क्‍या सच में हॉर्मुज पर ईरान ने भारत के सामने रखी शर्तें? हकीकत आप भी जान लीजिए

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कुछ देर पहले खबर आई क‍ि ईरान ने भारत के सामने एक मांग रखी है. ईरान ने भारत से अपने तीन जब्त किए गए तेल टैंकर वापस मांगे हैं. इसके बदले में भरोसा द‍िया है क‍ि वह स्‍ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से भारतीय जहाजों को सुरक्षित निकलने का रास्ता देगा. यह जानकारी सोमवार को समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में सामने आई. लेकिन भारतीय व‍िदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है क‍ि यह र‍िपोर्ट ही बकवास है. ऐसी कोई बातचीत ही ईरान के साथ नहीं हुई है.

र‍िपोर्ट के मुताबिक, भारत ने कुछ समय पहले इन तीन टैंकरों को पकड़ा था. भारत सरकार का आरोप था कि ये टैंकर अपनी असली पहचान छिपा रहे थे. ये जहाज अपनी आवाजाही की जानकारी भी बदल रहे थे. आरोप है कि ये समुद्र में गलत तरीके से एक जहाज से दूसरे जहाज में तेल और सामान ट्रांसफर कर रहे थे. इन तीन जहाजों के नाम अस्फाल्ट स्टार, अल जाफजिया और स्टेलर रूबी हैं. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, स्टेलर रूबी पर ईरान का झंडा लगा हुआ है. बाकी दो जहाजों, यानी अस्फाल्ट स्टार और अल जाफजिया पर निकारागुआ और माली देश के झंडे लगे हैं. भारत ने इन्हीं कारणों से इन्हें रोक कर रखा है.

दवाओं और मेडिकल सामान की मांग

ईरान ने सिर्फ अपने टैंकर ही वापस नहीं मांगे हैं. एक ईरानी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि ईरान ने भारत से कुछ खास दवाओं की भी मांग की है. इसके साथ ही कुछ मेडिकल उपकरणों की भी आपूर्ति मांगी गई है. इस पूरे मुद्दे पर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत चल रही है. नई दिल्ली में ईरान के राजदूत ने सोमवार को भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की है. इस बैठक में इन्हीं मांगों पर चर्चा हुई है.

भारत का रुख
व‍िदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, यह रिपोर्ट निराधार है. भारतीय और ईरानी अधिकारियों के बीच इस तरह की कोई चर्चा नहीं हुई है. वैसे भी, ये तीनों जहाज ईरान के स्वामित्व में नहीं हैं.

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने क्‍या कहा?

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस मामले पर अपनी बात रखी है. एस जयशंकर का मानना है कि ईरान के साथ सीधी बातचीत करना ही सबसे सही तरीका है. पश्चिम एशिया में इस समय तनाव चल रहा है. इस तनाव के बीच भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सुरक्षित रखना चाहता है. ब्रिटेन के अखबार फाइनेंशियल टाइम्स को द‍िए इंटरव्यू में जयशंकर ने कहा कि भारत हॉर्मुज को फिर से सुचारू करने के लिए ईरान से लगातार बात कर रहा है. हॉर्मुज दुनिया का एक बहुत अहम समुद्री रास्ता है. दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल व्यापार इसी रास्ते से होकर गुजरता है.

जयशंकर ने बताया कि ईरान के साथ इस बातचीत के कुछ नतीजे भी सामने आ रहे हैं. भारत का मानना है कि ईरान से अलग होने के बजाय उससे बात करना और तालमेल बिठाना ज्यादा असरदार साबित हो रहा है. हालांकि, जयशंकर ने यह भी साफ किया कि अभी सभी भारतीय जहाजों के लिए कोई एक तय व्यवस्था नहीं बनी है. अभी एक-एक करके जहाजों को वहां से सुरक्षित निकालने का काम किया जा रहा है.

भारत के लिए राहत की खबर
इस बातचीत के बीच भारत के लिए एक अच्छी खबर आई है. भारत का एलपीजी जहाज ‘शिवालिक’ सोमवार शाम को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पहुंच गया है. इस जहाज पर लगभग 40,000 मीट्रिक टन एलपीजी लदी हुई है. यह जहाज कल रात होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित बाहर निकल गया था.

कच्चा तेल लेकर आ रहा ‘जग लाडकी’
एक और भारतीय जहाज भी सुरक्षित रास्ते पर है. भारत के झंडे वाले इस जहाज का नाम ‘जग लाडकी’ है. यह जहाज संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से चला है. इस जहाज में लगभग 81,000 टन मुर्बन कच्चा तेल लदा हुआ है. यह जहाज भी सुरक्षित रूप से भारत की ओर बढ़ रहा है.

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