रानीपुर टाइगर रिजर्व गिद्धों का बना सुरक्षित घर, बाघ, तेंदुए के साथ मंडराते आएंगे नजर
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वन विभागीय निगरानी के दौरान एक साथ दो दर्जन से अधिक संरक्षित गिद्धों को देखे जाने के बाद पूरा रिजर्व क्षेत्र इन दुर्लभ पक्षियों की मौजूदगी से गुलजार हो उठा है. यह वही चित्रकूट है जहां एक समय गिद्ध पूरी तरह से गायब हो चुके थे और पर्यावरणविदों ने इनके भविष्य को लेकर गंभीर चिंता जताई थी,लेकिन अब तस्वीर बदलती दिख रही है.
चित्रकूटः उत्तर प्रदेश का चित्रकूट एक बार फिर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि दर्ज करता दिखाई दे रहा है.हाल ही में पर्यटकों के लिए खोले गए रानीपुर टाइगर रिजर्व से अब एक और अच्छी खबर सामने आई है. यहां जंगलों में जहां पहले पर्यटक बाघ, तेंदुए और अन्य वन्यजीवों को देखने आते थे, वहीं अब आसमान में मंडराते गिद्धों की बढ़ती संख्या इस क्षेत्र को नई पहचान दे रही है.
गिद्धों के वापसी की राह आसान
बता दे कि वन विभागीय निगरानी के दौरान एक साथ दो दर्जन से अधिक संरक्षित गिद्धों को देखे जाने के बाद पूरा रिजर्व क्षेत्र इन दुर्लभ पक्षियों की मौजूदगी से गुलजार हो उठा है. यह वही चित्रकूट है जहां एक समय गिद्ध पूरी तरह से गायब हो चुके थे और पर्यावरणविदों ने इनके भविष्य को लेकर गंभीर चिंता जताई थी, लेकिन अब तस्वीर बदलती दिख रही है रानीपुर टाइगर रिजर्व के गठन के बाद वन विभाग द्वारा लगातार जैव विविधता संरक्षण की दिशा में किए गए प्रयासों का असर अब साफ नजर आने लगा है.और गिद्धों की वापसी की राह आसान हो गई है.
विलुप्ति की कगार पर गिद्ध
वही इस संबंध में डीएफओ प्रत्यूष कुमार कटियार ने लोकल 18 को जानकारी में बताया कि यह क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि और सकारात्मक संकेत है. उन्होंने कहा कि विलुप्ति की कगार पर पहुंचे गिद्धों की वापसी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता है, केंद्र और राज्य सरकार गिद्धों के संरक्षण व संवर्धन के लिए लगातार प्रयासरत हैं. बनारस से आई विशेषज्ञ टीम भी यहां नियमित मॉनिटरिंग और संरक्षण कार्य कर रही है. चित्रकूट को अब गिद्धों का “हॉटस्पॉट” माना जा रहा है,भारत में गिद्धों की नौ प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें प्रमुख रूप से Indian vulture, Red-headed vulture और Egyptian vulture शामिल हैं.
रानीपुर टाइगर रिजर्व गिद्धों का बना सुरक्षित घर
उन्होंने आगे की जानकारी में बताया कि गिद्धों की संख्या घटने का एक बड़ा कारण पशुओं के इलाज में उपयोग होने वाली डाइक्लोफिनैक दवा रही है, जो गिद्धों के लिए घातक साबित होती है,रानीपुर टाइगर रिजर्व में अब गिद्धों के लिए सुरक्षित भोजन और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है. यहां ब्रीडिंग साइट्स भी बढ़ रही हैं, जिससे उनकी संख्या में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है। वन विभाग ने आमजन से गिद्ध संरक्षण में सहयोग की अपील की है. मध्य प्रदेश से बुलाए गए वल्चर स्पेशलिस्ट की टीम की निगरानी में विभाग लगातार कार्य कर रहा है और बढ़ती संख्या से बेहद उत्साहित है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें