गाजियाबाद जंक्शन का बुरा हाल, एस्केलेटर खराब होने से सीढ़ियों पर बढ़ा बोझ, क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
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Ghaziabad News: होली और रमजान के मद्देनजर गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर यात्रियों का भारी हुजूम उमड़ रहा है, लेकिन प्रशासन की लापरवाही भारी पड़ रही है. प्लेटफॉर्म 1 और 2 का एस्केलेटर महीने भर से खराब है, जिससे बुजुर्गों और महिलाओं को भारी सामान के साथ सीढ़ियां चढ़नी पड़ रही हैं. अव्यवस्था के चलते कई यात्रियों की ट्रेन छूट गई, तो कई घर लौट गए. हादसे की आशंका के बीच जिम्मेदार अधिकारी मरम्मत का भरोसा ही दे रहे हैं.

फोटो-AI
Ghaziabad News: त्योहारों का सीजन हो और रेलवे स्टेशन पर पैर रखने की जगह न मिले, यह आम बात है. लेकिन जब प्रशासन की लापरवाही और खराब सुविधाओं की वजह से यात्रियों को भारी मुसीबतें झेलनी पड़ें, तो सवाल उठना लाजिमी है. गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर इन दिनों हालात कुछ ऐसे ही हैं. एक तरफ होली और रमजान की वजह से स्टेशन पर यात्रियों का सैलाब उमड़ रहा है, तो दूसरी तरफ महीनों से खराब पड़े एस्केलेटर ने यात्रियों, खासकर बुजुर्गों और महिलाएं काफी परेशान है. प्रशासन के ‘बेहतर व्यवस्था’ के तमाम दावे यहां की भीड़ और अव्यवस्था के आगे पूरी तरह फेल नजर आ रहे हैं.
त्योहारों के बीच दावों की निकली हवा
होली के त्योहार से पहले रेलवे प्रशासन के साथ-साथ RPF (आरपीएफ) और GRP (जीआरपी) ने यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के बड़े-बड़े दावे किए थे. वादा किया गया था कि यात्रियों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी. लेकिन हकीकत दावों से कोसों दूर है. स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 और 2 पर लगा एस्केलेटर पिछले करीब एक महीने से खराब है. इसका नतीजा यह है कि यात्रियों को भारी-भरकम सामान लेकर सीढ़ियों से चढ़ना और उतरना पड़ रहा है. भीड़ इतनी ज्यादा है कि प्लेटफॉर्म पर पैर रखने तक की जगह नहीं है और प्रशासन की ओर से इसे नियंत्रित करने की कोई ठोस प्लानिंग नजर नहीं आ रही.
बुजुर्गों और बीमारों का बुरा हाल
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्टेशन पर मौजूद यात्रियों का दर्द उनकी बातों से साफ झलक रहा है. बरेली जाने के लिए अपने बेटे के साथ आई 65 वर्षीय सुशील देवी बताती हैं कि उन्होंने घर में लिफ्ट लगवाई है ताकि घुटनों के दर्द में राहत रहे, लेकिन स्टेशन पर एस्केलेटर खराब होने की वजह से उन्हें सीढ़ियां उतरनी पड़ीं. इससे उनके पैरों में तेज दर्द होने लगा और सांस फूल गई.
ऐसी ही कहानी रुद्रप्रयाग जा रहे रामप्रकाश पांडे की भी है. उन्होंने बताया कि ट्रेन का सफर आरामदेह होता है, इसलिए उन्होंने पूरे परिवार का टिकट कराया था. लेकिन स्टेशन पर भारी सामान के साथ सीढ़ियां चढ़ना उनके लिए किसी सजा से कम नहीं रहा. वे कहते हैं, ‘इतनी भीड़ और खराब व्यवस्था के बीच स्टेशन पहुंचना ही एक जंग जीतने जैसा है.’
महीने भर से खराब पड़ा है एस्केलेटर
गाजियाबाद रेलवे स्टेशन से रोजाना करीब 150 से ज्यादा ट्रेनें गुजरती हैं और फिलहाल त्योहारों के कारण यात्रियों की संख्या 10,000 के पार पहुंच रही है. इसके बावजूद प्लेटफॉर्म नंबर 1 और 2 का एस्केलेटर पिछले एक महीने से सफेद हाथी बना खड़ा है. इस मामले में गाजियाबाद रेलवे स्टेशन के प्रवक्ता हिमांशु शेखर उपाध्याय का कहना है कि कुछ दिन पहले बिजली के चैंबर में आग लगने के कारण एस्केलेटर का सामान जल गया था. उन्होंने आश्वासन दिया कि मरम्मत का काम जारी है और जल्द ही यात्रियों को सुविधा दोबारा मिलने लगेगी.
अधिकारियों की लाचारी बनी यात्रियों के लिए मुसीबत
एस्केलेटर खराब होने की वजह से पूरा लोड अब सीढ़ियों पर आ गया है. सामान्य से कई गुना अधिक भीड़ होने के कारण हर वक्त भगदड़ जैसी स्थिति बनी रहती है. गनीमत यह रही कि अब तक कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन स्टेशन की हालत को देखकर यात्रियों के मन में हमेशा डर बना रहता है. अव्यवस्था से तंग आकर कई लोग तो घर वापस लौट गए और कई लोगों की ट्रेन तक छूट गई. अधिकारियों की लाचारी यात्रियों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है.
सुरक्षा के लिए फ्लैग मार्च और स्टंट करने वालों पर नजर
दूसरी ओर, पुलिस और प्रशासन ने होली और रमजान को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था सख्त करने की बात कही है. पुलिस आयुक्त जे. रविन्द्र गौड ने बताया कि संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च किया गया है ताकि शांति और सौहार्द बना रहे. इसके साथ ही, सड़कों पर स्टंट करने वालों और अराजक तत्वों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है. लेकिन यात्रियों का सवाल वही है कि स्टेशन के भीतर की सुरक्षा और सुविधाओं का क्या?
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राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें