Sunflower Farming : 3 किलो बीज, 3 महीना…6 क्विंटल पैदावार की गारंटी, जानें सूरजमुखी की खेती का सबसे मारक तरीका
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Sunflower cultivation time : कम लागत में ज्यादा मुनाफा, कौन किसान नहीं चाहता. अब ऐसा ही होगा. आइये ऐसी ही खेती के बारे में जानते हैं कि जो हर किसान के लिए मुनाफे का तगड़ा विकल्प बन सकती है. सूरजमुखी ऐसी ही खेती है, जो यूपी के किसानों की किस्मत बदल सकती है. किसान भाई मार्च महीने में इसकी बुवाई कर सकते हैं. लोकल 18 ने इस बारे में बलिया के मृदा विज्ञान विभाग के एचओडी प्रो. अशोक कुमार सिंह से सिंह से बात की. वे बताते हैं कि 90 से 100 दिनों में सूरजमुखी की फसल तैयार हो जाती है. एक बीघे में 5 से 6 क्विंटल तक उत्पादन आराम से हो जाता है.
बलिया. कम लागत और कम मेहनत में ज्यादा मुनाफा, हर किसान यही चाहता है. अब ऐसा ही होगा. हम आपको एक ऐसी की खेती के बारे में बताने जा रहे हैं, जो हर किसान के लिए मुनाफे का विकल्प बन सकती है. बात कर रहे हैं सूरजमुखी की खेती की, जो यूपी के किसानों की किस्मत बदल सकती है. ये कम मेहनत में अच्छी कमाई देने वाली फसल मानी जाती है. मार्च महीने में इसकी बुवाई किसानों के लिए बहुत ही उपयोगी है.
हमेशा मांग
श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय बलिया के मृदा विज्ञान और कृषि रसायन विभाग के एचओडी प्रो. अशोक कुमार सिंह कहते हैं कि सूरजमुखी की खेती में लागत कम लगती है और फसल भी अपेक्षाकृत सुरक्षित भी होती है. इसके पौधे के बीज से निकलने वाला तेल बेहद शुद्ध, पौष्टिक और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है, इसलिए बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है. इसीलिए कई किसान अब सूरजमुखी की खेती को अतिरिक्त आमदनी का जरिया बना रहे हैं.
प्रो. अशोक कुमार सिंह कहते हैं कि 90 से 100 दिनों में सूरजमुखी की फसल तैयार हो जाती है. अच्छी देखभाल के साथ किसान एक बीघे में 5 से 6 क्विंटल तक उत्पादन पा सकते हैं. इतनी उपज के लिए 3 किलो बीज पर्याप्त है. इसके बीजों में करीब 50% तक तेल निकलता है, जिसकी बाजार में अच्छी कीमत मिलती है. अच्छी उपज के लिए खाद और पोषक तत्वों का सही संतुलन जरूरी है. खेत में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश के साथ गंधक का उपयोग करने से पौधों की वृद्धि बेहतर होती है और फूल भी अच्छे बनते हैं. सूरजमुखी की खेती में एक बड़ा फायदा यह है कि इसमें कीट और बीमारियों का प्रकोप बहुत कम होता है. इस फसल को बहुत ज्यादा सिंचाई की भी जरूरत नहीं पड़ती हैं. इसकी सूर्या और ज्वाला किस्म बेहद लोकप्रिय हैं.
कैसे तैयार करें खेत
प्रो. अशोक के मुताबिक, सूरजमुखी की बुवाई मार्च महीने में करना सबसे सही है. इसे बोने के लिए पहले खेत की अच्छी जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बना लें, ताकि पौधों की जड़ें अच्छी तरह विकसित हो सकें. सूरजमुखी की खेती बालुई, दोमट और काली मिट्टी में अच्छी पैदावार देती है, जो बलिया में पाई जाती हैं. बुवाई के दौरान पौधों को पर्याप्त दूरी पर लगाना जरूरी है, ताकि बढ़वार में कोई दिक्कत न हो. इसके बाद थोड़ी सी देखरेख और तगड़ा मुनाफा.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें