‘130 साल बाद ऐसा संयोग’, चंदौली में महिलाओं ने किया होलिका पूजन, इन जगहों पर भी दहन
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चंदौली की कई कॉलोनियों और मोहल्लों में महिलाओं ने आज होलिका पूजन किया. मंगल गीत गाते हुए परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती दिखीं. कच्चा सूत लपेटकर परिक्रमा किया और नई फसल के दाने अर्पित किए. मारवाड़ी समाज की महिलाओं ने ‘ठंडी होली’ की परंपरा निभाई. जीटी रोड सुभाष पार्क के बगल में भी होलिका सजाई गई है. नई बस्ती में सड़क किनारे सर्विस लेन पर उपले की होलिका बनाई गई है. कूढकला स्थित चकिया-चंदौली तिराहा पर और धर्मशाला रोड के डिवाइडर पर भी होलिका सजाई गई है. शाहकुटी में भी होलिका सज चुकी है.
चंदौली. पूरे देश में रंगों के पर्व होली को लेकर उत्साह चरम पर है. यूपी के चंदौली का भी यही हाल है. सोमवार को यहां कई कॉलोनियों और मोहल्लों में महिलाओं ने विधि-विधान से होलिका पूजन किया. पारंपरिक वेशभूषा में सजी-धजी महिलाएं अपने बच्चों के साथ होलिका स्थल पर पहुंचीं और मंगल गीत गाते हुए परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की. पूजन के दौरान महिलाओं ने कच्चा सूत लपेटकर परिक्रमा की और नई फसल के दाने अर्पित किए. बच्चों में भी इस दौरान खासा उत्साह देखने को मिला. मारवाड़ी समाज की महिलाओं ने सुबह ‘ठंडी होली’ की पूजा की परंपरा निभाई.
आंचल अग्रवाल ने लोकल 18 से कहा कि वे लोग यहां होलिका की पूजा करने आई हैं. उनके समाज में सुबह ठंडी होली की पूजा होती है और इस दिन वे लोग व्रत भी रखती हैं. अपने बच्चों की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली के लिए यह व्रत किया जाता है. वे लोग रोडाली-सांवरिया की पूजा करते हैं और कच्चे सूत से फेरे लगाते हैं और चना और गेहूं की बालियां चढ़ाकर समृद्धि की कामना करते हैं. इस बार 2 मार्च को होलिका दहन होगा और 4 मार्च को हम होली खेलेंगे.
मयूर अग्रवाल ने बताया कि वे लोग परिवार के साथ ठंडी होली माता की पूजा के लिए एकत्र हुए हैं. पंडितों के अनुसार, आज पूजा का विशेष महत्त्व है. होलिका दहन 2 मार्च को होगा, जबकि रंगों की होली हम 4 मार्च को पूरे परिवार के साथ मनाएंगे. नगर में जीटी रोड स्थित सुभाष पार्क के बगल में होलिका सजाई गई है. नई बस्ती में सड़क किनारे सर्विस लेन पर उपले की होलिका बनाई गई है. काली महाल चौराहे पर बीच सड़क पर उपले की होलिका बनाकर उस पर भक्त प्रह्लाद की मूर्ति स्थापित की गई है. कूढकला स्थित चकिया-चंदौली तिराहा पर और धर्मशाला रोड के डिवाइडर पर भी होलिका सजाई गई है. शाहकुटी में भी होलिका सड़क पर ही सजाई गई है.
संशय की स्थिति
इस वर्ष फाल्गुन माह की पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण लगने के कारण होलिका दहन 2 मार्च को आधी रात के बाद होगा. चंद्रग्रहण के कारण होलिका दहन के एक दिन बाद होली खेलने का यह संयोग 130 वर्ष बाद बन रहा है. इससे पहले वर्ष 1894 में ऐसी ही स्थिति बनी थी. सामान्यतः फाल्गुन माह की पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है और चैत्र कृष्ण प्रतिपदा तिथि को होली खेली जाती है. इस वर्ष पूर्णिमा पर ही चंद्र ग्रहण लगने से होलिका दहन को लेकर संशय की स्थिति बनी थी, जिसे अब स्पष्ट कर दिया गया है.
क्या बोले पंडित
पं. अजय कुमार पाठक ने बताया कि हृषिकेश पंचांग के अनुसार, 2 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा और 4 मार्च को होली खेली जाएगी. फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 की शाम 5:19 बजे से शुरू होकर 03 मार्च 2026 को शाम 4:33 बजे तक रहेगी. 2 मार्च की शाम से भद्रा लग जाएगा. भद्रा 3 मार्च की सुबह 04:56 बजे तक रहेगा. 3 मार्च की शाम 05:59 बजे से चंद्रग्रहण लगेगा. इसका मोक्ष 06:47 बजे होगा. ग्रहण काल में स्नान दान आदि किया जाता है. इसी वजह से 2 मार्च को आधी रात के बाद भद्रा पुच्छ काल में होलिका दहन किया जा सकता है.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें