वो तीन राज्य कौन हैं, जहां महिला वोटरों की संख्या पुरुषों से ज्यादा, क्या ‘लेडी लक’ तय करेगा हार-जीत का अंतर?
नई दिल्ली. देश में एक बार से चुनावी बिगुल बजा है. चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के लिए विधानसभा चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा कर दी है. देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने रविवार 15 मार्च 2026 को विज्ञान भवन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन राज्यों में तारीखों का ऐलान किया. इस घोषणा के साथ ही इन चारों राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में तत्काल प्रभाव से आदर्श आचार संहितालागू हो गई है. खास बात यह है इन राज्यों में तीन राज्य ऐसे हैं, जहां महिला वोटरों की संख्या पुरुष वोटरों से ज्यादा हैं. यानी इन तीन राज्यों में ‘लेडी लक’ तय करेगा कि कौन पार्टी या गठबंधन हारेगा या जीतेगा.
वो तीन राज्य जहां महिलाओं का दबदबा
इस बार के चुनाव आंकड़ों में सबसे चौंकाने वाली और महत्वपूर्ण बात महिला मतदाताओं की संख्या है. चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, दक्षिण भारत के केरल और तमिलनाडु के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में महिला वोटरों की संख्या पुरुषों के मुकाबले ज्यादा है. केरल में साक्षरता और लिंगानुपात की तरह ही मतदाता सूची में भी महिलाएं पुरुषों से आगे हैं. तमिलनाडु में 2.89 करोड़ से अधिक महिला मतदाता हैं, जो पुरुष मतदाताओं की तुलना में काफी अधिक हैं. वहीं, केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में भी महिला शक्ति निर्णायक भूमिका में है. इन राज्यों में जीत की चाबी ‘महिला वोट बैंक’ के पास होगी, यही कारण है कि सभी दल महिलाओं के लिए विशेष कल्याणकारी योजनाओं का वादा कर रहे हैं.
| राज्य/UT | कुल सीटें | मतदान की तारीख | चरण |
| असम | 126 | 9 अप्रैल | 1 |
| केरल | 140 | 9 अप्रैल | 1 |
| पुडुचेरी | 30 | 9 अप्रैल | 1 |
| तमिलनाडु | 234 | 23 अप्रैल | 1 |
| पश्चिम बंगाल | 294 | 23 और 29 अप्रैल | 2 |
चुनाव कार्यक्रम: कब और कितने चरणों में?
चुनाव आयोग ने सुरक्षा और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए चरणों का निर्धारण किया है. इस बार पश्चिम बंगाल में चरणों की संख्या को घटाया गया है, जो पिछली बार आठ चरणों में हुआ था. सभी पांचों राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के चुनाव परिणाम 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे.
चुनाव आयोग के बड़े ऐलान
बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए सुविधा: 85 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों और 40% से अधिक दिव्यांगता वाले मतदाताओं को ‘घर से वोट’ (Vote from Home) देने की सुविधा मिलेगी.
महिला संचालित पोलिंग बूथ: महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए बड़ी संख्या में ऐसे मतदान केंद्र बनाए जाएंगे जिनका संचालन पूरी तरह से महिला अधिकारी और पुलिसकर्मी करेंगे.
अपराधियों पर नकेल: चुनाव आयोग ने साफ किया है कि उम्मीदवारों को अपने आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी अखबारों और टीवी चैनलों पर कम से कम तीन बार सार्वजनिक करनी होगी.
तकनीक का उपयोग: ‘cVIGIL’ ऐप के जरिए कोई भी नागरिक आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत कर सकता है, जिस पर 100 मिनट के भीतर कार्रवाई की जाएगी.
पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा के इतिहास को देखते हुए आयोग ने वहां केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 1,000 से अधिक कंपनियां तैनात करने का निर्णय लिया है. असम में बिहू त्योहार और अन्य स्थानीय उत्सवों को ध्यान में रखते हुए मतदान की तारीखें तय की गई हैं. आयोग ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर ‘फेक न्यूज’ और भड़काऊ भाषणों पर कड़ी नजर रखी जाएगी और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी.