Kannauj Gulakand | How to Make Gulkand | कन्नौज का फेमस गुलकंद
Last Updated:
Kannauj Gulkand: कन्नौज की गलियों से उठने वाली महक सिर्फ इत्र तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहां की मिट्टी और धूप मिलकर एक ऐसा ‘मीठा अमृत’ तैयार करते हैं जिसे दुनिया गुलकंद के नाम से जानती है. बिना किसी मशीन और केमिकल के, 30 दिनों तक सूरज की रोशनी में पकने वाला यह गुलकंद गर्मियों में शरीर के लिए ‘कूलर’ का काम करता है.
कन्नौज: इत्र नगरी कन्नौज सिर्फ अपनी खुशबूदार इत्र के लिए ही नहीं, बल्कि यहां बनने वाले पारंपरिक गुलकंद के लिए भी देशभर में जाना जाता है. कन्नौज में तैयार होने वाला गुलकंद देसी गुलाब की पंखुड़ियों से बनाया जाता है, जिसकी खुशबू और स्वाद दोनों ही बेहद खास होते हैं. पारंपरिक तरीके से तैयार किया जाने वाला यह गुलकंद गर्मियों में खासतौर पर लोगों की पहली पसंद बन जाता है. स्थानीय बाजारों के साथ-साथ अब कन्नौज का गुलकंद देश के कई बड़े शहरों तक भी पहुंच रहा है. इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका पूरी तरह प्राकृतिक होना है.
देसी गुलाब और सूरज की रोशनी का कमाल
कन्नौज में गुलकंद बनाने के लिए खासतौर पर ‘देसी गुलाब’ (Damask Rose) की पंखुड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है. सुबह-सुबह ताजे गुलाब के फूल तोड़े जाते हैं और उनकी पंखुड़ियों को साफ करके चीनी के साथ मिलाया जाता है. इस मिश्रण को कांच के बड़े बर्तनों में भरकर पारंपरिक तरीके से धूप में रखा जाता है. करीब 20 से 30 दिनों तक धीमी धूप में पकने के बाद गुलाब की पंखुड़ियां और चीनी मिलकर एक गाढ़ा, स्वादिष्ट और सुगंधित गुलकंद तैयार करते हैं. इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी कृत्रिम रंग या खुशबू का प्रयोग नहीं किया जाता.
गुलकंद के सेहत के फायदे
गुलकंद को आयुर्वेद में एक बेहतरीन शीतल औषधि माना गया है. गर्मियों में इसका सेवन शरीर की आंतरिक गर्मी को शांत कर ठंडक पहुंचाने में मदद करता है. इसके अलावा यह पाचन तंत्र को मजबूत करता है और एसिडिटी व पेट की जलन जैसी समस्याओं में तुरंत राहत देता है. यह याददाश्त बढ़ाने और खून साफ करने में भी सहायक माना जाता है. लोग इसे अक्सर ठंडे दूध, पान या मिठाइयों के साथ बड़े चाव से खाते हैं. बच्चों के लिए भी यह एक हेल्दी कैंडी का काम करता है.
आजीविका का है बड़ा जरिया
व्यापारी निशीष तिवारी बताते हैं कि कन्नौज में गुलकंद का कारोबार कई परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार है. यहां के कारीगर पीढ़ियों से इस कला को जीवित रखे हुए हैं. अब कन्नौज का गुलकंद आधुनिक पैकेजिंग के साथ ऑनलाइन प्लेटफार्म्स पर भी उपलब्ध है, जिससे इसकी मांग और बढ़ गई है. स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यदि सरकार इस पारंपरिक उद्योग को ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) जैसी योजनाओं के तहत और बढ़ावा दे, तो यह वैश्विक बाजार में भी बड़ी पहचान बना सकता है. कन्नौज आने वाले पर्यटक यहां से इत्र के साथ-साथ गुलकंद ले जाना कभी नहीं भूलते.
About the Author
सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें