होर्मुज में फंसा है भारत का 3 लाख टन एलपीजी, मिल जाए तो कितनी रसोई गैस भर जाएगी, एक सिलेंडर में आती है 14.2 किलो गैस
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LPG Cylinder Calculation : यह खबर तो आपने भी पढ़ी या देखी होगी कि भारत का 3 लाख टन एलपीजी होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसा हुआ है. अब आम आदमी के मन में यह सवाल तो जरूर उठता होगा कि आखिर इस गैस से देश में कितने रसोई गैस सिलेंडर भरे जा सकते हैं, जबकि एक सिलेंडर में सिर्फ 14.2 किलोग्राम गैस आती है.

भारत का 3 लाख टन एलपीजी होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसा हुआ है.
नई दिल्ली. ईरान और इजराइल युद्ध के बीच भारत में एलपीजी का संकट लगातार गहराता जा रहा है. कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए सरकार कई कदम उठा रही है. साथ ही घरेलू उत्पादन भी बढ़ा दिया गया है, लेकिन फिर भी एलपीजी की किल्लत लगातार बढ़ती ही जा रही है. इस बीच खबर आई है कि भारत का करीब 3 लाख टन एलपीजी होर्मुज जलडमरूमध्य में फंस गया है, क्योंकि ईरान ने यह रास्ता बंद कर दिया है. सरकार और देशवासी भी इसी उम्मीद में हैं कि स्थिति और बिगड़ने से पहले अगर यह सप्लाई देश को मिल जाती है तो संकट को काफी हद तक टाला जा सकता है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि अगर 3 लाख टन एलपीजी आती है तो कितने रसोई गैस सिलेंडर भरे जा सकते हैं.
सबसे पहले आपको यह बताते हैं कि आखिर इतना एलपीजी भारत ने कहां से खरीदा था और कितने पैसे इस पर खर्च किए गए. होर्मुज में फंसे एलपीजी को भारत ने मुख्य रूप से कतर से खरीदा था. इसके अलावा यूएई ओर सऊदी अरब से भी कुछ एलपीजी को खरीदकर 6 जहाजों पर लादकर भारत रवाना किया गया था. भारत आने वाली 90 फीसदी से ज्यादा एलपीजी इसी रास्ते से आती है और ईरान ने यह रास्ता बंद कर दिया है तो संकट भी लगातार गहराता जा रहा है.
कितने रुपये की है फंसी हुई एलपीजी
ग्लोबल मार्केट में एलपीजी का भाव अभी 600 से 800 डॉलर प्रति टन चल रहा है. भारतीय रुपये में यह करीब 72 हजार रुपये के आसपास होगा. इस हिसाब से 3 लाख टन का भाव करीब 24 करोड़ डॉलर के आसपास रहेगा, जो भारतीय रुपये में करीब 2,300 करोड़ रुपये के आसपास होगा. इसके अलावा ढुलाई की लागत, बीमा व अन्य खर्चों को भी मिला दिया जाए तो यह राशि करीब 2,500 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच जाएगी. यह गैस 6 जहाजों पर लदी है, जिसमें प्रत्येक जहाज पर 45 से 46 हजार टन एलपीजी लदा हुआ है.
3 लाख टन में कितने किलो एलपीजी
अब आपको यह जानना चाहिए कि 1 टन एलपीजी में कितने किलोग्राम होता है. यह बात तो सभी को पता होगी कि 1 मीट्रिक टन बराबर 1 हजार किलोग्राम होता है. इस लिहाज से 3 लाख मीट्रिक टन में 30 करोड़ किलोग्राम एलपीजी आएगी. इसका मतलब है कि होर्मुज में भारत का करीब 30 करोड़ किलोग्राम एलपीजी फंसा हुआ है. यह देश की सालाना एलपीजी खपत का करीब 1 फीसदी है, क्योंकि हमारी कुल एलपीजी खपत एक साल में 3.3 करोड़ मीट्रिक टन के आसपास रहती है.
30 करोड़ किलो एलपीजी में कितने सिलेंडर भरेंगे
अब आपको असली सवाल का जवाब देते हैं. भारत में एक रसोई गैस सिलेंडर में 14.2 किलोग्राम गैस आती है. इस लिहाजा से 30 करोड़ किलोग्राम में करीब 2.11 करोड़ सिलेंडर भर जाएंगे. आपको देखने में यह संख्या भले ही ज्यादा लगती है, लेकिन दूसरे आंकड़ों पर नजर डालें तो यह सिलेंडर बस कुछ दिनों की जरूरत के लिए ही पर्याप्त दिखाई देता है. देश में औसतन रोजाना 80 लाख सिलेंडर की बुकिंग की जाती है. इस लिहाज से देखा जाए तो 3 लाख टन एलपीजी महज तीन से चार दिन की खपत के बराबर होगी.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें