Why India does not buy US fighter Jets: रूस से सुखोई, फ्रांस से राफेल…मगर भारत ने कभी अमेरिका से फाइटर जेट क्यों नहीं खरीदा? जानिए असल वजह

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राफेल हो या सुखोई…भारत के पास फाइटर जेट्स का जखीरा है. कोई फ्रांस का है तो कोई रूस का. मगर क्या आपने गौर किया कि हमारे पास अमेरिका का एक भी फाइटर जेट नहीं है. जी हां, भारत रूस और फ्रांस से फाइटर जेट खरीद लेता है, मगर अमेरिका से नहीं. भारत ने अमेरिका से अपाचे हेलिकॉप्टर और टोही विमान पी-8आई खरीदे हैं. मगर एक भी अमेरिकी फाइटर जेट अब तक नहीं खरीदा है. जबकि भारत और अमेरिका के बीच संबंध ठीक-ठाक रहे हैं. दोनों देश डिफेंस रिश्ते भी बढ़ा रहे हैं. अब सवाल है कि आखिर वाशिंगटन के साथ डिफेंस रिश्ते बढ़ाने के बावजूद नई दिल्ली लगातार अमेरिकी फाइटर जेट खरीदने से क्यों बचता रहा है? इसकी वजह अब सामने आ गई है.

एनडीटीवी के एक डिटेल्ड एनालिसिस में बताया गया है कि ईरान में अभी ऑपरेट कर रहे कई एयरक्राफ्ट पिछले दो दशकों में कई बार भारत को ऑफर किए गए हैं. इनमें F/A-18 सुपर हॉर्नेट, F-15E स्ट्राइक ईगल, F-16 फाइटिंग फाल्कन, F-22 रैप्टर, F-35 लाइटनिंग II और B-2 स्टील्थ बॉम्बर शामिल हैं. मगर भारत ने उन सभी फाइटर एयरक्राफ्ट के प्रपोज़ल को मना कर दिया, जबकि उसने कई दूसरे अमेरिकी मिलिट्री प्लेटफॉर्म खरीदे हैं.

सामने आ गई असल वजह

इस रिपोर्ट में बताया गया कि इस रीजन में अभी अमेरिकी मिलिट्री की तैनाती में कैरियर-बोर्न F/A-18 सुपर हॉर्नेट, गल्फ बेस से ऑपरेट करने वाले F-15E स्ट्राइक ईगल, लगातार एयर डिफेंस पेट्रोलिंग करने वाले F-16, इज़राइल से तैनात F-22 स्टील्थ फाइटर, लंबी दूरी के स्ट्राइक मिशन उड़ाने वाले B-2 स्टील्थ बॉम्बर और लेयर्ड एयर डिफेंस सिस्टम के खिलाफ ऑपरेट करने वाले F-35 स्टील्थ फाइटर शामिल हैं. प्लेटफॉर्म का यह जमावड़ा हाल के दशकों में US कॉम्बैट एयरपावर के सबसे बड़े ग्रुप में से एक है.

भारत ने अमेरिका से क्या-क्या खरीदा

हालांकि, यह भी हकीकत है कि फाइटर जेट्स को छोड़कर अमेरिका से भारत की डिफेंस खरीद बढ़ रही है. अमेरिकी फाइटर जेट्स में कमी के बावजूद भारत ने पिछले दस सालों में यूनाइटेड स्टेट्स यानी अमेरिका से डिफेंस खरीद में काफी बढ़ोतरी की है. भारत ने कई बड़े अमेरिकी प्लेटफॉर्म खरीदे हैं, जिनमें ये शामिल हैं:

  • C-17 ग्लोबमास्टर स्ट्रेटेजिक ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट
  • C-130J सुपर हरक्यूलिस टैक्टिकल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट
  • P-8I पोसाइडन मैरीटाइम सर्विलांस एयरक्राफ्ट
  • AH-64 अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर
  • CH-47 चिनूक हेवी-लिफ्ट हेलीकॉप्टर

अमेरिकी फाइटर जेट्स से भारत का हाय तौबा
भारत के सर्विलांस और स्ट्राइक रोल के लिए MQ-9B प्रीडेटर ड्रोन शामिल करने की भी उम्मीद है. ये खरीद अरबों डॉलर की डिफेंस खरीद हैं, जिससे यूनाइटेड स्टेट्स हाल के सालों में भारत के सबसे बड़े हथियार सप्लायर में से एक बन गया है. हालांकि, फाइटर एयरक्राफ्ट एक ऐसी बड़ी कैटेगरी बनी हुई है, जहां भारत ने लगातार अमेरिकी प्लेटफॉर्म से परहेज किया है.

भारत की फाइटर जेट खरीदने की स्ट्रेटेजी की ऐतिहासिक जड़ें:

एनडीटीवी के मुताबिक, अमेरिकी फाइटर एयरक्राफ्ट पर निर्भर रहने में भारत की हिचकिचाहट कोल्ड वॉर के इतिहास से बनी है. उस समय अमेरिका ने भारत के मुख्य क्षेत्रीय दुश्मन पाकिस्तान को F-86 सेबर, F-104 स्टारफाइटर, F-86D, A-37 और बाद में F-16 फाइटिंग फाल्कन जैसे कई फ्रंटलाइन एयरक्राफ्ट सप्लाई किए थे. पाकिस्तान ने भारत के साथ लड़ाई में इन एयरक्राफ्ट को ऑपरेट किया.

इस वजह से भारत ने अमेरिकी सिस्टम से हटकर अपने फाइटर खरीदने में अलग-अलग तरह के बदलाव किए और अपनी एयर फोर्स को दूसरे सोर्स से मिले एयरक्राफ्ट के आस-पास बनाया. एनडीटीवी ने बताया कि दशकों से इंडियन एयर फोर्स ने MiG-21, MiG-23, MiG-29, और Su-30MKI जैसे प्लेटफॉर्म के साथ-साथ जगुआर, मिराज 2000, और हॉकर हंटर जैसे वेस्टर्न एयरक्राफ्ट को भी शामिल किया है. Su-30MKI आज भी भारत के लड़ाकू विमानों के बेड़े की रीढ़ बना हुआ है.

1998 के न्यूक्लियर टेस्ट और अमेरिका का बैन

भारत की स्ट्रेटेजिक सोच को बनाने वाला एक और बड़ा फैक्टर मई 1998 में भारत के न्यूक्लियर टेस्ट पर US का रिस्पॉन्स था. न्यूक्लियर टेस्ट के बाद क्लिंटन एडमिनिस्ट्रेशन ने बैन लगाए और भारत को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर रोक लगा दी. इस घटना ने भारत के स्ट्रेटेजिक सिस्टम में ज़रूरी डिफेंस कैपेबिलिटी के लिए विदेशी सप्लायर पर डिपेंडेंस को लेकर चिंता को और बढ़ा दिया.

हालांकि बाद के दशकों में नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच रिश्ते काफी बेहतर हुए, लेकिन उस समय की विरासत भारत की डिफेंस प्लानिंग की सोच का हिस्सा बनी हुई है.

ऑपरेशनल डिपेंडेंस को लेकर चिंता

  • एनडीईवी ने बताया कि इंडियन डिफेंस प्लानर्स लंबे समय से फाइटर एयरक्राफ्ट को दूसरे मिलिट्री प्लेटफॉर्म से अलग तरह से देखते रहे हैं. ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट या हेलीकॉप्टर के उलट फाइटर जेट किसी देश की एयर कॉम्बैट कैपेबिलिटी का कोर होते हैं.
  • किसी विदेशी सप्लायर से ऐसे प्लेटफॉर्म लेने से स्पेयर पार्ट्स सप्लाई, सॉफ्टवेयर अपडेट और एक्सपोर्ट अप्रूवल जैसे एरिया में डिपेंडेंस बन सकती है.
  • भारत ने ऐसे मामले भी देखे हैं जहां अमेरिका-ओरिजिनल इक्विपमेंट के लिए स्पेयर पार्ट्स या अपग्रेड तक पहुंच पॉलिटिकल टेंशन का सब्जेक्ट बन गई.
  • रिपोर्ट में पिछले एपिसोड्स का ज़िक्र किया है, जहां पाकिस्तान के F-16 फ्लीट को स्पेयर पार्ट्स पर पाबंदियों का सामना करना पड़ा और जहां टर्की को यूनाइटेड स्टेट्स के साथ डिफेंस कोऑपरेशन से जुड़ा प्रेशर झेलना पड़ा.

अमेरिका ने भारत को फाइटर एयरक्राफ्ट के ऑफर किए

अमेरिका ने बड़े डिफेंस टेंडर में भारत को बार-बार फाइटर एयरक्राफ्ट ऑफर किए हैं. 2000 के दशक में भारत के मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट कॉम्पिटिशन के दौरान अमेरिका ने F-16 और F/A-18 सुपर हॉर्नेट ऑफर किए थे.

भारत ने फ्रांस से राफेल खरीदी है.

बाद के सालों में अमेरिका ने खास तौर पर भारत के लिए F-16 का एक एडवांस्ड वेरिएंट F-21 नाम से प्रपोज़ किया. हाल ही में वॉशिंगटन ने F-15EX ईगल II भी ऑफर किया, जो F-15 एयर सुपीरियरिटी फाइटर का अपग्रेडेड वर्जन है. भारत ने इन प्रपोज़ल पर आगे कोई कार्रवाई नहीं की.

राफेल का चुनाव और नेवल फाइटर का मूल्यांकन

भारत ने आखिरकार अपनी मीडियम मल्टीरोल फाइटर की जरूरत के लिए फ्रांस से डसॉल्ट राफेल को चुना. इंडियन नेवी ने एयरक्राफ्ट कैरियर ऑपरेशन के लिए F/A-18 सुपर हॉर्नेट का भी मूल्यांकन किया. हालांकि, इंडियन एयर फोर्स द्वारा राफेल की खरीद ने फाइटर खरीदने की बड़ी प्रक्रिया पर असर डाला.

बालाकोट एयर कॉम्बैट एपिसोड

रिपोर्ट में फरवरी 2019 में पाकिस्तान के बालाकोट में एक आतंकवादी कैंप पर भारत के एयरस्ट्राइक के बाद हुई हवाई लड़ाई का भी ज़िक्र है. इसके बाद हुई एयर कॉम्बैट के दौरान पाकिस्तान ने F-16 फाइटर भेजे, जबकि भारत ने मिग-21 बाइसन समेत एयरक्राफ्ट तैनात किए. यह घटना फाइटर खरीदने को लेकर बड़ी स्ट्रेटेजिक चर्चा का हिस्सा बन गई.

उभरते हुए स्टील्थ फाइटर पर विचार

अमेरिका ने भी भारत को F-35 स्टील्थ फाइटर देने के लिए खुलेपन का संकेत दिया है. हालांकि, भारत ने इस प्रस्ताव पर औपचारिक रूप से कोई बातचीत नहीं की है. हाल की रिपोर्टों से पता चला है कि भारतीय वायुसेना रूसी Su-57 स्टील्थ फाइटर को एक संभावित विकल्प के तौर पर देख रही है, हालांकि अभी तक कोई आखिरी फैसला नहीं हुआ है.

एक लंबे समय से चला आ रहा खरीद का पैटर्न

पिछले एक दशक में अमेरिका से भारत की रक्षा खरीद लगातार बढ़ी है, खासकर ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, हेलीकॉप्टर और समुद्री निगरानी प्लेटफॉर्म में. हालांकि, एक के बाद एक भारतीय सरकारों ने फाइटर एयरक्राफ्ट खरीदने के लिए एक जैसा तरीका बनाए रखा है. भारत ने मुख्य रूप से रूस, फ्रांस और घरेलू प्रोग्राम से फाइटर खरीदे हैं, जिसमें तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट भी शामिल है.

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