पहली ने की छप्परफाड़ कमाई, फिर सुदिप्तो सेन ने ‘द केरल स्टोरी 2’ से क्यों बनाई दूरी? ओटीटी से क्यों है तौबा?
नई दिल्ली. साल 2023 में रिलीज हुई ‘द केरल स्टोरी’ ने बॉक्स ऑफिस पर कम बजट में बड़ी सफलता हासिल कर सबको चौंका दिया था. विवादों के बीच आई इस फिल्म का अनुमानित बजट लगभग 15 से 20 करोड़ रुपए बताया गया था। निर्देशक सुदिप्तो सेन की इस फिल्म ने रिलीज से पहले ही काफी चर्चा बटोरी, जिसका असर इसके कलेक्शन पर साफ दिखाई दिया. 20 करोड़ के मुट्ठीभर बजट में बनी फिल्म ने बॉक्स-ऑफिस पर 300 करोड़ से ज्यादा का कलेक्शन दर्ज किया था.
‘द केरल स्टोरी’ से बॉक्स-ऑफिस पर तहलका मचाने के बावजूद सुदिप्तो सेन इसके सीक्वल से दूर क्यों रहे? ये वो सवाल है जो शायद हर शख्स के दिमाग में घूम रहा होगा. तो चलिए आपके इन सवालों का जवाब देते हैं. न्यूज18 हिंदी के साथ खास इंटरव्यू में सुदिप्तो सेन ने इन सवालों का जवाब दिया.
सुदिप्तो सेन ने ‘द केरल स्टोरी 2’ से दूरी क्यों बनाई?
पहली फिल्म की जबरदस्त सफलता के बाद आखिरकार सुदिप्तो सेन ‘द केरल स्टोरी 2’ से दूर क्यों रहे? इस बारे में वो कहते हैं कि पहली फिल्म बनाने में उन्हें कई साल लगे थे. वो केरल में थे और उस दौरान उन्होंने द केरल स्टोरी में घटित घटनाओं को अपनी आंखों के सामने देखा था. फिल्म में दिखाई गई ‘सच्चाई’ को इकट्ठा करने में उन्हें कई साल लगे और डायरेक्टर का कहना है कि वो बिना किसी रिसर्च के फिल्म नहीं बनाते हैं. वो कहते हैं कि वो सिर्फ व्हाट्सऐप पर आए फॉर्वड मेसेज के दम पर फिल्में बनाने में यकीन नहीं रखते हैं.
‘द केरल स्टोरी 2’ की बॉक्स-ऑफिस पर धीमी शुरुआत का आंकलन कैसे करते हैं?
सुदिप्तो सेन का कहना है कि वो व्हाएट्सऐप मेसेज के आधार पर फिल्म नहीं बना सकते. साथ ही इस बार ‘द केरल स्टोरी 2’ में राजस्थान, हरियाणा जैसी जगहों की स्टोरी को शामिल किया गया है, जिसके बारे में उन्हें कोई अंदाजा नहीं था. वो आगे कहते हैं कि उन्होंने अभीतक फिल्म नहीं देखी है, लेकिन उन्हें यकीन है कि ‘द केरल स्टोरी 2’ के मेकर्स ने अच्छी फिल्म बनाई होगी. साथ ही सुदिप्तो सेन का मानना है कि किसी फिल्म के अच्छे-बुरे होने का पैमाना बॉक्स-ऑफिस कलेक्शन नहीं होता है. सिर्फ बॉक्स-ऑफिस पर कमाई के आंकड़ों के आधार पर किसी फिल्म का आंकलन करना सही नहीं है.
पहली फिल्म की सफलता के बाद क्या दूसरी फिल्म बनाते हुए प्रेशर ज्यादा होता है?
डायरेक्टर का मानना है कि अगर पिछली फिल्म सक्सेसफुल होती है तो दूसरे को बनाते वक्त उन्हें ज्यादा सतर्क रहना पड़ता है. हर किसी की निगाहें आपकी तरह होती हैं जो जाने-अनजाने आपको नर्वस करती हैं. वो कहते हैं कि कई लोग होते हैं जो आप पर नजर गड़ाए रखते हैं और छोटी सी छोटी गलती को क्रिटिसाइज करने का मौका ढूंढ रहे होते हैं. उनके अनुसार जब वो बिना झिझक फिल्में बनाते हैं तो एक निर्देशक के तौर पर वो बेहतर काम कर पाते हैं.
बॉलीवुड में इंडिपेंडेंट फिल्ममेकर के तौर पर सफर कैसा रहा?
सुदिप्तो सेन का मानना है कि फिल्मी परिवार से ताल्लुक न रखने और जमीनी हकीकत से जुड़ी फिल्में बनाने की वजह से उनका रास्ता कभी आसान नहीं रहा. लेकिन वो कहते हैं कि उन्हें आसान रास्ते पसंद भी नहीं हैं. उन्हें हमेशा से अलग रास्तों पर चलना अच्छा लगता है और वो अपनी राह खुद अपनी मेहनत से बनाना चाहते हैं.
फिजिक्स में बैचलर्स और साइकोलॉजी में एमए के बाद फिल्मों का रुख कैसे किया?
वो कहते हैं कि ये उनका सोचा-समझा प्लान था. वो हमेशा से फिल्मों के शौकीन थे, लेकिन फिल्मों की दुनिया में कदम रखने से पहले वो चीजों को सही से समझना चाहते थे. इसके लिए सबसे जरूरी था कि वो साइंस और ह्यूमन साइंस को समझकर फिल्में बनाए. फिल्ममेकर फिल्मों में उतरने से पहले समझना चाहते थे कि आखिर ये ब्रह्मांड और इंसान दोनों किस तरह से काम करते हैं.
ओटीटी से क्यों दूर रहते हैं सुदिप्तो सेन?
इन दिनों जहां अधिकतर फिल्ममेकर्स ओटीटी का रुख कर रहे हैं, वहीं सुदिप्तो सेन अपनी फिल्मों को ओटीटी पर रिलीज करने से बचते आए हैं. वो कहते हैं कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स उनकी फिल्मों के बोल्ड टॉपिक को रिलीज करने का जोखिम नहीं उठाना चाहते हैं. ओटीटी से दूर रहने की दूसरी सबसे बड़ी वजह के बारे में उनका मानना है कि फिल्में बड़े पर्दे पर देखने में ही मजा है. फिल्मों को थिएटर्स में ही देखना चाहिए और बाद में भले ही वो ओटीटी पर आ जाएं. सुदिप्तो सेन के लिए आज भी फिल्मों का मतलब थिएटर्स है.
विवादों से क्यों है गहरा नाता?
सुदिप्तो सेन की फिल्में अक्सर विवादों में घिरी रहती हैं. इसपर वो कहते हैं कि वो सच्ची घटनाओं और अपने रिसर्च के काम के आधार पर फिल्में बनाते हैं जिनपर विवाद अपने आप हो जाते हैं. लोगों को सच सुनने की आदत नहीं है और जब वो अपनी फिल्मों के जरिए सच कहने की कोशिश करते हैं तो विवाद छिड़ जाता है.