Chutney Kaise Banaye: मिक्सर में नहीं, इस तरीके से बनाएं चटनी, उंगलियां चाटते रह जाएंगे आप, जानिए तरीका
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भारतीय रसोई में सिलबट्टे की चटनी का अपना अलग ही महत्व है. आधुनिक समय में भले ही मिक्सी और ग्राइंडर का इस्तेमाल बढ़ गया हो, लेकिन सिलबट्टे पर पिसी चटनी का स्वाद आज भी लोगों के दिलों में खास जगह रखता है. यह न सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाती है, बल्कि पारंपरिक तरीके से तैयार होने के कारण सेहत के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है.
सिलबट्टा सदियों से भारतीय घरों का हिस्सा रहा है. पहले के दौर में महिलाएं सुबह-सुबह ताजा चटनी सिलबट्टे पर पीसकर परिवार को परोसती थीं. उसका स्वाद इतना लाजवाब होता था कि लोग बार-बार खाने की फरमाइश करते थे. मिक्सी से बनी चटनी की तुलना में सिलबट्टे पर पिसी चटनी में मसालों और सब्जियों का असली रस निकलता है.
व्यंजन स्पेशलिस्ट सविता श्रीवास्तव ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि आधुनिक जीवनशैली के चलते लोग अब मिक्सी का इस्तेमाल ज्यादा करने लगे हैं, लेकिन त्योहारों, पारिवारिक आयोजनों और गांवों में आज भी सिलबट्टे की चटनी का चलन कायम है. यह सिर्फ एक रेसिपी नहीं, बल्कि हमारी पुरानी संस्कृति और परंपरा की झलक है, जो आने वाली पीढ़ियों को देसी स्वाद से जोड़ती है.
भारतीय रसोई की बात हो और उसमें सिलबट्टे की चटनी का जिक्र न हो, ऐसा संभव नहीं है. चटनी चाहे धनिया की हो, टमाटर की या फिर लहसुन-मिर्च की, जब इसे सिलबट्टे पर पीसा जाता है तो उसका स्वाद बिल्कुल अलग और देसी होता है. यही कारण है कि आज भी गांवों और कस्बों में लोग मिक्सी और ग्राइंडर के बावजूद चटनी बनाने के लिए सिलबट्टे का ही इस्तेमाल करते हैं.
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सिलबट्टे पर पीसने से हरी मिर्च, धनिया, लहसुन, प्याज और टमाटर जैसी सामग्री धीरे-धीरे आपस में मिलती है. इस प्रक्रिया में इनका असली फ्लेवर बरकरार रहता है. यही वजह है कि इसका स्वाद तीखा, खट्टा और चटपटा बनता है. खासकर पराठे, खिचड़ी और दाल-चावल के साथ जब सिलबट्टे की चटनी परोसी जाती है, तो उसका मजा दोगुना हो जाता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि सिलबट्टे पर चटनी पीसने से सामग्री का पोषण बना रहता है. मिक्सी में जहां गर्मी और तेज़ी के कारण पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं, वहीं सिलबट्टे की धीमी प्रक्रिया से स्वाद और पौष्टिकता दोनों सुरक्षित रहते हैं. यही कारण है कि इसे सेहतमंद विकल्प भी माना जाता है.
सिलबट्टे की चटनी पीसने के लिए मेहनत करनी पड़ती है. ऐसे में इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि सिलबट्टे में छिनाई के निशान जरूर हों. यदि सिलबट्टा पूरी तरह से प्लेन हो गया है, तो उसकी छिनाई करवा लेनी चाहिए.
सविता श्रीवास्तव आगे बताती हैं कि जब भी आप सिलबट्टे पर चटनी पीसें, तो साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें. इसके लिए चटनी पीसने से पहले सिलबट्टे को अच्छी तरह धो लें और चटनी पीसने के बाद भी उसे साफ कर लें. इससे चटनी पर किसी तरह का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता.
कुल मिलाकर, सिलबट्टे की चटनी भारतीय रसोई की वह विरासत है, जो परंपरा, स्वाद और सेहत तीनों को साथ लेकर चलती है. अगर आप भी खाने में असली देसी स्वाद चाहते हैं, तो कभी-कभी सिलबट्टे पर चटनी जरूर पीसें. इसका जायका आपको पुराने जमाने की यादों से जोड़ देगा.