चंदौली में जल निगम कार्यालय पर प्रदर्शन, कर्मचारियों ने वेतन कटौती और घोटाले के लगाए आरोप, आंदोलन की चेतावनी

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चंदौली: जिले में जल निगम कार्यालय पर कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आवाज उठाई. इस दौरान समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्ल्यू भी कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों से मुलाकात कर कर्मचारियों के साथ हो रहे अत्याचारों का मुद्दा उठाया.

पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्ल्यू ने लोकल 18 से कहा कि वह जल निगम के कार्यालय कई बार आ चुके हैं और लगातार कर्मचारियों की समस्याओं को उठा रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि जब देश के अन्य राज्यों, खासकर महाराष्ट्र के मुंबई में उत्तर प्रदेश के लोगों के साथ घटनाएं होती हैं, तो कई नेता बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन जब अपने ही जिले और घर के बच्चों पर अत्याचार होता है, तो उनकी मदद करने वाला कोई नहीं होता है.

घोटाले का लगाया आरोप 

उन्होंने कहा कि जल निगम से जुड़े युवाओं से मात्र 5000 रुपए में घंटों काम कराया जा रहा है, जो पूरी तरह से गलत है. इस मामले को लेकर उन्होंने जल निगम में बड़े घोटाले का भी आरोप लगाया और कहा कि इस घोटाले का पर्दाफाश करने के लिए उन्हें बार-बार कार्यालय आना पड़ रहा है.

4 दिन का मांग लिया समय 

मनोज सिंह डब्ल्यू ने बताया कि जब वह मुगलसराय स्थित जल निगम कार्यालय पहुंचे, तो उन्हें अधिकारियों ने पहले 4 घंटे का समय देने की बात कही और फिर 4 दिन का समय मांग लिया. उन्होंने कहा कि अधिकारियों की तरफ से बताया गया कि जिलाधिकारी के साथ बैठक चल रही है और उसी के बाद उन्हें लिखित रूप में जवाब दिया जाएगा.

सरकारी धन का हो रहा नुकसान

पूर्व विधायक ने कहा कि वह किसी भी जवाब को सुनने और समझने के लिए तैयार हैं, लेकिन मामले को टालने की कोशिश नहीं होनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि कई योजनाओं में बड़े स्तर पर धन का दुरुपयोग किया जा रहा है और अगर समय रहते इसकी जांच नहीं हुई, तो सरकारी धन का बड़ा नुकसान हो सकता है.

उन्होंने यह भी कहा कि चंदौली उत्तर प्रदेश के सबसे छोटे और अति पिछड़े जिलों में से एक है. यदि यहां इस तरह की अनियमितताएं हो रही हैं, तो अन्य जिलों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है. इसलिए यह लड़ाई केवल चंदौली की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लोगों के अधिकारों की लड़ाई है.

केवल 4000 रुपये मिल रहा वेतन

वहीं, प्रदर्शन में शामिल कर्मचारी प्रभाकर पांडे ने लोकल 18 से बताया कि वेतन में भारी कटौती के कारण कर्मचारियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि पहले उन्हें प्रति माह करीब 9000 रुपये वेतन मिलता था, लेकिन अब यह घटाकर केवल 4000 रुपये कर दिया गया है.

प्रभाकर पांडे ने बताया कि इसी वेतन कटौती के विरोध में कर्मचारी जल निगम कार्यालय पहुंचे हैं और अपनी मांग रख रहे हैं. कर्मचारियों की मांग है कि उनकी पुरानी वेतन व्यवस्था बहाल की जाए और मजदूरी बढ़ाकर उचित स्तर पर की जाए, ताकि उनका परिवार ठीक से चल सके.

आगे भी जारी रखेंगे यह आंदोलन 

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे आगे भी आंदोलन जारी रखेंगे. वहीं, जल निगम के अधिकारियों की ओर से कहा गया है कि कर्मचारियों की मांगों और उठाए गए आरोपों की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी.

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