Varuni Parv 2026 | Varuni Yog 2026 | वारुणी पर्व क्या है| वारुणी योग महत्व |
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Varuni Parv 2026: 17 मार्च 2026 को संवत 2082 के अंत में बन रहा है दुर्लभ ‘वारुणी योग’. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शतभिषा नक्षत्र और कुंभ राशि के चंद्रमा का यह महासंयोग करोड़ों गुना पुण्य फल देने वाला है. इस खास दिन गंगा स्नान और दान करने से जन्मों के पाप धुल जाते हैं और पितृदोष से मुक्ति मिलती है. जानें वारुणी योग का शुभ मुहूर्त, महत्व और पितरों को प्रसन्न करने के अचूक उपाय, जो बदल सकते हैं आपकी किस्मत.
Varuni Parv 2026: क्या आप जानते हैं कि ज्योतिष शास्त्र में कुछ ऐसे दुर्लभ पल आते हैं, जब आसमान में ग्रहों की चाल एक ऐसा संयोग बनाती है जो इंसान के पिछले जन्मों के पाप तक धो डालता है? जी हां, संवत 2082 का अंत एक ऐसे ही चमत्कारी ‘वारुणी योग’ के साथ होने जा रहा है. 17 मार्च को बनने वाला यह योग कोई साधारण संयोग नहीं है, बल्कि शास्त्रों के अनुसार इसमें किया गया एक छोटा सा दान भी करोड़ों गुना फल देता है. अगर आप लंबे समय से पितृदोष या मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं, तो यह दिन आपके लिए वरदान साबित हो सकता है. चलिए विस्तार से जानते हैं इस योग में क्या खास होने वाला है और क्या करने पर लाभ मिलेगा?
वारुणी योग: क्यों है यह इतना खास?
ज्योतिष गणना के अनुसार, चैत्र कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को जब खास नक्षत्र और ग्रहों का मेल होता है, तब ‘वारुणी योग’ का जन्म होता है. ज्योतिषी श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि यह योग तब बनता है जब चंद्रमा कुंभ राशि में हों और शतभिषा नक्षत्र के साथ सिद्ध साध्य योग का मिलन हो. सालों बाद बन रहा यह दुर्लभ संयोग इस बार 17 मार्च, मंगलवार को पड़ रहा है. इसे वेदों और पुराणों में इतना प्रभावशाली बताया गया है कि इसमें किए गए धार्मिक कार्यों का फल सूर्य ग्रहण के समय किए गए दान के समान मिलता है.
गंगा स्नान और दान का ‘करोड़ों गुना’ फल
ज्योतिषी श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि ऐसी मान्यता है कि वारुणी योग के दौरान अगर आप किसी पवित्र नदी (जैसे गंगा, यमुना या सरस्वती) में डुबकी लगाते हैं, तो न केवल इस जन्म के बल्कि पूर्व जन्म के अनजाने में हुए पाप भी नष्ट हो जाते हैं. अगर नदी में स्नान संभव न हो, तो घर में ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी लाभकारी होता है. इस खास घड़ी में जरूरतमंदों को अनाज, तिल, गुड़ या वस्त्र दान करने से घर में सुख-शांति आती है और आर्थिक तंगी दूर होती है.
पितृदोष से मुक्ति का सबसे आसान रास्ता
अक्सर कई लोगों की कुंडली में पितृदोष होने के कारण घर में क्लेश, संतान सुख में बाधा या तरक्की में रुकावट आती है. वारुणी योग इन समस्याओं के समाधान के लिए सबसे उत्तम माना गया है. 17 मार्च को यदि आप अपने पूर्वजों के निमित्त तर्पण, पिंडदान या पितृ गायत्री का पाठ करते हैं, तो भटकती हुई आत्माओं को मोक्ष मिलता है. ऐसा कहा जाता है कि इस योग में की गई पूजा से नाराज पितृ भी प्रसन्न होकर अपने वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देकर अपने लोक चले जाते हैं.
क्या करें इस दिन
स्नान: सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी या गंगाजल युक्त जल से स्नान करें.
पूजा: भगवान शिव और विष्णु जी की संयुक्त उपासना करें.
पितृ कार्य: पूर्वजों के नाम पर जल अर्पण (तर्पण) जरूर करें.
दान: ब्राह्मणों या गरीबों को अपनी सामर्थ्य अनुसार दान दें.
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राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें