भारत में अवैध घुसपैठ कर म्यांमार में दे रहे थे हथियारों की ट्रेनिंग, NIA के हत्थे चढ़े 7 विदेशी
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गिरफ्तारी के बाद अदालत ने सभी आरोपियों को 11 दिन की NIA हिरासत में भेज दिया है. एजेंसी आरोपियों से अवैध प्रवेश, हथियार प्रशिक्षण, ड्रोन ट्रेनिंग और ड्रोन आयात से जुड़े नेटवर्क के बारे में पूछताछ कर रही है.

सभी 7 आरोपियों को 11 दिन की NIA हिरासत में भेज दिया गया है. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने म्यांमार में कथित तौर पर आतंकवादी प्रशिक्षण देने के मामले में 7 विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपियों में 6 यूक्रेन के नागरिक और 1 अमेरिकी नागरिक भी शामिल हैं. दरअसल, एनआईए के अनुसार, ये सभी विदेशी नागरिक अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने के बाद म्यांमार में हथियार और ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दे रहे थे. जांच में सामने आया है कि प्रशिक्षण के लिए यूरोप से ड्रोन भी मंगाए गए थे.
गिरफ्तारी के बाद अदालत ने सभी आरोपियों को 11 दिन की NIA हिरासत में भेज दिया है. एजेंसी आरोपियों से अवैध प्रवेश, हथियार प्रशिक्षण, ड्रोन ट्रेनिंग और ड्रोन आयात से जुड़े नेटवर्क के बारे में पूछताछ कर रही है. एनआईए इस पूरे मामले में यह भी जांच कर रही है कि इन विदेशी नागरिकों के संबंध किन संगठनों या नेटवर्क से जुड़े हुए हैं और क्या इनके जरिए किसी बड़े आतंकी नेटवर्क को प्रशिक्षण दिया जा रहा था.
NIA की कार्रवाई और जांच से जुड़ी 4 अहम बातें:
* विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी: पकड़े गए 7 आरोपियों में से 6 यूक्रेन के नागरिक हैं, जबकि 1 आरोपी अमेरिका का नागरिक है.
* अवैध घुसपैठ और आतंकी ट्रेनिंग: ये सभी विदेशी नागरिक अवैध तरीके से भारत की सीमा में दाखिल हुए थे. इनका मुख्य काम म्यांमार के भीतर मौजूद गुटों या संगठनों को घातक हथियारों और ड्रोन (Drone) को ऑपरेट करने की एडवांस ट्रेनिंग देना था.
* यूरोप से मंगाए गए ड्रोन: जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस आतंकी ट्रेनिंग के लिए बकायदा यूरोप से ड्रोन इम्पोर्ट (आयात) किए गए थे.
* 11 दिन की रिमांड पर आरोपी: अदालत में पेशी के बाद सभी 7 आरोपियों को 11 दिन की NIA हिरासत में भेज दिया गया है.
आगे की जांच का मुख्य फोकस:
NIA अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि इन विदेशी नागरिकों के तार किन आतंकी संगठनों या अंडरकवर नेटवर्क से जुड़े हुए हैं. एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि भारत के रास्ते म्यांमार में किस ‘बड़े आतंकी नेटवर्क’ को तैयार किया जा रहा था और इस पूरे ऑपरेशन की फंडिंग कहां से हो रही थी.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें