दुनिया का सबसे बड़ा Maternity Ward! 41 हजार गर्भवतियों का लगा जमावड़ा, पैदा होंगे लाखों बच्चे
Last Updated:
अमेजॉन के जंगलों में कुछ ऐसा दिखा है, जिसने सबके होश उड़ा दिए. यहां 41 हजार गर्भवती कछुओं का जमावड़ा लगा है जो अब बच्चे देने के लिए तैयार हैं. ऐसे में इसे दुनिया का सबसे बड़ा मैटरनिटी वार्ड कहा जाने लगा है.

विलुप्त होने की कगार पर है कछुए की ये प्रजाति (इमेज- फाइल फोटो)
प्रकृति ने एक बार फिर कमाल कर दिखाया है. अमेजन के दूर-दराज इलाकों में, जहां इंसानी पहुंच मुश्किल है, वहां दुनिया का सबसे बड़ा ‘मैटरनिटी वार्ड’ खोजा गया है. ये किसी इंसान का नहीं, बल्कि कछुओं का मैटरनिटी वार्ड है.
ब्राजील और बोलिविया की सीमा पर बहने वाली गुआपोरे नदी के विशाल रेतले किनारे पर 41,000 से अधिक गर्भवती विशाल दक्षिण अमेरिकी नदी कछुओं (Giant South American River Turtle या Podocnemis expansa) का जमावड़ा लगा हुआ है. यह खोज 2025 में यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा और वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन सोसाइटी (WCS) के वैज्ञानिकों द्वारा की गई, जिसे हाल ही में 2026 में भी प्रमुखता से चर्चा में लाया गया है.
अंडे देने का इंतजार
यह प्रजाति दुनिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की कछुआ प्रजातियों में से एक है. मादा कछुए 90 सेंटीमीटर तक लंबी और 80 किलोग्राम तक भारी हो सकती है. ये बेहद सामाजिक प्राणी है और हर साल जुलाई या अगस्त में इस रेतली पट्टी पर इकट्ठा होकर अंडे देती है. पहले पारंपरिक तरीके से जमीन पर गिनती करने पर सिर्फ 16,000 कछुए दिखते थे, लेकिन ड्रोन से हवाई सर्वे और सांख्यिकीय मॉडलिंग से सटीक अनुमान 41,000 निकला है. वैज्ञानिकों ने 1,000 से ज्यादा कछुओं की पीठ पर सफेद पेंट से निशान लगाए. फिर 12 दिनों तक ड्रोन उड़ाकर उनकी गिनती की और मूवमेंट को ट्रैक किया. इस विधि से डबल काउंटिंग और छूटने वाली संख्या को सुधारा गया. अध्ययन में पाया गया कि ड्रोन इमेज में 35% कछुए कैद हुए और 20% कई बार दिखे. मॉडलिंग से सही संख्या सामने आई, जो दुनिया का सबसे बड़ा ज्ञात फ्रेशवाटर टर्टल नेस्टिंग एग्रीगेशन है.
खतरे में प्रजाति
यह अध्ययन जर्नल ऑफ एप्लाइड इकोलॉजी में प्रकाशित हुआ. ये कछुए हर साल इस जगह पर आते हैं क्योंकि रेतली पट्टी अंडे देने के लिए आदर्श है. एक मादा कई अंडे देती है और अनुमान है कि यहां से लाखों बच्चे निकलते हैं. लेकिन ज्यादातर शिकारियों जैसे पक्षी, केकड़े, मछलियां और इंसानी शिकार से बच नहीं पाते. प्रजाति आईयूसीएन रेड लिस्ट में ‘एंडेंजर्ड’ है. मुख्य खतरे हैं अवैध शिकार (मांस और अंडों के लिए), निवास स्थान का विनाश, बांध, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन से रेतले किनारों का बदलना. यह खोज संरक्षण के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है. पहले गलत गिनती से संरक्षण योजनाएं प्रभावित होती थी. अब सटीक डेटा से WCS जैसी संस्थाएं संसाधन सही जगह लगाकर प्रजाति को बचा सकती है. ड्रोन-आधारित यह विधि अन्य दूरस्थ वन्यजीवों जैसे पक्षी या स्तनधारियों की मॉनिटरिंग के लिए भी उपयोगी है.