टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी मंदिर ले जाने पर खुशबू सुंदर का बेबाक बयान, ‘जीत पूरे देश की, धर्म की नहीं’
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एक्ट्रेस और राजनेता खुशबू सुंदर ने टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी को मंदिर ले जाने पर छिड़ी बहस को गैर-जरूरी बताया है. उन्होंने कहा कि जीत के बाद भगवान का शुक्रिया अदा करना एक सहज और सकारात्मक भावना है. खुशबू मानती हैं कि ट्रॉफी पूरे देश की है और इसे किसी एक धर्म से जोड़कर नहीं देखना चाहिए. उन्होंने साफ कहा कि भारत जैसे देश में हर एक व्यक्ति अपनी आस्था के अनुसार मंदिर, मस्जिद या चर्च में प्रार्थना कर सकता है. संजू सैमसन और सूर्यकुमार यादव का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जीत का जश्न और ईश्वर के प्रति आभार जताना खिलाड़ियों की निजी पसंद और देश के प्रति उनके सम्मान को दर्शाता है.

एक्ट्रेस ने सूर्यकुमार यादव की तारीफ की. (फोटो साभार: IANS)
नई दिल्ली: भारत की टी20 वर्ल्ड कप की ऐतिहासिक जीत के बाद अब सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है कि क्या वर्ल्ड कप ट्रॉफी को मंदिर ले जाना सही है? इस मामले पर अपनी बेबाक राय रखते हुए मशहूर एक्ट्रेस और राजनेता खुशबू सुंदर ने कहा है कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है. खुशबू का मानना है कि खेल और जीत को धर्म के चश्मे से देखना बंद करना चाहिए. एक्ट्रेस के मुताबिक, जब पूरी दुनिया में करोड़ों भारतीय मैच देख रहे होते हैं, तो कोई अल्लाह से दुआ मांगता है, कोई भगवान के आगे हाथ जोड़ता है, तो कोई जीसस को याद करता है. खुशबू ने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि भले ही वह मुस्लिम हैं, लेकिन टीम इंडिया की जीत के लिए वह भगवान, अल्लाह और जीसस—तीनों का दिल से शुक्रिया अदा करती हैं.
खुशबू ने साफ शब्दों में कहा कि ट्रॉफी को मंदिर, मस्जिद या चर्च कहीं भी ले जाना पूरी तरह से व्यक्तिगत आस्था का मामला है. भारत जैसे देश में, जहां इतनी विविधता है, वहां हर इंसान का अपनी खुशी जताने का तरीका अलग होता है. उन्होंने तर्क दिया कि जब पूरा देश टीम की जीत के लिए प्रार्थना कर रहा था, तो जीत मिलने के बाद अपनी आस्था के हिसाब से भगवान को धन्यवाद देना बेहद सहज और सकारात्मक बात है. उन्होंने लोगों को सलाह दी कि वे इस बात पर फिजूल की बहस न करें कि ट्रॉफी कहां ले जाई जा रही है, बल्कि इस बात का जश्न मनाएं कि टीम इंडिया ने पूरी दुनिया में तिरंगा लहराया है. उनके लिए यह ट्रॉफी किसी एक समुदाय की नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की है.
भारत की कामयाबी पर गर्व
खुशबू ने अपनी बात को मजबूती से रखने के लिए खिलाड़ियों के उदाहरण भी दिए. उन्होंने क्रिकेटर संजू सैमसन का जिक्र करते हुए कहा कि जब वह मैदान पर अपनी आस्था जाहिर करते हैं, तो वह उनकी निजी चॉइस है और उसका सम्मान होना चाहिए. वहीं, उन्होंने कप्तान सूर्यकुमार यादव की भी तारीफ की, जिन्होंने जीत के बाद मैदान की मिट्टी को चूमकर अपने सिर से लगाया था. खुशबू का कहना है कि ये बातें किसी नियम की किताब में नहीं लिखी होतीं, बल्कि ये देश के प्रति खिलाड़ियों के गहरे प्रेम और सम्मान को दिखाती हैं. अंत में उन्होंने यही मैसेज दिया कि जीत की खुशी मनाने के तरीके अलग हो सकते हैं, लेकिन मकसद सबका एक ही है—भारत की कामयाबी पर गर्व करना.
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अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें