Chaitra Navratri Special story of 51 shakti peeth maa Kalika temple Gujarat | 51 शक्तिपीठों में से एक मां कालिक का यह मंदिर, तंत्र-मंत्र से मिलती है म

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51 शक्तिपीठों में से एक मां कालिक का यह मंदिर, तंत्र-मंत्र से मिलती है मुक्ति

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Chaitra Navratri Special: 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो रही है और इस खास मौके पर हम आपको 51 शक्तिपीठ में से एक पंचमहल जिले में बना मां कालिका का मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं. मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन करने मात्र से सभी भक्तों की इच्छाएं पूरी होती हैं और सभी चिंताओं से मुक्ति मिलती है. आइए जानते हैं गुजरात में स्थित इस शक्तिपीठ के बारे में…

51 शक्तिपीठों में से एक मां कालिक का यह मंदिर, तंत्र-मंत्र से मिलती है मुक्तिZoom

Chaitra Navratri Special: देश के हर मंदिर का इतिहास हमारे पुराणों से जुड़ा है. हर मंदिर के महत्व और इतिहास को दर्शाती पौराणिक कथाएं भी मौजूद हैं, जो उन्हें बाकी अन्य मंदिरों से अलग बनाती हैं. 51 शक्तिपीठों में शामिल गुजरात के पंचमहल जिले में बना मां कालिका का मंदिर अपने आप में विशेष है. नवरात्रि के समय इस मंदिर में 800 मीटर की ऊंचाई पर पैदल चढ़कर भक्त मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से दर्शन करने पहुंचता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. बता दें कि इस बार चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च दिन गुरुवार से हो रही है और नवरात्रि में मां कालिका मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है.

प्रमुख और प्राचीन शक्तिपीठों में से एक
गुजरात के पंचमहल जिले के पावागढ़ में मां काली का प्रसिद्ध कालिका मंदिर स्थित है, जिसकी मान्यता पूरे गुजरात में है. कलिका मंदिर भारत के प्रमुख और प्राचीन शक्तिपीठों में से एक है, जहां मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है. तंत्र से परेशान लोग भी मां कालिका के दर्शन कर तंत्र से छुटकारा पाते हैं. मान्यता है कि मां काली शारीरिक और मानसिक रोगों से छुटकारा दिलाती हैं और यही वजह है कि शारीरिक व मानसिक परेशानी से जूझ रहे लोग इस मंदिर में दर्शन के लिए ज्यादा आते हैं.

1800 सीढ़ियां चढ़ने के बाद ही मां के दर्शन
चैत्र और शारदीय नवरात्रि में मंदिर में लाखों की संख्या में भक्त पहुंचते हैं और मां भवानी से कष्टों से मुक्ति पाने की कामना करते हैं. हालांकि मंदिर तक पहुंचने का रास्ता दुर्लभ नहीं है. मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 1800 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, वहीं भक्तों की सुविधा के लिए रोपवे की भी व्यवस्था है. नवरात्रि के समय यहां विशेष पूजा, संकीर्तन और यज्ञ का भव्य आयोजन होता है, जिसमें लाखों भक्त दर्शन के लिए आते हैं.

मंदिर के बनावट में दक्षिण भारतीय शैली
मां काली का मंदिर पहाड़ी पर 800 मीटर की ऊंचाई पर बना है, जहां से पावागढ़ का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है. मंदिर के बनावट में दक्षिण भारतीय शैली की झलक देखने को मिलती है. मान्यता है कि जब भगवान शिव माता सती के शव को लेकर पीड़ा से तांडव कर रहे थे, तब सृष्टि को विनाश से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के टुकड़े कर दिए थे.

माता सती का गिरा था दाहिना पैर
माना जाता है कि इसी स्थान पर माता सती का दाहिना पैर गिरा था. कई जगहों पर वक्षस्थल गिरने की बात भी कही गई है. यही कारण है कि इस स्थान को ऊर्जा का सबसे पावरफुल प्लेस माना जाता है. मंदिर के प्रवेश के साथ ही भक्तों को अलौकिक शक्तियों का अनुभव होता है. बता दें कि इस बार चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च दिन गुरुवार से हो रही है और इसका समापन 27 मार्च दिन शुक्रवार को होगा.

About the Author

Parag Sharma

पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें



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