जौनपुर के शुभम सिंह चंदेल बने युवाओं के लिए मिसाल, बिना कोचिंग UPSC में हासिल की 378वीं रैंक..यहां जानिए इनकी सफलता की कहानी
जौनपुर: अक्सर यह माना जाता है कि सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए महंगी कोचिंग और बड़े शहरों का सहारा जरूरी होता है, लेकिन जौनपुर जिले के सिकरारा क्षेत्र के कलवारी (धोबहा) शेरवां गांव निवासी शुभम सिंह चंदेल ने इस सोच को गलत साबित कर दिया है. उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में 378वीं रैंक हासिल कर यह दिखा दिया कि मजबूत इरादों और सही रणनीति के बल पर बिना कोचिंग के भी आईएएस बनने का सपना पूरा किया जा सकता है.
खुद से की पूरी तैयारी
साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले शुभम की सफलता की कहानी आज युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है. उन्होंने अपनी तैयारी पूरी तरह से खुद की पढ़ाई से की. शुभम का कहना है कि उन्होंने किसी भी कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया, बल्कि अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखते हुए घर पर ही पढ़ाई की.
सोशल मीडिया से बनाई दूरी
शुभम ने बताया कि उनकी सफलता का सबसे बड़ा मंत्र अनुशासन और निरंतरता रहा. वे रोजाना 8 से 10 घंटे पढ़ाई करते थे और अपने समय का सही उपयोग करते थे. उन्होंने सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बना ली थी, ताकि उनका ध्यान भटक न सके. उनका मानना है कि आज के समय में सोशल मीडिया सबसे बड़ा विचलन है, जिससे दूर रहकर ही लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है.
बार-बार रिवीजन को दी प्राथमिकता
उन्होंने अपनी पढ़ाई के लिए सीमित, लेकिन सही पुस्तकों का चयन किया और बार-बार रिवीजन को प्राथमिकता दी. इसके साथ ही उन्होंने पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का गहन अध्ययन किया, जिससे उन्हें परीक्षा के पैटर्न को समझने में मदद मिली. शुभम ने यह भी कहा कि आत्मविश्वास बनाए रखना और खुद पर विश्वास करना बहुत जरूरी है.
परिवार का सहयोग भी उनकी सफलता में अहम रहा. कठिन समय में परिवार ने उनका हौसला बढ़ाया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. गांव के माहौल में रहते हुए भी उन्होंने कभी अपनी परिस्थितियों को कमजोरी नहीं बनने दिया.
शुभम की उपलब्धि से पूरा जौनपुर गौरवान्वित
शुभम सिंह चंदेल की यह सफलता उन लाखों युवाओं के लिए एक संदेश है जो संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों को अधूरा मान लेते हैं. उन्होंने यह साबित कर दिया है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है. आज शुभम की उपलब्धि से पूरा जौनपुर गौरवान्वित है और उनकी कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो बिना कोचिंग के भी आईएएस बनने का सपना देख रहा है.