50 साल पुरानी है पेड़े की यह दुकान, पलामू में 3 पीढ़ियों से वही स्वाद बरकरार, बनाने की विधि है खास

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पलामू के महावीर मोड़ पर स्थित इस रहस्यमयी दुकान का जादू पिछले 50 वर्षों से बरकरार है. तीन पीढ़ियों से संजोई गई एक गुप्त विधि और शुद्ध दूध के साथ गुड़ का अनोखा मेल इस पेड़े को बेमिसाल बनाता है. आखिर क्या है वह पारंपरिक तरीका, जो आज भी लोगों को यहां खींच लाता है?

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पलामूः हर क्षेत्र की अपनी खूबी और व्यंजन होते है. जिसका स्वाद लेकर लोग याद रखते है. पलामू जिले में भी अलग-अलग क्षेत्र में खान-पान की अलग खासियत है. इस खबर में पलामू में मिलने वाला खास पेड़े की बात करेंगे. दरअसल, पलामू जिले के सदर प्रखंड स्थित महावीर मोड़ के पास एक ऐसी मिठाई की दुकान है. जिसकी मिठास पिछले करीब 50 वर्षों से लोगों के दिलों में घुली हुई है. यहां मिलने वाला पेड़ा अपने शुद्ध स्वाद और पारंपरिक तरीके से बनने के कारण पूरे इलाके में काफी प्रसिद्ध है. स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज से आने वाले यात्री भी यहां का पेड़ा चखना नहीं भूलते.

तीन पीढ़ी चल रही दुकान
इस दुकान को आज आनंद कुमार जायसवाल चला रहे हैं. उन्होंने बताया कि इस दुकान की शुरुआत उनके पिता ने कई दशक पहले की थी. बाद में उनके बड़े भाई ने इसे आगे बढ़ाया और वर्ष 1993 से वे स्वयं इस दुकान को संभाल रहे हैं. परिवार की तीन पीढ़ियों की मेहनत और ईमानदारी ने इस दुकान को इलाके की पहचान बना दिया है.

पारंपरिक विधि से बनता पेड़ा
आनंद कुमार जायसवाल ने बताया कि उनके यहां बनने वाले पेड़े की सबसे बड़ी खासियत इसकी शुद्धता और पारंपरिक विधि है. पेड़ा बनाने के लिए भैंस और गाय दोनों के दूध का उपयोग किया जाता है. खास बात यह है कि सारा दूध स्थानीय किसानों से ही लिया जाता है, जिससे इसकी गुणवत्ता और स्वाद दोनों बेहतर बने रहते हैं.

चीनी ही नहीं गुड़ भी मिलाया जाता 
आगे कहा कि पेड़ा बनाने की प्रक्रिया भी बेहद धैर्य और मेहनत वाली होती है. सबसे पहले ताजे दूध को बड़े कड़ाह में डालकर धीमी आंच पर लगातार पकाया जाता है. दूध को एक निश्चित तापमान पर लंबे समय तक चलाते हुए पकाया जाता है, ताकि उसका पानी पूरी तरह सूख जाए और वह गाढ़े मावा का रूप ले ले. इसके बाद इसमें चीनी और गुड़ मिलाया जाता है, जिससे पेड़े में अलग ही मिठास और खुशबू आ जाती है. फिर हाथों से आकार देकर पारंपरिक पेड़ा तैयार किया जाता है.

स्वाद ही पहचान
यही वजह है कि इस दुकान का पेड़ा स्वाद में अलग और यादगार होता है. यहां आने वाले लोग अक्सर कहते हैं कि एक बार इसका स्वाद लेने के बाद इसे भूल पाना मुश्किल है. त्योहारों के समय तो यहां ग्राहकों की लंबी कतार लग जाती है. कई लोग अपने रिश्तेदारों और परिचितों के लिए भी यहां से पेड़ा पैक कराकर ले जाते हैं.

महावीर मोड़ की यह दुकान अब केवल एक मिठाई की दुकान नहीं रही, बल्कि पलामू की पहचान बन चुकी है. शुद्ध दूध, पारंपरिक विधि और वर्षों का भरोसा इन्हीं तीन बातों ने इस पेड़े को पूरे पलामू में सबसे खास और मशहूर बना दिया है.

About the Author

Prashun Singh

मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.

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