Nari Contractor Career: भारत का वो धाकड़ ओपनर जो 26 की उम्र में बना कप्तान, एक बाउंसर ने खत्म कर दिया करियर

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भारत का वो ओपनर जो 26 की उम्र में बना कप्तान, एक बाउंसर ने खत्म कर दिया करियर

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Nari Contractor Head Injury ended his career: गुजरात के लिए घरेलू क्रिकेट खेलने वाले नारी कॉन्ट्रैक्टर ने 2 दिसंबर 1955 को न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट में डेब्यू किया था. वह सिर्फ टेस्ट मैच ही खेले. 26 साल की उम्र में उन्हें टीम इंडिया की कप्तानी भी सौंप दी गई थी. उनका करियर अच्छा चल रहा था, लेकिन एक भयंकर चोट ने उनका करियर समय से पहले ही समाप्त कर दिया.

भारत का वो ओपनर जो 26 की उम्र में बना कप्तान, एक बाउंसर ने खत्म कर दिया करियरZoom

सिर में चोट लगने के बाद कभी नहीं खेल पाए नारी कॉन्ट्रैक्टर.

नई दिल्ली. क्रिकेट बेहद रोमांचक खेल है. यह खेल हमें दौलत और शोहरत के शिखर पर पहुंचाता है, लेकिन खेल के साथ-साथ इंजरी का खतरा हमेशा बना रहता है. ऐसे कई क्रिकेटर हैं जिनका करियर इंजरी की वजह से प्रभावित हुआ या फिर समय से पहले समाप्त हो गया. भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज नारी कॉन्ट्रैक्टर का नाम इसमें प्रमुख है. नारी कॉन्ट्रैक्टर का पूरा नाम नरीमन जमशेदजी नारी कॉन्ट्रैक्टर है. उनका जन्म 7 मार्च 1934 को गोधरा में हुआ था. उस समय यग जगह बॉम्बे प्रेसिडेंसी का हिस्सा था.

26 साल की उम्र में बना कप्तान
गुजरात के लिए घरेलू क्रिकेट खेलने वाले नारी कॉन्ट्रैक्टर ने 2 दिसंबर 1955 को न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट में डेब्यू किया था. वह सिर्फ टेस्ट मैच ही खेले. 26 साल की उम्र में उन्हें टीम इंडिया की कप्तानी भी सौंप दी गई थी. उनका करियर अच्छा चल रहा था, लेकिन एक भयंकर चोट ने उनका करियर समय से पहले ही समाप्त कर दिया.

सिर में चोट लगने के बाद कभी नहीं खेल पाए नारी कॉन्ट्रैक्टर.

एक गेंद ने खत्म कर दिया करियर
1962 में भारत और वेस्टइंडीज के बीच किंगस्टन में एक टेस्ट मैच के दौरान कैरेबियाई तेज गेंदबाज चार्ली ग्रिफित की एक बाउंसर गेंद नारी कॉन्ट्रैक्टर के सिर पर लग गई. चोट घातक थी. कॉन्ट्रैक्टर 6 दिनों तक बेहोश रहे थे और काफी खून बह गया था. उस समय भारत के अलावा वेस्टइंडीज के खिलाड़ियों ने उन्हें अपना खून दिया था. बाद में डॉक्टरों ने जान बचाने के लिए उनके सिर में मेटल की प्लेट लगाई थी. कॉन्ट्रैक्टर की जान तो बच गई, लेकिन उनका करियर इस चोट की वजह से समाप्त हो गया. इस हादसे के बाद वह फिर नहीं खेल पाए.

1955 से 1962 के बीच 31 टेस्ट मैचों की 52 पारियों में 1 शतक और 11 अर्धशतक की मदद से उन्होंने 1,611 रन बनाए थे. वहीं, 138 प्रथम श्रेणी मैचों में 22 शतक की मदद से 8,611 रन बनाए थे. कॉन्ट्रैक्टर मुंबई में रहते हैं. उन्हें 2007 में सी. के. नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया था.

About the Author

Shivam Upadhyay

नवंबर 2025 से नेटवर्क 18 ग्रुप में सब एडिटर के पद पर कार्यरत. पत्रकारिता में 3 साल का अनुभव. जी न्यूज से खेल पत्रकारिता में डेब्यू किया. क्रिकेट के साथ-साथ हॉकी और बैडमिंटन के बारे में भी लिखने में दिलचस्पी. मा…और पढ़ें

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