिक जहाजों के साथ साये की तरह चलते रहे और यह सुनिश्चित किया कि किसी भी मिसाइल, ड्रोन या समुद्री लुटेरे की बुरी नजर इन जहाजों पर न पड़ सके.

होर्मुज में भारत का अभेद्य सुरक्षा कवच

भारतीय नौसेना ने ओमान की खाड़ी और होर्मुज के पास एक ऐसा अभेद्य सुरक्षा कवच तैयार कर लिया है जिसे भेदना किसी के लिए भी नामुमकिन है. साल 2017 में भारतीय नौसेना ने ‘मिशन बेस्ड डिप्लॉयमेंट’ की शुरुआत की थी, जिसके तहत ओमान की खाड़ी में हमेशा एक जंगी जहाज तैनात रहता था. लेकिन वेस्ट एशिया में भड़के मौजूदा युद्ध को देखते हुए भारतीय नौसेना ने अपनी ताकत में कई गुना इजाफा कर दिया है.

सरकारी और रक्षा सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, खतरे को भांपते हुए नौसेना ने पहले अपने वॉरशिप की संख्या एक से बढ़ाकर तीन कर दी थी. लेकिन अब जैसे-जैसे तनाव चरम पर पहुंच रहा है, नौसेना ने इस अति-संवेदनशील इलाके में अपने वॉरशिप की तादाद और भी ज्यादा बढ़ा दी है. सुरक्षा कारणों और रणनीतिक गोपनीयता के चलते नौसेना ने अपनी सटीक संख्या का खुलासा नहीं किया है, लेकिन इस भारी तैनाती ने समंदर में दुश्मनों के पसीने छुड़ा दिए हैं.

22 भारतीय जहाजों की सुरक्षा पर टिकी है नजर

भारत सरकार और नौसेना का पूरा फोकस इस वक्त उन भारतीय जहाजों पर है जो इस तनावपूर्ण क्षेत्र में मौजूद हैं. आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस समय ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के पश्चिमी हिस्से में कुल 22 भारतीय वाणिज्यिक जहाज मौजूद हैं. ये जहाज भारत की ऊर्जा और व्यापारिक जरूरतों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं. इतनी बड़ी संख्या में जहाजों का युद्ध क्षेत्र के पास होना चिंता का विषय जरूर है, लेकिन भारतीय नौसेना की आक्रामक गश्त ने जहाजों के चालक दल और शिपिंग कंपनियों को एक बड़ा हौसला दिया है. इन अतिरिक्त तैनात किए गए वॉरशिप का एकमात्र और सबसे अहम मिशन यही है कि वे इन सभी 22 भारतीय फ्लैग्ड शिप्स को पूरी तरह से सुरक्षित एस्कॉर्ट करें और उन्हें युद्ध के साये से निकालकर महफूज समुद्री रास्तों तक पहुंचाएं. नौसेना के कमांडो और रडार सिस्टम चौबीसों घंटे इन जहाजों की निगरानी कर रहे हैं.

अदन की खाड़ी में नौसेना का पराक्रम

भारतीय नौसेना का यह आक्रामक रुख केवल एक इलाके तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘मिशन बेस्ड डिप्लॉयमेंट’ के तहत ओमान और अदन की खाड़ी में दो बहुत बड़े और अहम सैन्य अभियान इस वक्त पूरे जोर-शोर से चलाए जा रहे हैं. ओमान की खाड़ी में व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए ‘ऑपरेशन संकल्प’ चलाया जा रहा है, जो भारतीय नौसेना के सबसे सफल ऑपरेशंस में से एक बन चुका है.

वहीं, अदन की खाड़ी में समुद्री लुटेरों के खात्मे के लिए ‘एंटी-पायरेसी ऑपरेशन’ जारी है. हाल ही में पश्चिमी एशिया के बिगड़ते हालातों पर हुई एक उच्च स्तरीय इंटर-मिनिस्ट्रीयल प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने नौसेना की इस शक्तिशाली मौजूदगी की पुष्टि की. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारतीय नौसेना समुद्री डकैती विरोधी अभियानों के लिए पूरी मुस्तैदी के साथ इस क्षेत्र में मौजूद है और हमारी कई सामरिक पहलों में अपना भरपूर सहयोग दे रही है, जिसकी विस्तृत जानकारी रक्षा मंत्रालय के पास है.

दुनिया के छह समंदरों पर लहरा रहा है भारत का परचम
साल 2017 में लागू की गई ‘मिशन बेस्ड डिप्लॉयमेंट’ नीति ने भारतीय नौसेना को एक खामोश रक्षक से एक आक्रामक ग्लोबल फोर्स में बदल दिया है. इस नीति के तहत भारतीय नौसेना सिर्फ अपने तटों तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के छह अलग-अलग अहम समुद्री इलाकों में उसने अपना स्थायी दबदबा कायम कर लिया है. ओमान की खाड़ी और अदन की खाड़ी के अलावा, भारतीय युद्धपोत हिंद महासागर के हर चोकपॉइंट पर तैनात हैं. यह तैनाती दर्शाती है कि भारत अब किसी भी बाहरी खतरे का इंतजार नहीं करता, बल्कि खतरे के पैदा होने से पहले ही उसे समंदर की गहराइयों में ही कुचलने की पूरी ताकत और रणनीति रखता है. नौसेना की यह ग्लोबल मौजूदगी भारत को एक महाशक्ति के रूप में स्थापित कर रही है.

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