Chanakya niti 5 signs someone looks innocent but is dangerously smart mind | दिखने में ‘गंगाधर’ पर अंदर से होते हैं ‘शक्तिमान’, ऐसे लोगों को पहचानने क

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दिखने में गंगाधर पर अंदर से होते हैं शक्तिमान, आचार्य चाणक्य ने बताए 5 संकेत

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Chanakya Niti in Hindi: ऑफिस, क्लास या अपने आसपास आप कुछ ऐसे लोगों से तो जरूर मिलें होंगे, जो दिखने में तो काफी भोले भाले और दुनिया से अनजान दिखने वाले लोग होते हैं लेकिन वे खतरनाक दिमाग वाले हैं. चाणक्य ने अपनी नीति में ऐसे ही लोगों का जिक्र किया है. चाणक्य ने कुछ संकेत के बारे में बताया है, जिनसे आप ऐसे लोगों के बारे में जान सकते हैं…

Chanakya Niti Quotes in Hindi: भारतीय इतिहास में आचार्य चाणक्य को सबसे बड़ा राजनीतिज्ञ, अर्थशास्त्री और कूटनीतिज्ञ बताया है. उन्होंने अपने व्यवहारिक ज्ञान से सफलता प्राप्त करने और सभी परेशानियों से मुक्ति के लिए कुछ नीतियां बनाई थीं. चाणक्य की ये नीतियां, पहले जितनी कारगर थीं, उतनी ही आज हैं. आचार्य चाणक्य ने इस नीति में उन लोगों के बारे में बताया है, जो दिखने में तो काफी भोले-भाले यानी बिल्कुल गंगाधर जैसे लगते हैं लेकिन ऐसे लोग अंदर से काफी खतरनाक दिमाग वाले होते हैं यानी बिल्कुल शक्तिमान की तरह. ऐसे लोग हर किसी को जिंदगी में कभी ना कभी जरूर मिलते हैं. उनकी आवाज नरम होती है, चेहरा मासूम सा लगता है और उनका सामाजिक व्यवहार एक घर के पौधे जैसा शांत होता है. आप कुछ समय के लिए अपने आगे उनको कुछ नहीं समझते लेकिन कुछ समय बाद उनका असली चेहरा देखने को मिलता है और तब तक वह आपसे आगे बढ़त बना चुके होते हैं. आप चाणक्य के इन 5 संकतों के माध्यम से जान सकते हैं कि आखिर ऐसा व्यक्ति आपके आसपास कौन है…

आचार्य चाणक्य ने कहा कि अधिकतर लोग तारीफ के भूखे होते हैं. अगर आप उन्हें बेवकूफ कह दें तो वे अपनी डिग्री, नौकरी, किसी बड़े आदमी से जान-पहचान या पुराने IQ टेस्ट की बातें करने लगते हैं. लेकिन खतरनाक रूप से होशियार लोग बस कंधे उचका देते हैं या हंस देते हैं. क्यों? क्योंकि उन्हें अपनी काबिलियत साबित करने के लिए आपकी मंजूरी की जरूरत नहीं होती. जब कोई आपको कम आंकता है तो आपके पास बढ़त आ जाती है. अगर कोई आपको बेवकूफ समझता है तो वह अपनी असली मंशा दिखा देता है या अपनी चालें खोल देता है. शतरंज के खिलाड़ी दूसरे चाल पर चेकमेट नहीं चिल्लाते. वहीं, जिसे आप बेवकूफ समझते हैं, वह चुपचाप देख रहा होता है.

आचार्य चाणक्य नीति में आगे कहते है कि ज्यादातर लोग अनुमान के मुताबिक ही व्यवहार करते हैं लेकिन दिखने में भोलभाले और शांत लोग अपने आसपास की चीजों को गौर से देखते हैं. ज्यादातर लोगों को बातचीत असल में बातचीत नहीं होती, बस अपनी बारी का इंतजार होता है. लेकिन जो लोग खामोश और खतरनाक होते हैं, वे वो बातें भी याद रखते हैं जो आपने मजाक में या अनजाने में कही थीं, जैसे आपकी कोई इनसिक्योरिटी, पसंदीदा ट्रैवल डेस्टिनेशन या आपका जोडियक साइन. क्योंकि जब कोई आपकी पसंद-नापसंद याद रखता है, तो वह आपकी सोच को अपना लेते हैं… आपसे जल्दी घुल-मिल जाते हैं… बातचीत को अपनी मर्जी से मोड़ सकते हैं और तभी आपको लगता है, वाह… ये इंसान मुझे सच में समझता है. क्योंकि वे सच में सुन रहे होते हैं. एक अच्छा ऑब्जर्वर आपकी बातचीत का तरीका, ह्यूमर, बोलने की रफ्तार, रुचियां आदि सभी चीजें जान लेते हैं.

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इंसान लोगों को श्रेणियों में बांटना पसंद करते हैं, बुद्धिमान, मूर्ख, दयालु, कठोर, इंट्रोवर्ट, एक्सट्रोवर्ट. इससे दिमाग को चीजें समझने में आसानी होती है. लेकिन सबसे खतरनाक दिमाग इन श्रेणियों को तोड़ देते हैं. जैसे कोई किताब जिसमें आधे पन्ने गायब हों. आप उन्हें समझने की कोशिश करते रहते हैं, लेकिन वे आपको पहले ही समझ चुके होते हैं. वे कभी-कभी बहुत भोली बात कह देते हैं, फिर पांच मिनट बाद ऐसी गहरी बात बोलते हैं कि सब चौंक जाएं. कभी वे बहुत दयालु दिखते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर कठोर फैसले भी ले सकते हैं. आप उन्हें समझ नहीं पाते और यही उनकी ताकत है. जब लोग आपको समझ नहीं पाते, तो वे आपको कंट्रोल नहीं कर सकते. इसलिए लोग उन्हें करीब मानने लगते हैं, जबकि असल में उनके बारे में बहुत कम जानते हैं.

आम लोग चुप्पी से घबरा जाते हैं. कोई 5 घंटे जवाब ना दे तो दिमाग में सवाल उठने लगते हैं, क्या मैंने कुछ गलत कहा? क्या वे नाराज हैं? एक और मैसेज भेजूं? कोई मीम भेजूं? जब हालात बिगड़ते हैं तो ज्यादातर लोग या तो बहस करने लगते हैं या सफाई देने लगते हैं. दोनों ही स्थिति को कमजोर बनाते हैं. ऑफिस में देखा होगा कि कुछ लोग बहुत शांत रहते हैं और अपने काम से काम रखते हैं लेकिन वो सभी के बारे में जान चुके होते हैं. लोग बोल देते हैं तो अपने अंदर की भावनाओं को बाहर निकाल देते हैं लेकिन ऐसे लोग चुप्पी को एक हथियार की तरफ प्रयोग करते हैं. अक्सर लोग खुद ही अपनी बातें से सब कुछ बता देते हैं, जो वे बताना नहीं चाहते थे.

चाणक्य इस नीति के अंत में कहते हैं कि बहुत से लोग गट फीलिंग कहते हैं, लेकिन असल में ये पैटर्न होता है, जो ऑब्जर्वेशन से आता है. खतरनाक रूप से समझदार लोग बातों पर नहीं, कामों पर ध्यान देते हैं. क्योंकि बातें करना आसान है. कोई भी कह सकता है, ‘मैं तुम्हें कभी नहीं छोड़ूंगा’ ‘मुझे तुम्हारी परवाह है’ लेकिन उनका व्यवहार कुछ और ही कहता है, झूठ बोलना, जरूरत पड़ने पर गायब हो जाना, जिम्मेदारी से बचना. लगातार व्यवहार ही असली चरित्र दिखाता है. अगर कोई छोटी बातों में झूठ बोलता है, तो बड़ी बातों में भी झूठ बोलेगा. इसी वजह से समझदार लोग किसी को कुछ ही मिनटों में समझ लेते हैं. क्योंकि पैटर्न शब्दों से ज्यादा जोर से बोलते हैं. और एक बार जब आप इन्हें देख लेते हैं, तो फिर अनदेखा नहीं कर सकते.

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