दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे बनने से यूपी के इस गांव में पसरा सन्नाटा, लोग पलायन को मजबूर, जानिए वजह
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Saharanpur News: मोहंड गांव जहां कभी चहलकर्मी हुआ करती थी लेकिन आज यह गांव बिल्कुल सुनसान हो चुका है आलम यह है कि यहां से वाहन गुजरते बंद हो चुके हैं और लोग सीधा एक्सप्रेसवे में से होकर जा रहे हैं इसके चलते यहां का व्यापार पूरे तरीके ठप हो चुका है और लोग अब यहां से घर छोड़ने को मजबूर है.
सहारनपुर: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे जो कि सहारनपुर जिले से होकर गुजर रहा है जहां इस एक्सप्रेसवे का सैकड़ो गांव को फायदा मिल रहा है तो वही कुछ गांव ऐसे भी है जो इस हाइवे के बनने से पूरे तरीके से खात्मे की ओर जा रहे हैं, उन्हीं में से एक है मोहंड गांव, जहां कभी चहलकदमी हुआ करती थी लेकिन आज यह गांव बिल्कुल सुनसान हो चुका है. आलम यह है कि यहां से वाहन गुजरने बंद हो चुके हैं और लोग सीधा एक्सप्रेसवे में से होकर जा रहे हैं. इसके चलते यहां का व्यापार पूरी तरीके ठप हो चुका है और लोग अब यहां से घर छोड़ने को मजबूर हैं.
सुनसान हुआ कभी गुलजार रहने वाला मोहंड
सर्विस रोड बंद होने से आधा दर्जन से ज्यादा गांवों के ग्रामीणों को परेशानी उठानी पड़ रही है. उन्हें आवागमन के साधन तो मिल ही नहीं रहे हैं, साथ ही मोहंड में कारोबार भी ठप हो गया है. इसके साथ ही कभी रात के वक्त भी गुलजार रहने वाली मोहंड की मार्केट अब दिन में भी वीरान पड़ी है. काम न होने के कारण ज्यादातर होटल, ढाबे और चाय की दुकानें बंद हो गई हैं. लोगों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है. ग्रामीणों ने डीएम को ज्ञापन देकर इस मार्ग को खोलते हुए इस पर रोडवेज बसों के संचालन की मांग की.
मोहंड मार्ग बंद होने से आधा दर्जन गांवों के बाशिंदे परेशान
मोहंड निवासी गुलफाम ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि यहां पर रहते हुए उनकी तीसरी पीढ़ी चल रही है. हमारा यहां पर रेस्टोरेंट और मैकेनिकल काम था. फादर एक्सपायर होने के बाद हम लोग यहीं पर ही शिफ्ट हो गए थे. उसके बाद से यहीं पर ही अपना काम चल रहा था. एक्सप्रेसवे शुरू होने से यहां पर रोड को पूरे तरीके से बंद कर दिया है, जिसके कारण यहां पर ग्राहक आने भी बंद हो गए हैं. साथ ही यहां पर स्कूल, हॉस्पिटल, क्लिनिक किसी की कोई सुविधा नहीं है. किसी बच्चे के इंटर तो किसी के हाई स्कूल के पेपर चल रहे हैं, तो कुछ बच्चों के पेपर भी छूट गए हैं. यहां से आने जाने का रास्ता भी बंद हो गया है. एक्सप्रेस के शुरू होने से प्रभावित हुआ यह अकेला गांव नहीं है. इसके आसपास के लगभग दर्जनों गांव भी प्रभावित हुए हैं. डीएम साहब को ज्ञापन देकर हमने रोडवेज बस की मांग की है, जिससे कि यहां के लोग काम को जा सकें. साथ ही गांव में मेहमान आ सकें.
सर्विस रोड बंद होने से रोजी रोटी का गहरा रहा संकट
ग्रामीण अलाउद्दीन ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि सभी वाहन हाईवे के ऊपर से जाने से इस रोड को बंद कर दिया गया है, यहां पर जो गिनी चुनी गाड़ियां आया करती थी, लेकिन उनको फॉरेस्ट वाले लोगों ने रोक दिया है और उनको वापस कर दिया जाता है. कुछ आदमी ऐसे हैं जो आज भी पुराने मार्ग से देहरादून जाना चाहते हैं जो कि पहाड़ों का आनंद और प्रकृति का मजा लेना चाहते हैं. वो लोग यहां पर रुक कर नाश्ता पानी किया करते थे. लेकिन जिस तरीके से फॉरेस्ट वालों ने बैरिकेडिंग लगाकर रोड को बंद कर दिया है. उससे इस गांव के लोगों पर रोजी-रोटी का संकट है. हम लोग यह मांग करते हैं कि इस पुराने रोड को सर्विस रोड के रूप में चलाया जाए. अधिकारियों ने सिर्फ आश्वासन दिया है लेकिन अभी तक ऐसा कुछ भी हमारे लिए नहीं किया गया.
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पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें