बॉलीवुड की वो ‘शापित’ फिल्म, न डायरेक्टर को बख्शा न ही सुपरस्टार को, 23 साल बाद भी आधी-अधूरी हुई थी रिलीज

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बॉलीवुड के महान निर्देशक के. आसिफ का आज ही के दिन यानी 9 मार्च को निधन हुआ था. अपनी भव्यता के लिए मशहूर आसिफ साहब ने ‘मुगल-ए-आजम’ जैसी कालजयी फिल्म तो दी, लेकिन उनका एक सपना उनके साथ ही अधूरा रह गया. यह कहानी है फिल्म ‘लव एंड गॉड’ की, जिसे बॉलीवुड की सबसे ‘शापित’ फिल्म माना जाता है. इस फिल्म ने निर्माण के दौरान न केवल निर्देशक के. आसिफ की जान ली, बल्कि सुपरस्टार गुरु दत्त और संजीव कुमार को भी लील लिया. आखिरकार 23 साल बाद यह फिल्म आधी-अधूरी स्थिति में रिलीज हो सकी.

नई दिल्ली. बॉलीवुड में ऐसी कई फिल्में हैं जो अपनी सफलता के लिए जानी जाती हैं, लेकिन एक फिल्म ऐसी भी है जिसकी चर्चा उसकी ‘बदकिस्मती’ के लिए होती है. यह कहानी है महान निर्देशक के. आसिफ के उस अधूरे सपने की, जिसका नाम था ‘लव एंड गॉड’. इस फिल्म को हिंदी सिनेमा की सबसे ‘शापित’ फिल्म कहा जाता है, क्योंकि इसने अपने निर्माण के दौरान दो बड़े सितारों और खुद निर्देशक को हमेशा के लिए छीन लिया.

साल 1960 में ‘मुगल-ए-आजम’ जैसी कालजयी फिल्म देने के बाद के. आसिफ का कद सिनेमा में खुदा जैसा हो गया था. वे अब लैला-मजनू की अमर प्रेम कहानी को ‘लव एंड गॉड’ के नाम से पर्दे पर उतारना चाहते थे. आसिफ साहब का जुनून ऐसा था कि वे इसे ‘मुगल-ए-आजम’ से भी भव्य बनाना चाहते थे.

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो उन्होंने 1963 में इस फिल्म की शुरुआत की, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि यह फिल्म उनके और उनके कलाकारों के लिए काल बन जाएगी. के. आसिफ ने फिल्म के लिए उस दौर के सबसे प्रतिभाशाली अभिनेता और निर्देशक गुरु दत्त को ‘मजनू’ के किरदार के लिए चुना था. फिल्म की शूटिंग शुरू हुई और कुछ हिस्सा शूट भी हो गया.

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तभी 10 अक्टूबर 1964 को गुरु दत्त अपने कमरे में मृत पाए गए. उनकी अचानक और रहस्यमयी मौत ने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को हिला दिया. फिल्म का नायक जा चुका था और के. आसिफ का सपना पहली बार अधर में लटक गया. गुरु दत्त के निधन के कुछ साल बाद, के. आसिफ ने हिम्मत जुटाई और फिल्म को दोबारा शुरू किया.

इस बार उन्होंने ‘मजनू’ के रोल के लिए संजीव कुमार को साइन किया. पूरी फिल्म फिर से शूट होने लगी, लेकिन मौत का सिलसिला थमा नहीं था. 9 मार्च 1971 को, जब फिल्म की शूटिंग चल ही रही थी, खुद के. आसिफ का केवल 48 साल की उम्र में निधन हो गया. निर्देशक के बिना यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से बंद हो गया और डिब्बों में धूल फांकने लगा.

दो बड़े दिग्गजों की मौत के बाद फिल्म इंडस्ट्री में यह चर्चा आम हो गई कि ‘लव एंड गॉड’ फिल्म ‘शापित’ है. लोग कहने लगे कि जो भी इस फिल्म से जुड़ता है, उसके साथ अनहोनी हो जाती है. सिर्फ नायक और निर्देशक ही नहीं, फिल्म के विलेन प्राण का भी इस दौरान एक गंभीर एक्सीडेंट हुआ, जिससे वे बाल-बाल बचे. यहां तक कि फिल्म के दूसरे नायक संजीव कुमार का भी 1985 में निधन हो गया, और इत्तेफाक देखिए कि उनकी मौत भी फिल्म की रिलीज से ठीक पहले हुई.

के. आसिफ के निधन के 15 साल बाद, उनकी पत्नी अख्तर आसिफ ने इस फिल्म को रिलीज करने का बीड़ा उठाया. फिल्म के कई हिस्से शूट नहीं हो पाए थे, कई सीन गायब थे और तकनीकी रूप से फिल्म पुरानी हो चुकी थी. आखिरकार, 1986 में इस फिल्म को ‘आधी-अधूरी’ स्थिति में ही रिलीज किया गया. फिल्म को जोड़ने के लिए बैकग्राउंड में एक नैरेटर की आवाज का सहारा लिया गया ताकि कहानी पूरी लग सके. हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो पाई थी.

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