डिपोर्ट होने के बाद दोबारा भारत में कैसे घुसे ये दो बांग्लादेशी, दिल्ली में जिस्मफरोशी के धंधे का हुआ बड़ा खुलासा!

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डिपोर्ट होने के बाद दोबारा भारत में कैसे घुसे ये दो बांग्लादेशी, खुला बड़ा राज

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दिल्ली पुलिस ने जहांगीरपुरी मेट्रो स्टेशन के पास से दो बांग्लादेशी घुसपैठियों को गिरफ्तार किया है. ये दोनों पहले भी भारत से डिपोर्ट किए जा चुके थे, लेकिन फिर से अवैध रूप से घुस आए. दोनों दिल्ली में जिस्मफरोशी और मानव तस्करी का रैकेट चला रहे थे. इनके पास से प्रतिबंधित ऐप और बांग्लादेशी आईडी मिले हैं.

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दिल्ली पुलिस ने दो बांग्लादेशी नागरिक को गिरफ्तार किया है.

नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस के नॉर्थ वेस्ट जिले की फॉरेनर सेल ने दो ऐसे बांग्लादेशी नागरिक को पकड़ा है, जिसको पहले भी बांग्लादेश डिपोर्ट किया गया था. दिल्ली पुलिस ने जहांगीरपुरी मेट्रो स्टेशन के पास से दो बांग्लादेशी नागरिकों को दबोचा है, जो न केवल अवैध रूप से भारत में रह रहे थे, बल्कि एक बड़े जिस्मफरोशी और मानव तस्करी के रैकेट का संचालन भी कर रहे थे. चौंकाने वाली बात यह है कि ये दोनों पहले भी भारत से निकाले जा चुके थे, लेकिन वे फिर से अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर दिल्ली पहुंच गए.

इस बड़े ऑपरेशन की नींव 25 फरवरी 2026 को पड़ी थी, जब फॉरेनर सेल ने मानव तस्करी में शामिल तीन महिला बांग्लादेशी प्रवासियों को डिपोर्ट किया था. उन महिलाओं से जब गहन पूछताछ की गई, तो उन्होंने विकास नाम के एक शख्स का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि विकास ही वह व्यक्ति है जिसने उन्हें अवैध रूप से अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कराई और दिल्ली में उनके लिए क्लाइंट्स ढूंढने और पैसे वसूलने का काम करता था. इस दौरान यह भी पता चला कि विकास की पत्नी होने का दावा करने वाली एक महिला भी इस अवैध धंधे में उसकी बराबर की भागीदार है.

दिल्ली पुलिस का स्टिंग ऑपरेशन

डीसीपी नॉर्थ-वेस्ट आकांक्षा यादव के आदेश पर और एसीपी राजीव कुमार की देखरेख में एक विशेष टीम गठित की गई. टीम ने संदिग्धों के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर नजर रखनी शुरू की. तकनीकी सर्विलांस के जरिए पुलिस को सूचना मिली कि विकास और उसकी कथित पत्नी जहांगीरपुरी मेट्रो स्टेशन के पास आने वाले हैं. 9 मार्च 2026 की सुबह, पुलिस ने जाल बिछाया. आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ने के लिए पुलिस ने स्टिंग ऑपरेशन का सहारा लिया. सादी वर्दी में तैनात पुरुष पुलिसकर्मियों ने संदिग्धों के पास जाकर उनसे संपर्क किया और अवैध गतिविधियों के बदले पैसों का सौदा किया. जैसे ही आरोपियों ने सहमति दी, पुलिस की महिला विंग और अन्य सदस्यों ने घेराबंदी कर दोनों को धर दबोचा.

दिल्ली में क्या करते थे?

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दीप्तो कुमार पाल उर्फ विकास निवासी ढाका, बांग्लादेश और 27 साल की रूमा बेगम निवासी ढाका, बांग्लादेश की है. पूछताछ के दौरान शुरुआत में दोनों ने खुद को भारतीय नागरिक बताकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की. लेकिन जब उनके दस्तावेजों की जांच की गई और उनके डिजिटल फुटप्रिंट्स खंगाले गए, तो उनकी सच्चाई सामने आ गई. जांच में पता चला कि पिछले साल ही इन्हें उत्तराखंड से अवैध निवास के आरोप में बांग्लादेश डिपोर्ट किया गया था. लेकिन चंद महीनों के भीतर ही ये फिर से भारत में घुस आए.

पुलिस ने आरोपियों के पास से दो स्मार्ट फोन बरामद किए हैं. इन फोन में प्रतिबंधित एप्लीकेशन इंस्टॉल थी, जिसका इस्तेमाल अक्सर सीमा पार संचार के लिए किया जाता है ताकि सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचा जा सके. इसके अलावा, फोन की गैलरी से 6 बांग्लादेशी नेशनल आईडी कार्ड भी मिले हैं, जो उनकी नागरिकता का पुख्ता सबूत हैं. पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है. पकड़े गए दोनों बांग्लादेशी नागरिकों को एफआरआरओ के समक्ष पेश किया गया है. पुलिस ने उनके खिलाफ फिर से निर्वासन की प्रक्रिया शुरू कर दी है. साथ ही, जांच की जा रही है कि वे सीमा के किस हिस्से से भारत में दाखिल हुए और इस रैकेट में उनके साथ और कौन-कौन से स्थानीय लोग शामिल हैं.

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रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर

भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें

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