माहू रोग और फली छेदक? अरहर के किसानों के लिए जरूरी चेतावनी और समाधान, हो सकता है डबल मुनाफा

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मार्च में अरहर की फसल को माहू और फली छेदक से कैसे बचाएं, जानिए असरदार उपाय

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लखीमपुर खीरी में अरहर की खेती किसानों के लिए मुनाफे का जरिया है, लेकिन मार्च के महीने में फसल में माहू रोग और फली छेदक कीट तेजी से फैलते हैं. सही कीटनाशक और नीम के तेल का छिड़काव करके किसान अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं और उत्पादन बढ़ा सकते हैं.

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में किसान अरहर की खेती कर रहे हैं. अरहर की खेती से कम लागत में अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है और किसानों को अच्छा खासा लाभ होता है. बाजारों में लगातार बढ़ती दालों की मांग के कारण किसान अब अरहर की खेती पर और अधिक जोर दे रहे हैं, वहीं बदलते मौसम के कारण कीट का प्रकोप कभी-कभी बढ़ जाता है.

इस समय मार्च में अरहर की फसल में सबसे अधिक समस्या कीटों की देखी जा रही है. थोड़ी सी लापरवाही होने पर अरहर की खेती करने वाले किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. इस समय फसल में फूल झड़ने की समस्या मुख्य रूप से रस चूसने वाले कीटों के कारण होती है, जिसे माहू रोग भी कहा जाता है. माहू रोग लगने पर सफेद मक्खी और फली छेदक की संख्या बढ़ जाती है.

अरहर की फसल मुख्य रूप से 6 से 8 महीने में तैयार हो जाती है. फसल में माहू रोग लगने पर कीट फूल का रस चूसने लगते हैं, जिससे फली बनने में समस्या उत्पन्न होती है और किसान को लगभग 50% तक फसल का नुकसान हो सकता है. कृषि वैज्ञानिक प्रदीप बिसेन के अनुसार, इमिडाक्लोप्रिड 17.8% कीटनाशक माहू रोग के लिए विशेष रूप से प्रभावी है. 1.50 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से दवा का घोल बनाकर फसलों में छिड़काव करने से फूल को चूसने वाले कीट, छेदक और सुंडी रोग सभी नियंत्रित हो जाते हैं.

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अरहर की खेती के लिए सबसे उपयुक्त दोमट भूमि मानी जाती है. अरहर की फसल में अधिक सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, जिससे किसान कम लागत में अधिक उत्पादन कमा सकते हैं. कीटों से बचाव के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी राख का इस्तेमाल किया जाता है. फसल में राख का छिड़काव करने से कीटों का प्रकोप नियंत्रण में रहता है.

अरहर की फसल में उकठा रोग का प्रकोप दिखाई देने लगता है. शुरुआत में पत्तियां अचानक पीली होने लगती हैं, जिससे पौधे सूखकर गिरने लगते हैं. यह रोग फफूंद जनित होता है. ट्राइकोडर्मा-स्यूडोमोनास का घोल बनाकर अरहर के पौधों पर छिड़काव करने से कीटों और रोग की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है.

इस समय मार्च में अरहर की फसल में फली छेदक रोग तेजी से फैल रहा है, जिससे किसान परेशान हैं. यह कीट फूलों को नुकसान पहुंचाता है और फली में छेद कर दानों को नष्ट कर देता है, जिससे फसल का उत्पादन घट जाता है. ऐसे में अरहर की फसल पर नीम के तेल का छिड़काव करने से फली छेदक रोग से छुटकारा पाया जा सकता है.

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