घर जैसा स्वाद, दिल से सेवा..बलिया में निखिल पांडेय की पहल बनी मिसाल, रोज सैकड़ों लोगों को बांटते हैं मुफ्त में भोजन

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सड़क किनारे, विक्षिप्त अवस्था में पड़े लोग, असहाय और भूखे लोगों का कष्ट देखने के बाद कोरोना जैसे महामारी के दौर में निखिल पांडेय और उनके कुछ मित्रों ने संकल्प ले लिया कि अब बलिया में कोई भूखा नहीं सोएगा. शुरुआत में 10 से 20 लोगों की छोटी टीम थी, लेकिन आज यह कारवां बढ़कर 500 लोगों तक पहुंच चुका है. हर दिन जिला अस्पताल, महिला अस्पताल और रेलवे स्टेशन जैसे अन्य जगहों पर मरीजों और उनके परिजनों सहित असहायों को ताजा और स्वादिष्ट भोजन करा रहे हैं.

बलिया: भूख से लड़ते चेहरों पर मुस्कान सजा देते हैं, कुछ लोग खामोशी से ही इंसानियत निभा देते हैं… जी हां बलिया में इंसानियत की एक ऐसी कहानी लिखी जा रही है, जो हर किसी के दिल को छू लेती है और समाज को सोचने पर मजबूर कर देती है. एक कोशिश मानवता के नाम की संस्था पिछले 5 वर्षों से बिना किसी शोर-शराबे जरूरतमंदों तक मुफ्त भोजन पहुंचाने का काम कर रही है. इस पहल के संचालक निखिल पांडेय ने कहा कि यह सफर कोरोना काल की मुश्किल घड़ी में शुरू हुआ था, जब लोग घरों में कैद और खाने तक की परेशानी झेल रहे थे.

कोई भूखा नहीं सोएगा

ऐसे में सड़क किनारे, विक्षिप्त अवस्था में पड़े लोग, असहाय और भूखे लोगों का कष्ट देखने के बाद कोरोना जैसे महामारी के दौर में निखिल पांडेय और उनके कुछ मित्रों ने संकल्प ले लिया कि अब बलिया में कोई भूखा नहीं सोएगा. शुरुआत में 10 से 20 लोगों की छोटी टीम थी, लेकिन आज यह कारवां बढ़कर 500 लोगों तक पहुंच चुका है. हर दिन जिला अस्पताल, महिला अस्पताल और रेलवे स्टेशन जैसे अन्य जगहों पर मरीजों और उनके परिजनों सहित असहायों को ताजा और स्वादिष्ट भोजन करा रहे हैं. इनकी खासियत न केवल सेवा, बल्कि अपनापन भी है. यहां हर दिन अलग-अलग मेनू तैयार किया जाता है, कभी खिचड़ी, कभी तहरी तो कभी पूरी-सब्जी, कढ़ी-चावल, छोले-चावल या राजमा-चावल लोगों को खिलाया जाता है.

खाने में घर का स्वाद 

निखिल के अनुसार, इस काम के लिए उनको कभी किसी से पैसे नहीं मांगने पड़े हैं. कुछ लोग खुद आगे आकर सहयोग करते हैं और सेवा की इस लौ को जलाए रखते हैं. इसकी प्रेरणा, निखिल को एम्स अस्पताल में इसी तरह का काम कर रहे लोगों से मिली थी, जिसे अब यह बलिया में साकार कर दिखा रहे हैं. इस सेवा का असर लोगों के दिलों में साफ झलकता है.

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Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें

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