किचन से कारोबार तक, पापड़-चिप्स ने लिखी सफलता की नई कहानी, फर्रुखाबाद में आलू से तैयार किए दो दर्जन फ्लेवर, बाजार में है तगड़ी डिमांड
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फर्रुखाबाद की उपजाऊ जमीन पर उगने वाला आलू अब किसानों के लिए सिर्फ फसल नहीं, बल्कि समृद्धि का आधार बनता जा रहा है. जिले के किसानों से सीधे जुड़कर कुछ लोगों ने इसी आलू से पापड़ और चिप्स बनाने का काम शुरू किया, जिसने उनकी किस्मत बदल दी. वही खेत से रसोई और फिर बाजार तक पहुंची इस पहल ने किसानों को बेहतर दाम दिलाए तो वहीं घर बैठे लाखों रुपये का कारोबार.
फर्रुखाबाद: रसोई में इस्तेमाल होने वाला साधारण सा आलू आज इन लोगों के लिए कमाई का बड़ा जरिया बन गया है. घर पर तैयार किए जाने वाले पापड़ और चिप्स ने न सिर्फ उनकी आर्थिक स्थिति सुधारी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर भी बना दिया. कम लागत में शुरू हुए इस छोटे से काम ने अब लाखों रुपये का कारोबार खड़ा कर दिया है, जिससे पूरे परिवार की किस्मत बदल गई है.
फर्रुखाबाद की उपजाऊ जमीन पर उगने वाला आलू अब किसानों के लिए सिर्फ फसल नहीं, बल्कि समृद्धि का आधार बनता जा रहा है. जिले के किसानों से सीधे जुड़कर कुछ लोगों ने इसी आलू से पापड़ और चिप्स बनाने का काम शुरू किया, जिसने उनकी किस्मत बदल दी. वही खेत से रसोई और फिर बाजार तक पहुंची इस पहल ने किसानों को बेहतर दाम दिलाए तो वहीं घर बैठे लाखों रुपये का कारोबार भी खड़ा कर दिया. स्थानीय उत्पादन और मेहनत के दम पर यह मॉडल अब आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रहा है.
चिप्स और पापड़ के बिज़नेस का आइडिया कहां से मिला
लोकल18 प्रदीप कुमार ने बताया कि होली के समय हर घर में चिप्स और पापड़ बनाए और खाए जाते हैं. इसी से प्रेरित होकर उन्होंने इस व्यवसाय की शुरुआत की. इस व्यवसाय ने उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया और अब वह हर महीने अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं. इस व्यवसाय के माध्यम ने अन्य लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया है. यह सभी लोग मिलकर चिप्स और पापड़ बनाने का कार्य करते हैं, जिससे उन्हें भी आर्थिक लाभ हो रहा है.
पापड़ तैयार करने की प्रक्रिया प्रक्रिया
आलू के पापड़ तैयार करने के लिए पहले उच्च गुणवत्ता वाले आलू का चयन किया जाता है. उन्हें उबालकर कद्दूकस किया जाता है और फिर उसमें सेंधा नमक, कसूरी मेथी, लाल मिर्च और अन्य मसाले मिलाए जाते हैं. 2 कुंटल आलू और 1 कुंटल सूजी के पापड़ तैयार किए हैं. उनके उत्पाद व्रत के दौरान भी सेवन किए जा सकते हैं. दुकानदार प्रदीप कुमार के अनुसार चिप्स और पापड़ तैयार करने में लगभग 10,000 से 15,000 रुपये की लागत आती है. उनका मासिक टर्नओवर 50,000 से 60,000 रुपये तक पहुंच चुका है. इस तरह, उनका व्यवसाय न केवल उन्हें बल्कि अन्य लोगों को भी आत्मनिर्भर बना रहा है. उनके चिप्स और पापड़ की सप्लाई फर्रुखाबाद जिले की कई निजी दुकानों और मॉल में हो रही है. इसके अलावा, वे अपने घर से भी इसकी आपूर्ति कर रहे हैं.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें