हरियाणा का बजट 2026 यानि एक ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी का विजन, नायब सिंह सैनी के प्रमुख ऐलान क्या रहे, यहां जानें
चंडीगढ़ : हरियाणा विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्य को वर्ष 2047 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य दोहराया. उन्होंने बताया कि हरियाणा विजन डॉक्यूमेंट-2047 इस दिशा में रोडमैप के रूप में कार्य करेगा, जिसका लोकार्पण अमित शाह द्वारा किया जा चुका है. मुख्यमंत्री ने कहा कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार, 2026-31 के लिए केंद्रीय करों में हरियाणा की हिस्सेदारी 1.361% तय हुई है, जो अब तक की सर्वाधिक वृद्धि है. इससे राज्य के राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी. वर्ष 2026-27 में कुल ₹2,23,658.17 करोड़ का बजट प्रस्तावित किया गया है, जो पिछले संशोधित अनुमान से 10.28% अधिक है. उन्होंने इसे जनभागीदारी से बना बजट” बताते हुए कहा कि हजारों सुझावों को शामिल किया गया है.
क्लीन एयर से एआई मिशन तक: विश्व बैंक सहयोग से हरियाणा का हरित एजेंडा
राज्य सरकार ने हरियाणा क्लीन एयर प्रोजेक्ट के लिए विश्व बैंक से ₹2,716 करोड़ की सहायता स्वीकृत होने की जानकारी दी. इस परियोजना के तहत वर्ष 2031 तक पीएम2.5 सहित प्रमुख प्रदूषकों में बड़ी कमी का लक्ष्य रखा गया है.
इसके अलावा वॉटर सिक्योर हरियाणा परियोजना के लिए ₹5,715 करोड़ तथा हरियाणा एआई मिशन के लिए ₹474 करोड़ की स्वीकृति प्रस्तावित है. एआई मिशन के तहत 1 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा और विभागीय सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मॉडल लागू किए जाएंगे.
सरकार ने डिपार्टमेंट ऑफ फ्यूचर के सुझावों के आधार पर 21 प्रस्तावों में ₹1,837 करोड़ का प्रावधान किया है, जिससे राज्य प्रशासन को भविष्य उन्मुख बनाया जा सके.
किसानों के लिए बड़ी घोषणाएं: जैविक खेती, बोनस और सिंचाई सुधार पर जोर
हरियाणा बजट 2026 में कृषि एवं उससे जुड़े क्षेत्रों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं. धान छोड़कर दालें, तिलहन व कपास उगाने वाले किसानों को ₹2,000 प्रति एकड़ अतिरिक्त बोनस दिया जाएगा. देसी कपास प्रोत्साहन राशि ₹3,000 से बढ़ाकर ₹4,000 प्रति एकड़ की जाएगी.
प्राकृतिक/जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए एपीडा प्रमाणित किसानों को ₹10,000 प्रति एकड़ वार्षिक अनुदान मिलेगा. 8 लाख नलकूपों की गुणवत्ता जांच के लिए तीन वर्षीय योजना शुरू होगी.
राज्य में ग्रामीण हाट मंडियां स्थापित की जाएंगी, एफपीओ को सुदृढ़ किया जाएगा और बागवानी बीमा योजना के तहत मुआवजा बढ़ाया जाएगा. मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और डेयरी क्षेत्र के लिए भी नई प्रयोगशालाएं, प्रसंस्करण इकाइयां और प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे.
हरियाणा एग्री डिस्कॉम और ऊर्जा सुधार: किसानों को लगातार बिजली
सीएम नायब सिंह सैनी के अनुसार, किसानों को तेज और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राज्य में हरियाणा एग्री डिस्कॉम नाम से तीसरी बिजली वितरण कंपनी बनाने का प्रस्ताव रखा गया है. यह कंपनी 5,084 कृषि फीडरों और 7.12 लाख कृषि उपभोक्ताओं को सेवाएं देगी.
उदय योजना के तहत लिए गए ₹25,950 करोड़ के लोन में से अब केवल ₹1,730 करोड़ शेष है, जिसे 2026-27 में चुका दिया जाएगा. इससे राज्य के शुद्ध ऋण में कमी आएगी. साथ ही, सभी सरकारी भवनों और पंजीकृत गौशालाओं को सौर ऊर्जा आधारित परिसरों में परिवर्तित करने की घोषणा की गई है.
महिलाओं और युवाओं के लिए खास प्रावधान
हरियाणा बजट को जेंडर और वृद्धजन आधारित बनाने की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने 14-15 वर्ष की 3 लाख बेटियों को एचपीवी वैक्सीन देने का प्रस्ताव रखा. प्रत्येक जिला व उपमंडल अस्पताल में स्वस्थ नारी सशक्त परिवार क्लीनिक बनाए जाएंगे.
औद्योगिक इकाइयों द्वारा स्थानीय युवाओं की भर्ती पर रोजगार सब्सिडी ₹48,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख प्रति कर्मचारी प्रति वर्ष करने का प्रस्ताव है.
हर विधानसभा क्षेत्र में आदर्श परीक्षा केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिनमें पहला केंद्र 25 दिसंबर 2026 तक कुरुक्षेत्र में शुरू होगा.
औद्योगिक पुनरुत्थान और न्यूनतम मजदूरी बढ़ोतरी
हरियाणा सरकार ने मेक इन हरियाणा नीति के तहत ब्लॉक आधारित वर्गीकरण समाप्त कर सभी क्षेत्रों में निवेश प्रोत्साहन देने की घोषणा की है. पुराने औद्योगिक क्षेत्रों के कायाकल्प के लिए ₹500 करोड़ का सक्षम फंड स्थापित होगा.
न्यूनतम मजदूरी को ₹11,257 से बढ़ाकर ₹15,200 प्रतिमाह करने की सिफारिश पर निर्णय लिया जाएगा. इससे लाखों श्रमिकों को लाभ मिलेगा.
हरियाणा ग्रीन क्लाइमेट रेजिलिएंट फंड के लिए ₹100 करोड़ का सीड प्रावधान रखा गया है, जिससे राज्य को 2070 के नेट-जीरो लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा.
यमुना मिशन की घोषणा
मुख्यमंत्री ने जल ही जीवन थीम के तहत यमुना नदी की 313 किमी लंबाई में प्रदूषण समाप्त करने के लिए नया मिशन शुरू करने की घोषणा की. सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता बढ़ाने, औद्योगिक इकाइयों की रियल टाइम मॉनिटरिंग और भूजल पुनर्भरण पर विशेष कार्ययोजना बनेगी. राज्य में जल की वार्षिक मांग और उपलब्धता के बीच बढ़ते अंतर को देखते हुए जल संरक्षण को बजट का केंद्रीय विषय बनाया गया है.