सरसों की देरी से बुवाई चंदौली के किसानों का निकाल रही तेल, मार्च में अचानक बढ़ी गर्मी ने बढ़ाई और चिंता
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Chandauli mustard farmers : मार्च का महीना शुरू हो गया है. कई इलाकों में तापमान 32 डिग्री छू रहा है. कुछ दिनों में यह 34 से 36 डिग्री तक पहुंच जाएगा. ऐसे में चंदौली के सरसों किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं. किसान राजा राम सोनकर लोकल 18 से बताते हैं कि इस साल सरसों की बुवाई समय पर नहीं हो सकी. लगातार बारिश, खेतों में जमा पानी और बाद में नहरों के पानी की किल्लत से खेत समय पर तैयार नहीं हो पाए, जिससे बुवाई देर से हुई. इस बार सरसों का विकास समय से पीछे चल रहा है. किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है.
चंदौली. मार्च महीने की शुरुआत के साथ ही तापमान लगातार बढ़ रहा है. कई इलाकों में तापमान 30 से 32 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जबकि कुछ दिनों में यह 34 से 36 डिग्री तक भी दर्ज किया जा सकता है. ऐसे में सरसों की फसल वाले किसानों की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं. किसानों का कहना है कि इस बार मौसम और सिंचाई की समस्या के कारण सरसों की पैदावार प्रभावित हुई है. चंदौली के किसान राजा राम सोनकर लोकल 18 से बताते हैं कि इस साल सरसों की बुवाई समय पर नहीं हो सकी. आमतौर पर सरसों की बुवाई अक्टूबर महीने तक हो जानी चाहिए, जबकि कई किसान नवंबर तक इसे पूरा कर लेते हैं, लेकिन इस बार लगातार बारिश, खेतों में जमा पानी और नहरों के पानी की वजह से खेत समय पर तैयार नहीं हो पाए, जिससे सरसों की बुवाई देर से हुई.
राजा राम बताते हैं कि यदि सरसों की बुवाई समय पर हो जाती, तो इस समय तक फसल पककर कटाई के लिए तैयार हो जाती, लेकिन अभी भी कई खेतों में सरसों की फसल हरी दिखाई दे रही है, जो सामान्य स्थिति में इस समय तक सूखकर कटाई के लिए तैयार हो जाती. इससे साफ है कि इस बार फसल का विकास समय से पीछे चल रहा है.
राजा राम सोनकर कहते हैं कि इस बार न केवल सरसों बल्कि गेहूं की फसल भी प्रभावित हुई है. खेतों में पानी भर जाने और बाद में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी न मिलने से किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है. कई किसानों को अपनी फसलों की सिंचाई के लिए खुद ही इंतजाम करना पड़ा. किसी ने इंजन लगाकर कुएं से पानी निकाला, तो किसी ने नहर से पानी खींचकर खेतों तक पहुंचाया. उन्होंने आरोप लगाया कि सिंचाई विभाग की नहरें और नालियां बनी होने के बावजूद समय पर पानी नहीं छोड़ा गया. यदि नहरों में नियमित रूप से पानी छोड़ा जाता, तो सिंचाई नहीं करनी पड़ती और फसलों की स्थिति भी बेहतर होती.
नुकसान ही नुकसान
राजा राम सोनकर ने बताया कि जो सरसों की फसल अभी खेतों में दिखाई दे रही है, वह भी किसानों की अपनी मेहनत और निजी खर्च से की गई सिंचाई का परिणाम है. जो सरसों की फसल बाद में बोई गई है, उसमें दाने बनने की संभावना बहुत कम है. ऐसे में कई किसानों के घरों में इस साल सरसों का तेल भी नहीं निकल पाएगा. पानी की कमी और अव्यवस्थित सिंचाई व्यवस्था के कारण किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें