टीम इंडिया ब्लू रंग की जर्सी क्यों पहनती है, इसे किसने चुना, वैसे वर्ल्ड क्रिकेट में 4 टीमें हैं नीली

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बधाई कि टीम इंडिया यानि ब्लूज टी20 चैंपियन बन गए. अगर आपने 8 मार्च अहमदाबाद में भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए फाइनल मैच को देखा हो तो आपको नजर आया होगा कि किस तरह पूरा स्टेडियम नीले रंग में नहाया हुआ था. वो इसलिए क्योंकि टीम इंडिया की जर्सी का रंग ब्लू है. अक्सर इस टीम को ब्लूज या ब्लू टीम भी कह दिया जाता है. तो क्या आपको मालूम है कि टीम इंडिया नीले रंग की ही जर्सी क्यों पहनती है, इसे कैसे और किसने चुना. आपको वैसे ये बता दें कि टीम इंडिया यानि भारतीय क्रिकेट टीम को नीले रंग की जर्सी पहनते हुए 40 साल हो चुके हैं.

वैसे वर्ल्ड क्रिकेट में खेलने वाली सभी टीमें आमतौर पर अलग अलग रंगों की जर्सी पहनती हैं लेकिन दिलचस्प बात ये भी है भारत के अलावा श्रीलंका और इंग्लैंड की टीमें भी नीले रंग की यूनिफॉर्म में ही मैदान में उतरती हैं. बस उनका नीला रंग या तो कुछ हल्का है या ज्यादा गाढ़ा. जब इनमें से कोई टीमें आपस में मैच खेलती हैं तो उन्हें अपनी जर्सी का रंग बदलना पड़ता है.

एक बात ये भी जान लें कि वर्ल्ड क्रिकेट में इस खेल के तीन फारमेट हैं – टेस्ट, लिमिटेड ओवर क्रिकेट यानि 50-50 ओवर मैच और तीसरा टी20 यानि 20-20 ओवरों का मुकाबला. टेस्ट में सभी टीमें सफेद रंग की यूनिफॉर्म में होती हैं लेकिन लिमिटेड ओवर और टी20 में यूनिफॉर्म रंगीन हो जाती है. रंगीन यूनिफॉर्म का प्रयोग सबसे पहले क्रिकेट के किसी बोर्ड या खिलाड़ी ने नहीं किया था बल्कि एक टीवी चैनल कारोबारी ने किया था. जिसका नाम था कैरी पैकर.

ट्रॉफी के साथ सभी खिलाड़ी पोज देते नजर आए. आईसीसी चेयरमैन जय शाह ने सूर्यकुमार यादव को ट्रॉफी थमाई, जिसके बाद भारतीय कप्तान को साथी खिलाड़ियों ने ज्वाइन किया. फैंस टीम से ट्रॉफी के साथ कुछ अनोखा सेलिब्रेशन देखना चाह रहे थे, लेकिन ऐसा है हुआ.

किसने टीम इंडिया के लिए चुना नीला रंग

तो अब सवाल उठता है कि भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी के लिए नीले रंग का चुनाव किसने किया. तो इसका जवाब ये है कि ये काम किसी एक व्यक्ति का नहीं है बल्कि इसकी एक प्रक्रिया और नियम होते हैं, जिसके जरिए ऐसा किया गया. ये काम इंटरनेशऩल क्रिकेट काउंसिल के नियमों के तहत ही हुआ. भारतीय टीम का नीला रंग मुख्य तौर पर भारतीय तिरंगे के अशोक चक्र से प्रेरित है, जो भारतीय तिरंगे में नीले रंग का ही है.

कहां से लिया गया ये ब्लू कलर

तिरंगे के बीच में स्थित नीले रंग के अशोक चक्र को एक तटस्थ और एकता के प्रतीक के रूप में चुना गया. भारतीय टीम ने पहली बार नीली जर्सी 1985 के ‘बेंसन एंड हेजेस वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ क्रिकेट’ के दौरान पहनी थी. तब टीम की जर्सी का रंग हल्का नीला था. उस पर पीली पट्टियां थीं. इस पोशाक को ऑस्ट्रेलिया के आयोजकों ने डिजाइन किया था.

पहली बार वर्ल्ड कप में कब आई कलरफुल जर्सी

पहली बार विश्व कप में रंगीन जर्सी का चलन 1992 में शुरू हुआ. उस समय टीम इंडिया ने गहरे नीले रंग की जर्सी पहनी. इसके बाद से ही भारतीय खिलाड़ियों को ‘मेन इन ब्लू’ कहा जाने लगा. वैसे नीला रंग आकाश और समुद्र की विशालता को दर्शाता है, जो खेल में टीम की अनंत संभावनाओं और गहराई को रिप्रेजेंट करता है. तब से आज तक टीम इंडिया की जर्सी का रंग नीला ही है. हां बस इसमें हल्का फुल्का बदलाव जरूर होता रहा है. अब आगे हम इसके नियमों के बारे में बताएंगे.

क्या हैं रंगों की जर्सी को लेकर नियम 

क्रिकेट में जर्सी के रंगों को लेकर नियम थोड़े लचीले और थोड़े सख्त दोनों हैं. देश अपनी जर्सी का प्राथमिक रंग खुद चुनते हैं, लेकिन इसे लेकर आईसीसी के कुछ कड़े नियम भी हैं जिनका पालन करना जरूरी होता है.
– हर क्रिकेट बोर्ड अपनी टीम की पहचान और सांस्कृतिक प्रतीकों के आधार पर जर्सी का रंग चुनता है. भारत ने ये काम अशोक चक्र से प्रेरित होकर किया.
– ऑस्ट्रेलिया ने अपने राष्ट्रीय रंगों के आधार पर पीला और हरा चुना.
– न्यूजीलैंड ने अपने ‘सिल्वर फर्न’ प्रतीक के कारण काला रंग चुना.
– पाकिस्तान ने भी अपने हरे रंग के नेशनल फ्लैग और मुस्लिम धर्म में हरे रंग के महत्व के कारण हरे रंग की जर्सी चुनी.

इसमें आईसीसी के नियम क्या हैं

– जब आईसीसी के टूर्नामेंट जैसे वर्ल्ड कप या चैंपियंस ट्रॉफी होते हैं, तो आईसीसी जर्सी के रंग को लेकर कुछ तकनीकी नियमों को लागू करता है. आईसीसी ने 2019 वर्ल्ड कप में एक नियम लागू किया था कि यदि दो टीमों की जर्सी का रंग एक जैसा है, जैसा कि भारत, इंग्लैंड और श्रीलंका के साथ है तो एक टीम को अल्टरनेट जर्सी पहननी होती है. कई बार ऐसे मौकों पर भारत ने नारंगी रंग की जर्सी भी पहनी है. वर्ष 2019 के वर्ल्ड कप फाइनल में भी भारत ने मेजबान देश इंग्लैंड के खिलाफ नारंगी रंग की जर्सी पहनी थी.

– आईसीसी ये तय करता है कि जर्सी पर देश के नाम, खिलाड़ी के नाम और प्रायोजकों के लोगो का आकार और जगह क्या होगी.

– रंग ऐसा होना चाहिए जो सफेद गेंद के साथ कंट्रास्ट पैदा करे ताकि खिलाड़ियों और अंपायरों को गेंद साफ दिखे.

क्या इसमें ब्राडकास्टर की भी चलती है

हां, कई बार ब्रॉडकास्टर भी अपने सुझाव देते हैं. उनकी इसे लेकर अपनी प्राथमिकताएं होती हैं. बोर्ड्स को यह भी ध्यान रखना पड़ता है कि जर्सी का रंग टीवी पर और फ्लडलाइट्स के नीचे कैसा दिखेगा. इसीलिए समय-समय पर रंगों के शेड्स बदले जाते हैं.

इन खेलों में भी भारत की जर्सी ब्लू रंग की

फील्ड हॉकी – हॉकी इंडिया की आधिकारिक जर्सी का रंग भी नीला है. भारतीय हॉकी टीम को भी गर्व से मेन इन ब्लू और महिला टीम को वूमन इन ब्लू कहा जाता है. आमतौर पर इनकी जर्सी क्रिकेट के मुकाबले थोड़ी अलग शेड जैसे स्काई ब्लू या रॉयल ब्लू की होती है.

फुटबॉल – भारतीय फुटबॉल टीम का उपनाम ही ब्लू टाइगर्स है. उनकी ‘होम किट’ हमेशा नीले रंग की होती है, जिस पर अक्सर बाघ की धारियों जैसा पैटर्न बना होता है.

कबड्डी – भारत की कबड्डी टीम भी नीले रंग की जर्सी पहनती है. प्रो-कबड्डी के आने के बाद इसमें कई डिजाइन्स आए हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मैचों में नीला रंग ही प्राथमिकता रहता है.

बास्केटबॉल और वॉलीबॉल – इन खेलों में भी भारतीय राष्ट्रीय टीमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नीले रंग की किट का उपयोग करती हैं.

ओलंपिक और एशियाई खेल – जब भारत का पूरा दल किसी बड़े मल्टी-स्पोर्ट इवेंट में हिस्सा लेता है, तो उनकी सेरेमोनियल ड्रेस और ट्रैकसूट में अक्सर नेवी ब्लू रंग प्रमुखता से दिखाई देता है.

चूंकि भारत और इंग्लैंड दोनों टीमें आमतौर पर नीले रंग की जर्सी पहनती हैं लेकिन जब उनका आमना सामना होता है तो एक टीम को अपनी जर्सी का रंग बदलना होता है. इस बार जब भारत की टीम टी20 वर्ल्ड कप में मुंबई में इंग्लैड के खिलाफ सेमीफाइनल मैच खेला तो इंग्लैंड की टीम को लाल रंग की जर्सी पहननी पड़ी.

वर्ल्ड क्रिकेट में नीला रंग पहनने वाली टीमें

इंग्लैंड – इंग्लैंड की वनडे और टी20 जर्सी आमतौर पर नीले रंग की होती है. उनके लिए नीला रंग उनके ‘थ्री लॉयन्स’ लोगो और ऐतिहासिक खेल परंपरा का हिस्सा है. कई बार वो गहरे नीले या रॉयल ब्लू रंग का उपयोग करते हैं.

श्रीलंका – श्रीलंका की जर्सी का प्राथमिक रंग भी नीला है. ये उनके द्वीप राष्ट्र के समुद्र से घिरा हुआ होने और शांति का प्रतीक है. उनकी जर्सी में अक्सर पीले रंग की पट्टियां और शेर का प्रतीक होता है.

अफगानिस्तान – अफगानिस्तान की टीम भी नीले रंग की जर्सी पहनती है. उनके लिए यह रंग उनके देश में पाए जाने वाले कीमती पत्थर ‘लापिस लाजुली’ को रिप्रेजेंट करता है, जो गहरे नीले रंग का होता है.

स्कॉटलैंड – स्कॉटलैंड की जर्सी अक्सर गहरे नीले या बैंगनी रंग की होती है, जो उनके राष्ट्रीय ध्वज और उनके प्रतीक ‘थिसल’ से प्रेरित है.

नामीबिया – यह टीम भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरे नीले रंग की जर्सी का उपयोग करती है.

वैसे एक रोचक बात ये भी है कि जहां भारत, इंग्लैंड, और श्रीलंका ‘नीली’ टीमें हैं वहीं पाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका और बांग्लादेश ‘हरी’ टीमें हैं.

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