झूठ बोलने और ऐसे दस्तावेज पेश करने वालों को हो सजा,तभी अदालत में लंबित मामले होंगे कम, संसद में भी उठ चुका मामला
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देश की अदालतों में करीब 5 करोड़ मामले लंबित पड़े हैं. जजों की नियुक्ति बढ़ाने, इमारतें बनाने और डिजिटल सिस्टम लगाने जैसे कदम उठाए गए, लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि असली समस्या झूठी शिकायतों, फर्जी हलफनामों, झूठी गवाही और गलत दस्तावेजों पर सख्त कार्रवाई न होने से है

13 फरवरी 2026 को लोकसभा में भी झूठी गवाही को लंबित मामलों का बड़ा कारण बताया गया.
नई दिल्ली. देश की अदालतों में करीब 5 करोड़ मामले लंबित पड़े हैं. जजों की नियुक्ति बढ़ाने, इमारतें बनाने और डिजिटल सिस्टम लगाने जैसे कदम उठाए गए, लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि असली समस्या झूठी शिकायतों, फर्जी हलफनामों, झूठी गवाही और गलत दस्तावेजों पर सख्त कार्रवाई न होने से है. जब तक झूठ बोलने वालों को तुरंत सजा नहीं मिलेगी, तब तक मामले कम नहीं होंगे.
इसी मुद्दे को लेकर आज प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘सतयुग बिल’ की मांग जोर-शोर से उठाई गई. टीम सतयुग के राघव गर्ग ने ने कहा कि अदालतों में लंबित मामलों और झूठे मुकदमों को कम करने के लिए पांच प्रमुख उपाय जरूरी हैं.
बीएनएसएस की धारा 215 और 379 में बदलाव लाएं, ताकि जज को खुद शिकायतकर्ता बनने की जरूरत न पड़े और कार्रवाई आसान हो. न्याय में बाधा के मामलों का डेटा हर तीन महीने में सार्वजनिक करें. झूठी गवाही और फर्जी सबूतों को अलग से रिकॉर्ड कर फास्ट-ट्रैक करें. प्ली बार्गेनिंग की दर बढ़ाएं, भारत में यह सिर्फ 0.11% है, जबकि विकसित देशों में 90% से ज्यादा है. पहले कानून मजबूत करें, फिर जागरूकता फैलाएं.
वहीं, इस मामले में याचिकाकर्ता और अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि लंबित मामलों की सबसे बड़ी वजह झूठी शिकायत, झूठी गवाही और फर्जी दस्तावेजों पर सजा न मिलना है. जो झूठी शिकायत करता है, उसे सजा नहीं मिलती. जो झूठी गवाही देता है या फर्जी हलफनामा दाखिल करता है, उसे भी सजा नहीं मिलती. बीएनएस और बीएनएसएस में संशोधन जरूरी है.
उन्होंने फर्जी आधार, राशन कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, वसीयत और निवास प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है. मौजूदा कानून में दंड के पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं.
13 फरवरी 2026 को लोकसभा में भी झूठी गवाही को लंबित मामलों का बड़ा कारण बताया गया. 26 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी किया, जिसमें पुलिस थानों और अदालतों में झूठ की सजा की जानकारी बोर्ड पर लगाने की मांग है. अगली सुनवाई अप्रैल में है.