रोहित-विराट की तरह खेलते तो हार जाते, वर्ल्ड कप जीतने के बाद सूर्या का विवादित बयान, कप्तान बोले, हटाया 2024 का ‘वायरस’

Share to your loved once


नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट में समय के साथ खेलने की शैली भी बदलती रही है. एक दौर था जब अनुभव, धैर्य और पारी को संभालकर आगे बढ़ाने की रणनीति टीम इंडिया की पहचान हुआ करती थी. लेकिन टी20 क्रिकेट की तेज़ रफ्तार दुनिया में अब आक्रामकता और निडरता ही सफलता की कुंजी बन चुकी है. यही वजह है कि सूर्यकुमार यादव की कप्तानी और गंभीर की कोचिंग में भारतीय टीम ने अपनी सोच और खेलने का तरीका बदल दिया. टीम ने व्यक्तिगत उपलब्धियों से ज्यादा जीत को प्राथमिकता दी और उसी नई सोच ने उन्हें टी-20 वर्ल्ड कप में चैंपियन बनने की राह दिखाई.

एक समय ऐसा था जब रोहित शर्मा और राहुल द्रविड़ के नेतृत्व में भारतीय टीम का खेल बेहद संतुलित और अनुभव पर आधारित माना जाता था. यह रणनीति 2024 तक प्रभावी रही, लेकिन दो साल बाद टी20 क्रिकेट की बदलती मांगों के सामने यह थोड़ी धीमी और पारंपरिक लगने लगी. सूर्यकुमार यादव का मानना है कि अगर भारतीय टीम ने 2024 वाले अंदाज़ को ही 2026 विश्व कप में दोहराने की कोशिश की होती, तो शायद टीम खिताब नहीं जीत पाती.

टीम संस्कृति में बड़ा बदलाव

सूर्यकुमार यादव और मुख्य कोच गौतम गंभीर ने टीम के खिलाड़ियों को खुलकर खेलने की आज़ादी देने का फैसला किया. टीम में यह साफ संदेश दिया गया कि अब कोई भी खिलाड़ी व्यक्तिगत उपलब्धियों के पीछे नहीं भागेगा. बल्लेबाजी क्रम भी तय नहीं रहेगा और जरूरत के मुताबिक कोई भी खिलाड़ी किसी भी क्रम पर उतर सकता है.सूर्यकुमार ने बातचीत में कहा, हमें पता था कि 2024 टी20 विश्व कप में जिस तरह का क्रिकेट हमने खेला था, वह आगे काम नहीं करेगा. इसलिए हमने तय किया कि अब व्यक्तिगत रिकॉर्ड पर ध्यान नहीं देंगे, हमारा लक्ष्य सिर्फ मैच जीतना होगा. आपने देखा होगा कि सेमीफाइनल तक हमारे कोई खिलाड़ी सबसे ज्यादा रन बनाने वालों या सबसे ज्यादा विकेट लेने वालों की सूची में नहीं थे. फिर भी हम लगातार जीतते रहे, क्योंकि हर मैच में हर खिलाड़ी ने योगदान दिया.” उन्होंने आगे कहा कि इस सोच को टीम में शुरू से ही मजबूत करना जरूरी था. “हमने यह टीम संस्कृति करीब 18 महीने पहले ही तैयार करनी शुरू कर दी थी और इसे टीम में वायरस की तरह फैलाया, ताकि हर खिलाड़ी उसी मानसिकता के साथ मैदान पर उतरे.”

2024 टीम का अनुभव बनाम 2026 की आक्रामकता

भारतीय टीम के बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक से भी 2024 और 2026 की टीमों के बीच अंतर के बारे में पूछा गया. उनका मानना है कि 2024 की टीम अनुभव से भरपूर थी, लेकिन उसमें आक्रामकता की कमी थी. उस टीम में विराट कोहली रोहित शर्मा और रवींद्र जडेजा जैसे अनुभवी खिलाड़ी थे, जिन्होंने टीम को स्थिरता और अनुभव दिया. कोटक के अनुसार, रोहित शर्मा शुरुआत से ही निडर होकर खेलने वाले बल्लेबाज थे, जो पहले गेंद से ही आक्रामक अंदाज अपनाते थे. लेकिन विराट कोहली की भूमिका अलग थी. वह पारी को संभालने वाले खिलाड़ी थे, जो साझेदारी बनाते हुए अंत तक टिककर खेलने में विश्वास रखते थे.

नई टीम का नया अंदाज़

2026 की भारतीय टीम में अपेक्षाकृत कम अनुभव वाले खिलाड़ी हैं, लेकिन उनमें आक्रामकता और आत्मविश्वास भरपूर है. टीम में बुमराह और हार्दिक पंड्या जैसे खिलाड़ी अनुभव का संतुलन बनाए रखते हैं, जबकि युवा खिलाड़ी अपनी अलग शैली के साथ टीम को नई ऊर्जा देते हैं.इसके अलावा अभिषेक शर्मा जैसे खिलाड़ी भी टीम में आक्रामकता का नया रंग जोड़ते हैं. हर खिलाड़ी अपनी अलग शैली लेकर आता है, जिससे टीम का खेल और भी विविध और प्रभावी बनता है.

बदली सोच, बदली पहचान

कुल मिलाकर देखा जाए तो 2024 और 2026 की भारतीय टीमों के बीच सबसे बड़ा अंतर उनके खेलने के तरीके और मानसिकता में दिखाई देता है. जहां पहले पारी को संभालकर आगे बढ़ाने की सोच थी, वहीं अब हर परिस्थिति में आक्रामक क्रिकेट खेलने का मंत्र अपनाया गया है. यही नई सोच और निडर रणनीति भारतीय टीम को आधुनिक टी20 क्रिकेट के दौर में और भी खतरनाक बनाती है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

GET YOUR LOCAL NEWS ON NEWS SPHERE 24      TO GET PUBLISH YOUR OWN NEWS   CONTACT US ON EMAIL OR WHATSAPP