‘मुझे मेरा बच्चा सलामत चाहिए’, ईरान में फंसे अमेठी के 7 छात्र, भनौली गांव में आंसू बहा रहीं मां, देखें ग्राउंड रिपोर्ट
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ईरान-इजरायल युद्ध से पूरी दुनिया दहशत में है. इस भीषण जंग ने अमेठी में रहने वाले कई परिवारों की भी नींद उड़ा दी है. ईरान गए बच्चों से संपर्क न होने से परिजन सदमे में हैं. ये सभी छात्र अमेठी जिले के मुसाफिरखाना कोतवाली क्षेत्र के भनौली गांव के रहने वाले हैं. करीब 3 महीने पहले उच्च शिक्षा के लिए ईरान गए थे. लोकल 18 की टीम उनके गांव पहुंची. परिजनों का कहना है कि उन्हें अनहोनी की आशंका सता रही है. हालात लगातार तनावपूर्ण हो रहे हैं. अब सरकार से ही सहारा है. पहले बच्चों से लगातार बातचीत हो रही थी. सब कुछ अच्छा था, लेकिन अब कुछ अता-पता नहीं.
अमेठी. ईरान और इजरायल के बीच छिड़े भीषण युद्ध ने उत्तर प्रदेश के अमेठी में रहने वाले कई परिवारों की भी रातों की नींद उड़ा दी है. ईरान गए बच्चों से संपर्क न होने के कारण परिजन सदमे में हैं और उनकी सलामती की दुआ कर रहे हैं. अमेठी के मुसाफिरखाना क्षेत्र के सात छात्र वर्तमान में युद्धग्रस्त ईरान में फंसे हुए हैं. युद्ध शुरू होने के बाद से ही इन छात्रों का अपने परिजनों से संपर्क टूट गया है, जिससे परिवार गहरे सदमे और डर में है. ये सभी छात्र अमेठी जिले के मुसाफिरखाना कोतवाली क्षेत्र के भनौली गांव के रहने वाले हैं. करीब 3 महीने पहले उच्च शिक्षा के लिए ईरान गए थे. परिजनों का कहना है कि पिछले कुछ समय से उनसे कोई बात नहीं हो पा रही है, जिससे अनहोनी की आशंका सता रही है.
लोकल 18 की टीम भनौली गांव पहुंची. बच्चों के परिवार के सदस्य अमजद खान बताते हैं कि करीब चार दिनों से संपर्क नहीं हो पाया है. हालात वहां के लगातार तनावपूर्ण हो रहे हैं. ऐसे में अब सरकार ही सहारा है. अगर हालात और बिगड़ते हैं तो बच्चों को सुरक्षित वतन वापसी करवाई जाए. अमजद कहते हैं कि 3 महीने पहले जब बच्चे पढ़ाई के लिए ईरान गए थे, तब हालत सही थे. हमें अपने बच्चों की चिंता सता रही है. गांव के एक परिवार के सदस्य ने बताया कि उनका भाई भी वहां फंसा है. 3 महीने पहले पढ़ाई के लिए गया था. लगातार बातचीत हो रही थी. सब कुछ अच्छा था, लेकिन अब कुछ अता-पता नहीं. उनका भाई सुरक्षित वापस आए, बस यही चाहते हैं. सफीना बानो ने बताया कि उनकी अपने बेटे से चार दिन से बात नहीं हुई. जालिम हुकूमत ने बच्चों के प्राण संकट में डाल दिए हैं. मुझे तो मेरा बच्चा वापस सुरक्षित मिल जाए, यही चाहते हैं.
पसरा सन्नाटा
गांव के एक छात्र के परिजन इंजीनियर हैदर बताते हैं कि जैसे यूक्रेन में जब युद्ध हुआ तो लोगों को सुरक्षित वतन लाया गया था, उसी तरह उम्मीद है कि सरकार और अधिकारी हमारे गांव के बच्चों की मदद करेंगे. गांव में इस समय सन्नाटा पसरा है. लोग प्रधानमंत्री मोदी और भारत सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं. ईरान में फंसे छात्र-छात्राओं और लोगों में अमेठी के इस गांव से 18 वर्षीय जब्बार खान, सैयद इमाम, अली मोहम्मद, आमिर कुमारी, तरहीर, सदा (35) और नुसरत (55) शामिल हैं.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें