वो 5 फिल्में जिसमें ‘होली’ ने बदल दी पूरी कहानी, 1 कॉमेडी से बनी थ्रिलर, 2 में कॉमेडी से बनी थ्रिलर
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होली त्यौहार चुका है. पूरे देश में इसे धूमधाम से सेलिब्रेट किया जा रहा है. होली का त्यौहार खुशियां और जीवन में रंग लेकर आता है. लेकिन बॉलीवुड में यह सिर्फ रंग-बिरंगे गुलाल और अबीर नहीं, बल्कि कहानी को पूरी तरह पलट देने वाला टर्निंग पॉइंट भी है. जहां एक तरफ लोग “बुरा न मानो होली है” कहकर रंग खेलते हैं, वहीं स्क्रीन पर यह त्योहार प्यार, हिंसा, और भ्रम को जन्म देता है. कई फिल्मों में होली का सीन इतना पावरफुल होता है कि वह पूरी प्लॉट को नई दिशा दे देता है.
होली पर बनी फिल्मेंः आज हम बात करेंगे उन पांच क्लासिक फिल्मों की जिसमें होली ने न सिर्फ किरदारों की जिंदगी, बल्कि पूरी फिल्म की कहानी बदल दी. ये सीन इतने आइकॉनिक हैं कि होली आते ही लोगों के दिमाग में चलने लगते हैं. ऑडियंस को याद दिलाते हैं कि रंग कभी-कभी सिर्फ चेहरे नहीं, किस्मत बदलते हैं. कौन-सी हैं ये पांच आइकॉनिक फिल्में, जिनमें होली का त्यौहार कहानी और किरदारों के लिए टर्निंग प्वाइंट बना. आइए जानते हैं.
इस क्रम में पहला नाम फिल्म शोले का है. धर्मेंद्र, अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी, जया बच्चन, संजीव कपूर और अमजद खान स्टारर यह फिल्म ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर क्लासिक फिल्म है. फिल्म के एक सीन में रामगढ़ गांव में होली का त्योहार मनाया जा रहा है. “होली के दिन दिल खिल जाते हैं” गाना गूंज रहा है. जय और बसंती होली खेल रहे हैं. जय और राधा एक-दूसरे को देख रहे हैं. (फोटो साभारः यूट्यूब वीडियोग्रैब)
रामगढ़ में होली का माहौल खुशनुमा है. लेकिन अचानक गब्बर सिंह के गुंडे हमला बोल देते हैं. गब्बर कहता है,“आज रंगों की नहीं, खून की होली होगी!” गब्बर का यह डायलॉग आज भी सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं. गांव में आतंक फैल जाता है. जय और वीरू बहादुरी से लड़ते हैं, लेकिन यह हमला ठाकुर की पुरानी दुश्मनी को और भड़का देता है. यह सीन सिर्फ एक्शन नहीं, बल्कि इंटरवल से पहले कहानी को पूरी तरह मोड़ देता है. इससे पहले फिल्म रोमांस और कॉमेडी से भरी लगती है, लेकिन होली के बाद यह रिवेंज ड्रामा बन जाती है. ‘शोले’ में खून की होली होती है.
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दूसरी फिल्म ‘सिलसिला’ है. यश चोपड़ा की वो रोमांटिक ट्रेजेडी जिसमें होली ने प्यार का इजहार कर दिया. अमिताभ बच्चन, रेखा, जया बच्चन और संजीव कुमार इस फिल्म में होली के दिन “रंग बरसे भीगे चुनर वाली” गाना शुरू होता है. अमित चंदनी पर रंग डालते हैं, दोनों की आंखें मिलती हैं और वे अपनी भावनाएं सार्वजनिक रूप से जाहिर कर देते हैं. जया बच्चन और संजीव कुमार सब कुछ देख रहे हैं. रंगों की आड़ में प्यार का खुला इजहार हो जाता है.
यह सीन फिल्म की पूरी दिशा बदल देता है. पहले अमित और चांदनी अपना प्यार छुपाते हैं, लेकिन होली के बाद सब कुछ खुल जाता है. लव ट्राएंगल और ज्यादा जटिल हो जाता है. “रंग बरसे” आज भी सबसे पॉपुलर होली सॉन्ग है, लेकिन इसका महत्व सिर्फ गाने में नहीं – यह प्यार की हिम्मत दिखाता है.
साल 1993 में आई मीनाक्षी शेषाद्रि, सनी देओल और ऋषि कपूर स्टारर ‘दामिनी’ में होली के सीन को आधार बनाया गया है. यह फिल्म महिला सशक्तिकरण की मिसाल मानी जाती है. फिल्म में मीना और शेखर की शादी के बाद पहली बार होली मनाई जाती है. रंग-बिरंगे कपड़े, गाने-बजाने का माहौल है. होली के बीच दामिनी अपने देवर और उसके दोस्तों को उनके घर की नौकरानी का रेप होते हुए देख लेती है. वह परिवार से बगावत करती है और देवर को सजा दिलाने के लिए केस लड़ती हैं यह होली सीन फिल्म का टर्निंग पॉइंट है. इससे पहले दामिनी एक साधारण बहू लगती है, लेकिन इसके बाद वह एक क्रांतिकारी बन जाती है. ‘दामिनी’ में न्याय की होली देखने को मिली.
साल 2000 में आई ‘मोहब्बतें’ आदित्य चोपड़ा की वो फिल्म जो लव वर्सेज डिसिप्लिन की जंग दिखाती है. गुरुकुल में नारायण शंकर (अमिताभ बच्चन) का सख्त नियम – कोई प्यार नहीं. लेकिन राज आर्यन (शाहरुख खान) संगीत के टीचर बनकर आते हैं. होली का दिन आता है. छात्र “सोनी सोनी अखियों वाली” गाते हुए रंग खेलते हैं. प्रिंसिपल के सख्त नियमों के बावजूद लड़के-लड़कियां एक-दूसरे पर रंग डालते हैं, प्यार जाहिर करते हैं. शाहरुख खान तो प्रिंसिपल के माथे पर रंग लगाकर उन्हें भी मनाते हैं.
यह सीन नियम तोड़ने का प्रतीक बन जाता है. इससे पहले छात्र डरते हैं, लेकिन होली के बाद वे विद्रोह करते हैं. तीन जोड़ों का प्यार खुल जाता है – विक्की-ईशिका, समीर-संझना, करण-दिव्या. नारायण शंकर की सख्ती हिल जाती है. फिल्म का पूरा क्लाइमेक्स इसी विद्रोह पर टिका है. होली ने गुरुकुल की दीवारें तोड़ दीं और प्यार की जीत साबित कर दी. ‘मोहब्बतें’ बिना इस होली सीन के अधूरी रह जाती. यह फिल्म सिखाती है कि रंग खेलते समय कोई नियम नहीं टिकता – प्यार हर बंधन तोड़ देता है.
फिल्म ‘रांझणा’ आनंद राय की वो इंटेंस लव स्टोरी जिसमें होली ने प्यार के भ्रम को उजागर किया. वाराणसी की गलियों में कुंदन (धनुष) और जोया (सोनम कपूर). कुंदन जोया से प्यार करता है, लेकिन जोया उसे सिर्फ दोस्त मानती है. होली का दिन – पूरा शहर रंगों में डूबा है. कुंदन जोया पर रंग डालता है, दोनों के बीच वो जुनून भरा सीन आता है जिसमें कुंदन का पागलपन साफ दिखता है. रंगों की उधम में कुंदन को एहसास होता है कि उसका प्यार एकतरफा है, लेकिन फिर भी वह नहीं छोड़ता. इससे पहले कुंदन का प्यार रोमांटिक लगता है, लेकिन होली के बाद यह भ्रम और जुनून बन जाता है. ‘रांझणा’ में होली ने प्यार को सुंदर नहीं, बल्कि दर्दनाक बना दिया. यह साबित करता है कि होली का रंग कभी-कभी दिल की सच्चाई दिखा देता है – कि प्यार हमेशा खुशी नहीं, भ्रम भी ला सकता है.