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महंगे कीटनाशकों को कहें बाय-बाय! पक्षी खुद करेंगे खेतों से सुंडियों का सफाया

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Agriculture News: खेतों में अब महंगी कीटनाशक दवाइयों की जगह अंग्रेजी का ‘T’ अक्षर फसल की रक्षा करेगा. कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञ डॉ. हादी हुसैन खान ने एक ऐसी प्राकृतिक तकनीक साझा की है, जिससे बिना एक भी रुपया खर्च किए सुंडियों और इल्लियों का सफाया किया जा सकता है. एक एकड़ में मात्र 8-10 लकड़ियों का सही इस्तेमाल कैसे आपकी फसल के लिए सुरक्षा कवच बन सकता है और क्यों इसे ‘पक्षियों का मचान’ कहा जा रहा है, इस खबर में जानिए कैसे आप खेती की लागत घटाकर पैदावार को केमिकल मुक्त बना सकते हैं.

शाहजहांपुर: खेती-किसानी में कीटों का हमला किसानों की सबसे बड़ी चिंता होती है, जिसे दूर करने के लिए अक्सर महंगे और जहरीले रसायनों का सहारा लेते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिना एक रुपया खर्च किए भी आप अपनी फसल को इल्लियों और सुंडियों से बचा सकते हैं? एक्सपर्ट का कहना है कि ‘पक्षी मचान’ या ‘बर्ड पर्चर’ एक ऐसी ही शानदार तकनीक है, जिससे कीट नियंत्रण आसानी से किया जा सकता है. यह एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) का एक यांत्रिक तरीका है, जो न केवल खेती की लागत घटाता है बल्कि पर्यावरण को भी सुरक्षित रखता है. यह छोटी सी तकनीक आपकी फसल के लिए सुरक्षा कवच बन सकती है.

कृषि विज्ञान केंद्र नियामतपुर में तैनात कृषि विशेषज्ञ डॉ. हादी हुसैन खान ने बताया कि पक्षी मचान (Bird Percher) एकीकृत कीट प्रबंधन की एक बेहद प्रभावी यांत्रिक विधि है. इसमें किसान लकड़ी या डंडे की मदद से अंग्रेजी के ‘T’ आकार के मचान बनाकर फसल की थोड़ी ऊंचाई पर लगाते हैं. जब पक्षी इन मचानों पर बैठते हैं, तो वे खेत में मौजूद हानिकारक इल्लियों, सुंडियों और कीटों के अंडों को आसानी से देख लेते हैं और उन्हें खाकर नष्ट कर देते हैं. एक एकड़ खेत में मात्र 8 से 10 पक्षी मचान लगाकर किसान रसायनों पर होने वाले भारी खर्च को बचा सकते हैं और अपनी फसल को प्राकृतिक रूप से सुरक्षित रख सकते हैं.

खेत का प्राकृतिक रक्षक है ये मचान
पक्षी मचान बनाना बहुत आसान है. इसके लिए लकड़ी के दो डंडों को अंग्रेजी के ‘T’ अक्षर के आकार में जोड़कर खेत में गाड़ दिया जाता है. ध्यान रहे कि इसकी ऊंचाई फसल से थोड़ी ऊपर हो ताकि पक्षी वहां आराम से बैठ सकें. यह विधि पूरी तरह से इको-फ्रेंडली है. इससे न केवल मित्र पक्षियों को बैठने की जगह मिलती है, बल्कि वे खेत के पहरेदार बनकर कीटों का सफाया भी करते हैं, जिससे फसल सुरक्षित रहती है.

केमिकल मुक्त कीट प्रबंधन
अक्सर किसान सुंडियों को खत्म करने के लिए कई तरह के महंगे कीटनाशकों का छिड़काव करते हैं. ये केमिकल न केवल मिट्टी की सेहत बिगाड़ते हैं, बल्कि हमारे स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक हैं. पक्षी मचान तकनीक अपनाने से रसायनों की जरूरत कम हो जाती है. यह एक जैविक नियंत्रण की तरह काम करता है, जहां प्रकृति खुद ही कीटों का संतुलन बनाए रखती है. कम लागत में कीट प्रबंधन का यह सबसे टिकाऊ और सुरक्षित विकल्प माना जाता है.

प्रति एकड़ लागत और लाभ
विशेषज्ञों की सलाह है कि बेहतर परिणाम के लिए प्रति एकड़ कम से कम 8 से 10 मचान लगाने चाहिए. इस विधि से खेती की इनपुट लागत काफी कम हो जाती है क्योंकि कीटनाशकों का खर्च बचता है. इसके अलावा, यह विधि पारिस्थितिक तंत्र को भी मजबूत करती है. छोटे किसान जिनके पास संसाधनों की कमी है, उनके लिए यह तकनीक किसी वरदान से कम नहीं है. किसान इसे अपनाकर अपनी खेती को सुरक्षित और लाभकारी बना सकते हैं.

About the Author

Seema Nath

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें

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