हरियाणा के विधायक शिमला तो ओडिशा के बेंगलुरु पहुंचे, राज्यसभा चुनाव से पहले नेताओं का हॉलिडे या डर कुछ ओर?
राज्यसभा चुनाव की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है भारतीय राजनीति का सबसे पुराना और विवादित अध्याय रिजॉर्ट पॉलिटिक्स एक बार फिर पूरी ताकत के साथ लौट आया है. लोकतंत्र की जंग अब विधानसभा के गलियारों से निकलकर लग्जरी बसों और आलीशान होटलों के कमरों तक सिमट गई है. ताजा मामला ओडिशा और हरियाणा का है जहां कांग्रेस ने अपने विधायकों को ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ (खरीद-फरोख्त) के डर से सुरक्षित ठिकानों पर भेज दिया है.
ओडिशा से बेंगलुरु: 14 में से 9 विधायक ‘लापता’
ओडिशा की राजनीति में शुक्रवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब विधानसभा की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस के केवल 5 विधायक ही नजर आए. बाकी 9 विधायक रातों-रात बेंगलुरु पहुंच चुके थे. कांग्रेस विधायक दल के नेता रामचंद्र कदम ने खुलेआम आरोप लगाया कि भाजपा का इतिहास विधायकों की खरीद-फरोख्त का रहा है इसलिए सावधानी बरतते हुए विधायकों को बेंगलुरु शिफ्ट किया गया है. ओडिशा पीसीसी अध्यक्ष भक्त चरण दास खुद बेंगलुरु में इन विधायकों की निगरानी कर रहे हैं.
हरियाणा की सियासत, हिमाचल की वादियों में
दूसरी तरफ हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाली वोटिंग से पहले 37 कांग्रेस विधायकों का जत्था दो लग्जरी बसों में सवार होकर हिमाचल प्रदेश के सोलन पहुंच गया. ताजा जानकारी के अनुसार ये विधायक अब सोलन से शिमला की ओर रवाना हो चुके हैं, जहां उन्हें एक गुप्त रिजॉर्ट में ठहराया जाएगा. 16 मार्च को होने वाले मतदान में भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध के बीच कड़ा मुकाबला है लेकिन निर्दलीय प्रत्याशी सतीश नांदल की एंट्री ने कांग्रेस की धड़कनें बढ़ा दी हैं.
बाड़ेबंदी की मजबूरी या भरोसे का संकट?
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि जब दलों को अपने ही चुने हुए प्रतिनिधियों पर भरोसा न रहे तो रिजॉर्ट पॉलिटिक्स जन्म लेती है. कांग्रेस का तर्क है कि भाजपा की डबल इंजन सरकार साम-दाम-दंड-भेद से विधायकों को तोड़ने की कोशिश करती है. वहीं, आलोचकों का मानना है कि यह विधायकों की नैतिकता पर भी बड़ा सवालिया निशान है.
राज्यसभा चुनावों में रिजॉर्ट पॉलिटिक्स का बढ़ता चलन भारतीय लोकतंत्र की एक दुखद तस्वीर पेश करता है. इसके पीछे तीन मुख्य कारण दिखाई देते हैं:
1. क्रॉस वोटिंग का खौफ: राज्यसभा में गुप्त मतदान की प्रक्रिया खत्म होने के बावजूद राजनीतिक दल रिस्क नहीं लेना चाहते. एक-एक वोट की कीमत हार और जीत तय करती है.
2. क्षेत्रीय समीकरण और निर्दलीय उम्मीदवार: हरियाणा जैसे राज्यों में निर्दलीय उम्मीदवारों का उतरना खेल बिगाड़ देता है, जिससे छोटे दलों के विधायकों की ‘कीमत’ अचानक बढ़ जाती है.
3. नैतिकता का अभाव: विधायकों को किसी पर्यटन स्थल या दूसरे राज्य में कैद करना यह दर्शाता है कि पार्टियों को अपने विचारधारा के प्रति वफादारी पर शक है.
लोकतंत्र में जनता अपना प्रतिनिधि इस उम्मीद में चुनती है कि वे उनके मुद्दों को सदन में उठाएंगे, लेकिन चुनाव से पहले उनकी यह ‘बाड़ेबंदी’ लोकतंत्र की गरिमा को कम करती नजर आती है.
सवाल-जवाब
ओडिशा के कांग्रेस विधायकों को बेंगलुरु क्यों भेजा गया है?
राज्यसभा चुनाव में भाजपा द्वारा संभावित खरीद-फरोख्त और विधायकों पर दबाव बनाने की आशंका के चलते कांग्रेस ने एहतियातन अपने 9 विधायकों को बेंगलुरु शिफ्ट किया है.
हरियाणा के राज्यसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला किनके बीच है?
मुख्य मुकाबला भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध के बीच है, लेकिन निर्दलीय सतीश नांदल की मौजूदगी ने चुनावी समीकरण को त्रिकोणीय और रोचक बना दिया है.
हिमाचल के सोलन और शिमला में हरियाणा के विधायकों को क्यों ठहराया जा रहा है?
कांग्रेस को अपने विधायकों में ‘क्रॉस-वोटिंग’ का डर है, इसलिए उन्हें 16 मार्च को होने वाले मतदान तक बाहरी दुनिया के संपर्क से दूर एक सुरक्षित रिजॉर्ट में रखा जा रहा है.
रामचंद्र कदम ने भाजपा पर क्या आरोप लगाए हैं?
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की संस्कृति विधायकों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) और दल-बदल कराने की रही है, जिससे बचने के लिए विधायकों को सुरक्षित ठिकानों पर भेजा गया है.