Saharanpur Nidhi Saini | Business Ideas in Hindi | सहारनपुर निधि सैनी

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Saharanpur Nidhi Saini: सहारनपुर के गांव उग्रहउ की निधि सैनी ने महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल पेश की है. पति की कम आमदनी देख निधि ने मात्र ₹5000 से क्लीनर और फिनाइल बनाने का स्वरोजगार शुरू किया. आज उनका व्यवसाय इतना सफल है कि उनके पति ने भी प्राइवेट नौकरी छोड़ दी और अब दोनों मिलकर इस ब्रांड को चला रहे हैं. ₹30 से ₹100 के किफ़ायती उत्पादों की डिमांड अब बिहार तक पहुंच गई है, जिससे यह परिवार पूरी तरह आत्मनिर्भर बन चुका है.

सहारनपुर: ‘हौसलों के तरकश में कोशिशों का वो तीर जिंदा रख, हार जाए चाहे जिंदगी में सब कुछ, मगर फिर से जीतने की उम्मीद जिंदा रख…’ सहारनपुर के गांव उग्रहउ की रहने वाली निधि सैनी ने इन पंक्तियों को सच कर दिखाया है. 8-10 हजार की प्राइवेट नौकरी में घर चलाने की जद्दोजहद देख निधि ने खुद का स्वरोजगार शुरू करने की ठानी. महज 5000 रुपए से शुरू हुआ क्लीनर बनाने का यह सफर आज इतना कामयाब हो चुका है कि निधि के पति ने भी अपनी पुरानी नौकरी छोड़ दी है और अब दोनों मिलकर अपने ब्रांड को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं.

मजबूरी नहीं, जिम्मेदारी ने बनाया उद्यमी
करीब दो साल पहले तक निधि सैनी एक साधारण गृहणी थीं. निधि के पति एक आरा मशीन में प्राइवेट नौकरी करते थे, जहां दिन-रात की हाड़तोड़ मेहनत के बाद उन्हें महीने के महज 8 से 10 हजार रुपये ही मिल पाते थे. इतनी कम आय में परिवार का गुजारा करना मुश्किल हो रहा था. निधि ने ठान लिया कि वह सिर्फ घर तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि पति के कंधों का बोझ हल्का करेंगी. बस यहीं से उनके मन में खुद का कुछ काम शुरू करने का विचार आया.

₹5000 की पूंजी और फिनाइल से शुरुआत
करीब 2 साल पहले निधि ने क्लीनर बनाने की ट्रेनिंग ली. महज 5000 रुपये की शुरुआती लागत के साथ उन्होंने सबसे पहले फिनाइल बनाना शुरू किया. बाजार की नब्ज पहचानते हुए उन्होंने धीरे-धीरे अपने प्रोडक्ट्स की रेंज बढ़ाई. आज वह फिनाइल के साथ-साथ हार्पिक, कोलिन, एसिड और झाड़ू जैसे कई घरेलू सफाई के उत्पाद तैयार कर रही हैं. निधि बताती हैं, ‘शुरुआत में मैंने फिनाइल से काम शुरू किया था, लेकिन जल्द ही समझ आ गया कि मार्केट में वैरायटी की जरूरत है. इसके बाद मैंने घर, बाथरूम और टॉयलेट साफ करने वाले विभिन्न प्रोडक्ट्स तैयार किए.’ आज निधि के पोर्टफोलियो में फिनाइल के अलावा हार्पिक, कोलिन, एसिड और झाड़ू जैसे कई उत्पाद शामिल हैं.

अब पति नहीं, पत्नी है ‘बॉस’
निधि की कामयाबी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके बिजनेस में हाथ बंटाने के लिए उनके पति ने अपनी पुरानी नौकरी को अलविदा कह दिया. अब पति-पत्नी मिलकर मार्केटिंग और प्रोडक्शन संभालते हैं. निधि का कहना है कि आज वह किसी की नौकरी नहीं कर रहे, बल्कि खुद के मालिक हैं. अब वे महीने में 10 से 15 हजार रुपये आसानी से बचा लेते हैं.

सहारनपुर से बिहार तक डिमांड
निधि के बनाए प्रोडक्ट्स की मांग अब सिर्फ गांव तक सीमित नहीं है. सहारनपुर शहर के अलावा बिहार के क्षेत्रों में भी उनका सामान सप्लाई हो रहा है. उनके उत्पाद ₹30 से लेकर ₹100 तक की किफ़ायती कीमतों पर उपलब्ध हैं. मुनाफे की बात करें तो खर्च काटकर अब वे हर महीने आसानी से 10 से 15 हजार रुपये बचा लेते हैं, जो उनकी पिछली आय से काफी बेहतर है. सबसे बड़ी बात यह है कि यह बिजनेस लगातार बढ़ रहा है और वे हर महीने एक नया प्रोडक्ट लॉन्च करने की योजना पर काम करती हैं.

अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
निधि सैनी की यह कामयाबी गांव और जिले की अन्य महिलाओं के लिए एक मिसाल बन गई है. उन्हें देखकर गांव की दूसरी महिलाएं भी स्वरोजगार की ओर आकर्षित हो रही हैं. निधि ने साबित कर दिया है कि अगर हौसला बुलंद हो और सही दिशा में प्रयास किया जाए, तो एक छोटा सा कमरा भी बड़े कारखाने की नींव बन सकता है.

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Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें

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