Chandra Grahan 2026: चंद्र ग्रहण से जुड़े 10 सबसे बड़े सवाल और उनके जवाब जान लीजिए

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Chandra Grahan 2026 Date and Timing: देशभर में होली की तैयारियां चल रही हैं और कुछ जगहों पर होलिका दहन भी किया जा रहा है. रंगों के त्योहार में इस बार चंद्र ग्रहण ने खलल डाल दिया है. ज्योतिषाचार्यों की मानें तो इस बार 3 मार्च यानी मंगलवार को चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. इसकी वजह से देश में कई जगहों पर होली 3 मार्च के बजाय 4 मार्च को खेली जाएगी. यह ग्रहण होली के दिन पड़ रहा है, इस वजह से लोगों के मन में इससे जुड़े कई सवाल हैं. कई लोग जानना चाह रहे हैं कि चंद्र ग्रहण कब लगेगा, कितनी देर तक रहेगा, सूतक काल कब से शुरू होगा और कब तक रहेगा. आइए चंद्र ग्रहण से जुड़े 10 सबसे बड़े सवाल और उनके जवाब जान लेते हैं, ताकि आपके मन में किसी तरह की कंफ्यूजन न रहे.

चंद्र ग्रहण 2026 कब लगेगा?
साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को लगेगा. यह ग्रहण दोपहर 3:20 PM से शुरू होकर शाम 6:46 PM तक रहेगा और इसकी कुल अवधि लगभग 3 घंटे 27 मिनट की होगी.

यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा या नहीं?
हां, यह ग्रहण भारत सहित कई हिस्सों में दिखाई देगा. हालांकि ग्रहण का प्रारंभ भारत में कुछ देर बाद होगा, लेकिन शाम को चंद्रमा का प्रभावित भाग दिखाई देना संभव है.

चंद्र ग्रहण को धार्मिक रूप से कैसे देखा जाता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण को अस्थिर समय माना जाता है और इस दौरान कुछ परंपरागत नियमों का पालन करना चाहिए. ग्रहण के समय पूजा-पाठ, शुभ कार्य और भोजन तैयार करने से बचने की सलाह दी जाती है.

सूतक काल कब से शुरू होगा?
चंद्र ग्रहण के दिन सुबह 6:20 AM से ग्रहण का सूतक काल शुरू होगा जो ग्रहण समाप्ति तक प्रभावी रहेगा. सूतक काल को अशुभ समय माना जाता है और इस दौरान कुछ परंपरागत वर्जित क्रियाएं होती हैं.

सूतक काल में क्या करना चाहिए?
सूतक के दौरान धर्मग्रंथों के अनुसार शुभ कार्य, पूजा, भोजन बनाना या मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए. ग्रहण के बाद शुद्धिकरण, स्नान और दान देना शुभ फलदायी माना जाता है.

ग्रहण के दौरान चंद्रमा का रंग क्यों बदलता है?
जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा सीधी रेखा में आ जाते हैं, तो पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है. इसके कारण चंद्रमा लाल या गहरे नारंगी रंग का दिखाई देने लगता है, जिसे ब्लड मून कहा जाता है.

क्या बच्चे, बुजुर्ग या रोगी ग्रहण के दौरान खाना खा सकते हैं?
कुछ धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण के दौरान खाना नहीं खाने की सलाह दी जाती है, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से बच्चे, बुजुर्ग या रोगी हल्का भोजन या फलाहार कर सकते हैं.

चंद्र ग्रहण का ज्योतिषीय प्रभाव क्या होता है?
ज्योतिष के अनुसार ग्रहण का प्रभाव सभी राशियों पर अलग-अलग देखा जाता है. कुछ राशियों के लिए यह शुभ फलदायी हो सकता है और कुछ पर कठिनाइयां बढ़ सकती हैं, इसलिए सतर्कता और संयम जरूरी कहा गया है.

क्या ग्रहण के दौरान बाहर जाकर चंद्र ग्रहण देखना सुरक्षित है?
हां, चंद्र ग्रहण को बिना किसी विशेष सुरक्षा के नंगी आंखों से देखा जा सकता है, क्योंकि इसमें सूर्य की तरह सीधे प्रकाश आंख को नुकसान नहीं पहुंचाता है.

चंद्र ग्रहण का वैज्ञानिक और पौराणिक कारण क्या है?
वैज्ञानिक रूप से ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है और सूरज–पृथ्वी–चंद्रमा सीधी रेखा बनाते हैं. पौराणिक कथाओं में राहु के चंद्रमा को निगलने के कारण भी चंद्र ग्रहण की व्याख्या की जाती है, जो बाद में फिर दिखाई देता है.

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