लीची में मंजर आते ही लगेंगे ये 2 रोग, झुलस जाएंगी पत्तियां, काले होकर गिरेंगे फल, एक्सपर्ट से जानें बचाव

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लीची में मंजर आते ही लगेंगे ये रोग, काले होकर गिरेंगे फल, जानें बचाव

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लीची एक ऐसा फल है, जिसकी डिमांड गर्मियों के सीजन में अधिक रहती है. यह काफी महंगी बिकती है और किसानों को अच्छा मुनाफा भी होता है. मार्च से ही लीची के पेड़ों पर बौर निकलना शुरू हो जाता है, लेकिन इसी समय कीट और रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है. लोकल 18 से बात करते हुए बाराबंकी के जिला रक्षा अधिकारी विजय कुमार बताते हैं कि गर्मियों में अधिक तापमान के कारण लीची में झुलसा रोग का प्रकोप होने की संभावना अधिक रहती है. किसानों को समय रहते कुछ उपाय कर लेने चाहिए, आइये जानते हैं.

लीची गर्मियों का पसंदीदा और स्वादिष्ट फल है, जिसकी बागवानी बड़े पैमाने पर की जाती है. मार्च माह से ही लीची के पेड़ों पर बौर निकलना शुरू हो जाता है लेकिन इसी समय कीट और रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है. थोड़ी सी चूक से पूरी फसल नष्ट हो सकती है. ऐसे में लीची की बागवानी करने वाले किसानों को कीट और रोगों से बचाव के लिए कुछ उपाय जरूर अपनाने चाहिए.

बाराबंकी के जिला रक्षा अधिकारी विजय कुमार बताते हैं कि गर्मियों में ज्यादा तापमान पड़ने से लीची पेड़ में फसल आने के समय कई रोग लगने लगते हैं, जिससे फूल और फल सूखने लगते हैं. पैदावार भी कम हो जाती है, जिससे बागवानों को काफी नुकसान होता है. बागवान कुछ चीजों के उपयोग से रोग और कीट से छुटकारा पा सकते हैं.

गर्मियों में अधिक तापमान के कारण लीची में झुलसा रोग का प्रकोप होने की संभावना अधिक रहती है. इससे लीची की फसल को काफी नुकसान होता है. इस रोग में लीची की पत्तियां और कोपलें उच्च तापमान के कारण झुलसने लगती हैं. पत्तियों के सिरों पर भूरे धब्बे होने लगते हैं.

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लीची के पौधे में लगने वाला यह रोग अनेक प्रकार के कवकों के कारण हो सकता है. इस रोग के कारण पौधों की नई पत्तियां और अंकुर झुलस जाते हैं. लीची में झुलसा रोग पत्तियों की नोक पर भूरे धब्बे के रूप में शुरू होता है, जिसका फैलाव धीरे-धीरे पूरे पत्ते पर हो जाता है. जैसे-जैसे रोग बढ़ता है, टहनियों का ऊपरी भाग झुलसा हुआ दिखाई देता है.

लीची की फसल को झुलसा रोग से बचाने के लिए किसानों को मैंकोजेब या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड घोल 0.2 प्रतिशत 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करना चाहिए. रोग के अधिक प्रकोप की स्थिति में कार्बेन्डाजिम 50% डब्लू.पी. या क्लोरोथालोनिल 75% डब्लू.पी. 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें.

लीची में लगने वाला स्टिंक बग कीट गुलाबी या भूरे रंग का बदबूदार होता है. यह कीट झुंड में हमला करता है. इस कीट के नवजात और वयस्क दोनों ही पौधों के कोमल हिस्सों जैसे- कलियों, पत्तियों, फूल और विकसित होते फल, फलों के डंठल और पेड़ की कोमल शाखाओं से रस चूसकर फसल को प्रभावित करते हैं. रस चूसने के बाद फल काले होकर गिर जाते हैं.

लीची की फसल में लगने वाला स्टिंक बग कीट से ग्रस्त पत्तियों और टहनियों को काटकर जला देना चाहिए. सुबह के समय पेड़ की शाखाओं को हल्के झटकों से हिलाएं, ताकि कीट नीचे गिर जाए. गिरे हुए कीटों को इकट्ठा करके मिट्टी में दबाकर नष्ट कर दें.

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