असली तेल संकट अभी बाकी है! होर्मुज बंद होने पर कंपनियों ने तलाशा था नया रास्‍ता, अब यहां भी मंडराने लगा खतरा

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Risk on Red Sea : ईरान ने जब होर्मुज जलडमरूमध्‍य को बंद किया तो दुनिया के तमाम तेल सप्‍लायर्स ने नया रास्‍ता तलाशना शुरू कर दिया. सऊदी अरामको ने तो लाल सागर के जरिये अपनी तेल सप्‍लाई बढ़ाने की रणनीति पर काम भी शु्रू कर दिया था, लेकिन अब ईरान ने धमकी दी है कि वह लाल सागर पर भी हमले करने वाला है. अगर यह रास्‍ता भी बंद हो गया तो निश्चित रूप से दुनिया के तेल बाजारों में हाहाकार आ सकता है.

होर्मुज बंद होने पर कंपनियों ने तलाशा था नया रास्‍ता, यहां भी मंडराने लगा खतराZoom

ईरान की सेना ने लाल सागर पर भी हमले की चेतावनी दी है.

नई दिल्‍ली. ईरान और इजराइल के युद्ध ने दुनिया के 20 फीसदी तेल सप्‍लाई वाले रास्‍ते होर्मुज जलडमरूमध्‍य को बंद कर दिया है. यह रास्‍ता बंद होते ही दुनियाभर के तेल बाजारों में उथल-पुथल मच गई है. तेल उत्‍पादक देश इस रास्‍ते का विकल्‍प खोजने में लगे तो उन्‍हें लाल सागर से नया रास्‍ता दिखा. इस रास्‍ते से सप्‍लाई भी पिछले कुछ दिनों में ही दोगुनी हो गई थी, लेकिन अब यहां भी हमले का खतरा मंडराने लगा है. अगर ऐसा होता है तो दुनिया के सामने तेल संकट और गहरा जाएगा, जिसका असर भारत जैसे देशों पर और भी ज्‍यादा दिख सकता है.

सीएनएन के अनुसार, दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी सऊदी अरामको ने लाल सागर के रास्‍ते अपनी सप्‍लाई बढ़ाने की रणनीति बनाई थी. कंपनी ने पिछले सप्‍ताह कहा था कि वह लाखों बैरल तेल को पाइपलाइन के जरिये देश के पश्चिमी बंदरगाह यानबू से भेजेगी, जो लाल सागर में स्थित है. पहले कंपनी का तेल पर्शियन गल्‍फ में जहाजों पर लादा जाता है और स्‍ट्रेट से होकर ले जाया जाता था, लेकिन इस बार रास्‍ता बदलकर लाल सागर से भेजने की तैयारी है. एनर्जी एनालिटिक्‍स कंपनी केपलर का कहना है कि मार्च में ही यानबू बंदरगाह पर रोजाना की तेल लोडिंग पिछले साल के औसत से करीब दोगुनी हो चुकी है. लेकिन, संकट यह है कि अब यह विकल्‍प भी खतरे में है.

ईरान ने बनाया लाल सागर को लक्ष्‍य
लाल सागर पर खतरा क्‍यों मंडराने लगा है, इसका सीधा कनेक्‍शन ईरान की उस धमकी से है, जो उसने बीते सोमवार को दी थी. ईरान ने कहा था कि अब वह अमेरिकी नौसेना के ठिकानों को लाल सागर में निशाना बना सकता है. ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने कहा है कि रेड सी में अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर जेराल्ड आर. फोर्ड की मौजूदगी ईरान के लिए खतरा मानी जाती है. लिहाजा रेड सी में इस नौसेना समूह को समर्थन देने वाले लॉजिस्टिक और सर्विस सेंटरों को ईरान की सशस्त्र सेनाएं निशाना बना सकती हैं.

अभी तक लाल सागर नहीं था रणनीति का हिस्‍सा
कैपिटल इकोनॉमिक्स में मुख्य जलवायु और कमोडिटी अर्थशास्त्री डैविड ऑक्सली के अनुसार, मौजूदा युद्ध शुरू होने से पहले 28 फरवरी तक भी रेड सी भू-राजनीतिक स्थिरता का गढ़ नहीं था. साल 2023 के अंत में ईरान समर्थित हूती आतंकवादियों ने रेड सी में जहाजों पर हमला करना शुरू कर दिया था, जो इजराइल और हमास के बीच युद्ध का बदला था. सुरक्षा हालात के कारण शिपिंग कंपनियों को अपने जहाजों का रास्ता बदलकर अफ्रीका के दक्षिणी छोर से होकर भेजना पड़ा, जिससे यात्राएं कई हफ्ते लंबी हो गईं और उन्हें ईंधन, बीमा और नाविकों की मजदूरी पर ज्यादा खर्च करना पड़ा था.

लाल सागर पर बढ़ता जा रहा खतरा
यूके मेरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर ने भी चेतावनी दी है कि मौजूदा संघर्षों और ईरान के ताजा धमकी के बाद लाल सागर में खतरा और मंडराने लगा है. ऐसे में माना जा रहा है कि यहां हमला होने की आशंका लगातार बढ़ रही है. सऊदी अरामको के अनुसार, सऊदी अरब की पूर्व से पश्चिम पाइपलाइन पूरी क्षमता पर रोजाना 70 लाख बैरल कच्चा तेल ट्रांसपोर्ट कर सकती है, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आमतौर पर गुजरने वाले लगभग 1.5 करोड़ बैरल प्रतिदिन की कुछ हद तक भरपाई करती है. लेकिन, लाल सागर में बढ़ते खतरे से इस सप्‍लाई पर भी जोखिम बढ़ गया है. ऐसा होता है तो आने वाले समय में दुनिया के तेल बाजार में कीमतों का दबाव और बढ़ेगा, जो भारत जैसे देशों के लिए अच्‍छी बात नहीं है.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें

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